Saturday, May 30, 2026
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मलारीवासियों की इनर लाइन परमिट समस्या का जल्द होगा समाधान

ग्रामीणों ने सचिवों के समक्ष अपनी व्यथाएं रखीं। सबसे प्रमुख समस्या इनर लाइन परमिट (ILP) की रही। ग्रामीणों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र होने के कारण उन्हें किसी भी निजी काम से बाहर जाने के लिए इनर लाइन परमिट लेना पड़ता है, जो काफी परेशानी का सबब बन रहा है। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनचर्या और जरूरी कामों में भी इस व्यवस्था के कारण भारी दिक्कतें आ रही हैं।

मलारी : उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के विकास और स्थानीय निवासियों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रदेश सरकार लगातार धरातल पर काम कर रही है। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के तहत शासन के दो वरिष्ठ अधिकारी—गृह सचिव शैलेश बगोली और ग्रामीण विकास सचिव धिराज गर्ब्याल—ने भारत-चीन सीमा से सटे अंतिम क्षेत्रों में से एक, नीती घाटी के अग्रिम गांव मलारी का दौरा किया।

अधिकारियों के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्र के निवासियों की जमीनी समस्याओं को समझना और क्षेत्र में स्वरोजगार व पर्यटन की संभावनाओं को तलाशना था। मलारी गांव पहुंचने पर दोनों सचिवों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने बेहद संजीदगी के साथ अधिकारियों के सामने अपनी सबसे बड़ी समस्या ‘इनर लाइन परमिट’ (Inner Line Permit – ILP) का मुद्दा रखा। ग्रामीणों ने गृह सचिव शैलेश बगोली को बताया कि मलारी और आस-पास का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर एरिया (International Border Area) के अंतर्गत आता है। इस वजह से यहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम हैं।

ग्रामीणों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि यदि उन्हें अपने किसी निजी काम, बीमारी के इलाज या रिश्तेदारों से मिलने के लिए भी गांव से बाहर जाना पड़ता है, या वापस आना होता है, तो उन्हें बार-बार इनर लाइन परमिट की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस जटिल प्रक्रिया के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की कि सीमांत क्षेत्र के मूल निवासियों के लिए इस नियम में ढील दी जाए या कोई स्थाई व सरल समाधान निकाला जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और नेटवर्क जैसी अन्य बुनियादी समस्याओं से भी दोनों सचिवों को अवगत कराया।

ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बाद ग्रामीण विकास सचिव धिराज गर्ब्याल ने स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सुझाव दिया कि वे सीमांत क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और आजीविका को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड सरकार की ‘होम स्टे योजना’ (Home Stay Scheme) का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

सचिव धिराज गर्ब्याल ने कहा कि ग्रामीण अपने पुश्तैनी और पारंपरिक घरों को आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यटकों के लिए होम स्टे में तब्दील करें। इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी सीमांत क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और खान-पान से रूबरू हो सकेंगे। सरकार होम स्टे के लिए सब्सिडी और आसान लोन की सुविधा भी दे रही है।

टिम्मरसैंण बनेगा धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों का बड़ा केंद्र

बैठक में अधिकारियों ने क्षेत्र के विकास को लेकर सरकार के विजन को भी साझा किया। सचिवों ने बाबा बर्फानी के नाम से प्रसिद्ध ‘टिम्मरसैंण’ (Timmasain) में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित की जा रही पर्यटन गतिविधियों और नए निर्माण कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

गृह सचिव शैलेश बगोली ने कहा, “आने वाले समय में टिम्मरसैंण धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों का एक बहुत बड़ा केंद्र बनने वाला है। सरकार यहां बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है ताकि अमरनाथ की तर्ज पर यहां भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सके।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा, तो इसका सीधा फायदा मलारी और नीती घाटी के स्थानीय लोगों को मिलेगा।

अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि इनर लाइन परमिट की समस्या और गांव की अन्य मांगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष रखा जाएगा और सुरक्षा एजेंसियों से समन्वय बनाकर इसका जल्द ही कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाएगा।

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