Tuesday, May 5, 2026
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दून-ऋषिकेश से विकासनगर तक रजिस्ट्री माफिया का भंडाफोड़

अभिलेखों में हेराफेरी, संपत्तियों का जानबूझकर कम मूल्यांकन कर स्टांप शुल्क में चोरी और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के कई मामले सामने आए।

देहरादून जिले में रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े खुलासे अब अलग-अलग घटनाओं से आगे बढ़कर बड़े संगठित खेल की ओर इशारा कर रहे हैं। पहले देहरादून रजिस्ट्रार कार्यालय में अनियमितताएं सामने आईं, फिर ऋषिकेश और अब विकासनगर में भी गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। इन तीनों स्थानों पर पाए गए मामलों ने साफ कर दिया है कि जमीन लेन-देन में नियमों को लगातार दरकिनार किया जा रहा था।

जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर संदिग्ध रजिस्ट्रियों की दोबारा जांच शुरू हो गई है। प्रशासन राजस्व नुकसान की वसूली और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। शुरुआती जांच में अभिलेखों में हेराफेरी, संपत्तियों का जानबूझकर कम मूल्यांकन कर स्टांप शुल्क में चोरी और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के कई मामले सामने आए।

देहरादून रजिस्ट्रार कार्यालय में मिली गड़बड़ियों ने पूरे मामले की शुरुआत की। यहां कई संपत्तियों का बाजार मूल्य छिपाकर न्यूनतम दरों पर रजिस्ट्री कराई गई। इससे न केवल स्टांप ड्यूटी का भारी नुकसान हुआ बल्कि खरीदारों और विक्रेताओं के बीच भी विवादास्पद सौदे बढ़े। जांच टीम ने पाया कि कुछ रजिस्ट्रियों में दस्तावेजों की तारीखों और विवरणों में स्पष्ट असंगतियां हैं।

ऋषिकेश पहुंचते ही जांच का दायरा और चौड़ा हो गया। यहां प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि और नियमों के दायरे से बाहर की जमीनों की रजिस्ट्री के प्रकरण सामने आए। कृषि भूमि को व्यावसायिक उपयोग में बदलने या वन क्षेत्र से सटे प्लॉटों को बिना मंजूरी के रजिस्टर करने जैसे मामले मिले। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सत्यापन की प्रक्रिया या तो पूरी तरह ढीली पड़ गई थी या कुछ लोगों ने इसे जानबूझकर कमजोर रखा था।

विकासनगर में जिलाधिकारी सविन बंसल ने खुद छापेमारी कर मामले को नया मोड़ दिया। कार्यालय के अंदर वर्षों पुराने मूल विलेख पत्र संदिग्ध तरीके से दबाकर रखे मिले। कुछ दस्तावेज ऐसे थे जिनकी कोई आधिकारिक प्रविष्टि रिकॉर्ड में नहीं थी। प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री के अलावा धारा 47-ए के अंतर्गत स्टांप शुल्क चोरी के दर्जनों मामले चिह्नित किए गए। इनमें संपत्ति का वास्तविक मूल्य छिपाकर बहुत कम शुल्क जमा करने की बात सामने आई।

तीनों स्थानों पर पाई गई समान गड़बड़ियां एक बड़े पैटर्न की तस्वीर पेश करती हैं। जमीन की वास्तविक कीमत कम दिखाकर राजस्व चोरी, नियमों का उल्लंघन कर रजिस्ट्री और बाद में रिकॉर्ड को इस तरह संभालना कि जांच में भ्रम फैल जाए। यही वजह है कि प्रशासन ने मौजूदा अधिकारियों के साथ-साथ पूर्व में तैनात अधिकारियों के कार्यकाल की भी जांच के आदेश दिए हैं।

रजिस्ट्री तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है। कर्मचारी और दलाल अब सतर्क नजर आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कई पुरानी रजिस्ट्रियों की जांच में और गंभीर खुलासे हो सकते हैं। दलालों, वकीलों और कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों के बीच मिलीभगत की आशंका भी मजबूत होती जा रही है। इन लोगों ने मिलकर सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया और लंबे समय तक कागजी खेल चलाया।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने पूरे मामले की समग्र रिपोर्ट शासन को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट में अनियमितताओं की प्रकृति, राजस्व हानि का अनुमानित आंकड़ा और दोषियों की भूमिका का उल्लेख रहेगा। साथ ही सिस्टम में सुधार के सुझाव भी दिए जाएंगे।

जांच टीम अब डिजिटल रिकॉर्ड और भौतिक दस्तावेजों का मिलान कर रही है। कई पुरानी रजिस्ट्रियों को फिर से खंगाला जा रहा है। जिन संपत्तियों में हेराफेरी पाई गई है, उनके मालिकों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजस्व विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड विजिट कर भूमि की मौजूदा स्थिति की पुष्टि कर रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण ने रजिस्ट्री व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिक अब अपनी छोटी-बड़ी संपत्ति संबंधी लेन-देन को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी संदिग्ध मामलों की परतें खोली जाएं और दोषियों को सजा मिले।

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