देहरादून का आकर्षण हमेशा से शांत, स्वच्छ और सुरक्षित शहर के रूप में होता आया है, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ ये शहर विस्तार लेता जा रहा है। इस कारण हरित आवरण घटता जा रहा और मौजूदा आबादी के अनुरूप अवस्थापना सुविधाएँ कमतर महसूस होने लगी है । इसी को ध्यान में रखते हुए देहरादून को फिर से हरा-भरा, स्वच्छ और सुनियोजित शहर बनाने की दिशा में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है।
शहर की हरियाली बढ़ाने, सौंदर्यीकरण करने और पर्यावरणीय संतुलन सुधारने के उद्देश्य से प्राधिकरण ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं तैयार की हैं, जिन्हें जल्द धरातल पर उतारे जाने की योजना बनाई जा रही है ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर की प्रमुख सड़कों के डिवाइडरों के मध्य बड़े स्तर पर पौधरोपण कराया जाना प्रस्तावित है। इसमें सजावटी पौधे, रंग-बिरंगे फूल, आकर्षक गमले लगाये जाएंगे, इससे शहर व्यवस्थित होने के साथ इसकी सुंदरता में भी इजाफा होगा। इनकी नियमित देख-बहाल की व्यवस्था की जाएगी, इसमें मिट्टी, खाद, पानी, विशेष उपकरण खरीद जैसे ट्रैक्टर, हाइड्रोलिक ट्राली शामिल है।
देहरादून में लगातार बढ़ते कंक्रीट निर्माण और शहरी विस्तार के कारण ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव तेजी से बढ़ा है। छोटे पार्क, हरित पट्टियां और खुले क्षेत्र सिमटने से तापमान में वृद्धि तथा वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में एमडीडीए की योजना केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शहर को पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सक्षम बनाना भी है।
प्राधिकरण नई आवासीय योजनाओं में ग्रीन बेल्ट को अनिवार्य करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। इससे रिहायशी क्षेत्रों और मुख्य सड़कों के बीच प्राकृतिक अवरोध तैयार होंगे, जो धूल, शोर और प्रदूषण को कम करने में सहायक होंगे। भविष्य में यह व्यवस्था नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान कर सकती है।
जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। देहरादून की रिस्पना और बिंदाल नदियां लंबे समय से अतिक्रमण, कचरे और अव्यवस्थित विकास का दबाव झेल रही हैं। एमडीडीए नदी तटों के नियोजित विकास, सीमांकन और सौंदर्यीकरण पर जोर दे रहा है, जिससे अवैध निर्माण पर रोक लगेगी और प्राकृतिक जल प्रवाह को संरक्षित किया जा सकेगा। इससे मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं में भी इससे निजात मिलने की उम्मीद है।
वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक जाम से वाहनों का धुआं और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। सुनियोजित पार्किंग, चौड़ी सड़कों और बेहतर यातायात व्यवस्था से ईंधन की खपत कम होगी तथा कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन, पैदल मार्ग और साइकिल ट्रैक जैसी सुविधाओं के लिए भी स्थान विकसित किया जा सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को निरंतरता और पारदर्शिता के साथ लागू किया गया, तो देहरादून आने वाले वर्षों में एक आदर्श हरित शहर के रूप में फिर से उभर सकता है। कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुखद जलवायु के लिए प्रसिद्ध रहा देहरादून फिर से “सिटी ऑफ गार्डन्स” की पहचान हासिल कर सकता है।
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से शहर में ग्रीन कवर को प्रभावी रूप से बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, जिससे सभी को राहत मिलेगी : बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए

