चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से चमोली जिले की नीति घाटी में रविवार को ‘नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ (Niti Xtreme Ultra Run) का शानदार शुभारंभ हो गया। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में आयोजित यह अल्ट्रा मैराथन न केवल खेल प्रेमियों के लिए चुनौती भरा है, बल्कि ‘बॉर्डर टूरिज्म’ को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित होने जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन चमोली जिले के प्रभारी एवं ग्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं नीति घाटी पहुंचकर इस आयोजन का उद्घाटन करने वाले थे, लेकिन क्षेत्र में अचानक मौसम खराब होने और विजिबिलिटी कम होने के कारण उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका। हालांकि, मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उनके सचिव शैलेश बगोली ने दौड़ में हिस्सा लेकर कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। बगोली ने धावकों के साथ कुछ दूरी तय की और स्थानीय लोगों का उत्साहवर्धन किया।
यह मैराथन ‘बियॉन्ड द कैनियन’ (Beyond the Canyon) थीम पर आधारित है। यह दुनिया की सबसे ऊंचाई वाली अल्ट्रा रनों में से एक मानी जा रही है। धावक समुद्र तल से 10,000 फीट की ऊंचाई से शुरू होकर 14,000 फीट से भी अधिक ऊंचाई वाले रिमखिम क्षेत्र तक दौड़ेंगे। इस दौरान उन्हें बेहद कम ऑक्सीजन, तेज बर्फीली हवाओं, खड़ी चढ़ाइयों और दुर्गम रास्तों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में यह दौड़ न केवल शारीरिक सहनशक्ति बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी कड़ी परीक्षा लेगी।
सचिव पर्यटन धिराज गर्ब्याल ने बताया, “इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य चीन सीमा से सटे इस संवेदनशील इलाके में बॉर्डर टूरिज्म को बढ़ावा देना है। हम चाहते हैं कि स्थानीय युवा और महिलाएं होमस्टे, गाइड, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्राप्त करें। नीति घाटी न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, बल्कि यहां की प्राचीन मंदिर, पारंपरिक संस्कृति और सीमांत जीवनशैली पर्यटकों को आकर्षित करेगी।”
इस अल्ट्रा रन में देशभर के 27 राज्यों से सैकड़ों धावक शामिल हुए हैं। इनमें पेशेवर अल्ट्रा रनर्स, ट्रेल रनिंग प्रेमी और एडवेंचर स्पोर्ट्स के उत्साही युवा शामिल हैं। दौड़ के विभिन्न कैटेगरी रखे गए हैं, जिनमें शॉर्ट, मीडियम और फुल अल्ट्रा डिस्टेंस शामिल हैं। आयोजकों ने धावकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), भारतीय सेना, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन पूरे मुस्तैद हैं। हर चेकपॉइंट पर मेडिकल टीम तैनात है और इमरजेंसी हेलीकॉप्टर सेवा भी तैयार रखी गई है।
नीति घाटी सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यह जोशीमठ से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां से भारत-चीन सीमा काफी निकट है। 2021-22 में जोशीमठ में आए भूधंसाव के बाद इस क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था। ऐसे में इस तरह के आयोजन न केवल पर्यटन को पुनर्जीवित करने में मदद करेंगे, बल्कि क्षेत्र की सकारात्मक छवि भी प्रस्तुत करेंगे।
स्थानीय लोगों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह है। कई महिलाओं ने होमस्टे तैयार किए हैं, स्थानीय हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक उत्पादों की दुकानें सजाई गई हैं। ग्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा, “यह आयोजन केवल एक खेल कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की सीमांत विरासत को दुनिया के सामने लाने का माध्यम है। मुख्यमंत्री जी का विजन है कि पहाड़ की हर घाटी पर्यटन के माध्यम से आत्मनिर्भर बने।”
मौसम की चुनौतियों के बावजूद धावकों का जोश देखते ही बनता है। कई धावकों ने बताया कि ऐसी ऊंचाई पर दौड़ना उनके लिए जीवन का सबसे यादगार अनुभव साबित होने वाला है। आयोजन की सफलता के बाद इसे हर वर्ष आयोजित करने की योजना है, जिससे उत्तराखंड एडवेंचर टूरिज्म का हब बने।
सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने बताया, यह आयोजन न केवल खेल और पर्यटन को जोड़ रहा है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अनूठी पहल साबित हो रहा है। नीती एक्सट्रीम अल्ट्रा रन उत्तराखंड की उस नई यात्रा का प्रतीक है, जहां चुनौतियां ही अवसरों में बदल रही हैं।

