बेंगलुरु: वर्षों तक पेट (Gut) और मस्तिष्क (Brain) के बीच के संबंध को केवल घरेलू नुस्खों या ‘वेलनेस लोककथाओं’ का हिस्सा माना जाता था। लेकिन आज, यह मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे उन्नत अनुसंधान का केंद्र बन चुका है। इसी कड़ी में, बेंगलुरु स्थित एक डीप-साइंस कंपनी ‘Iom Bioworks’ इस शोध को एक व्यावहारिक उत्पाद में बदलने की तैयारी कर रही है।
भारत की पहली विज्ञान-आधारित माइक्रोबायोम हेल्थकेयर कंपनी होने का दावा करने वाली यह स्टार्टअप, कॉफी के बेकार समझे जाने वाले छिलके (Coffee Husk) से ‘पेक्टिक ओलिगोसेकेराइड्स’ (Pectic Oligosaccharides – POS) बनाने की तकनीक विकसित कर रही है। यह एक ऐसा प्रीबायोटिक फाइबर है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाओं की रक्षा करने (न्यूरोप्रोटेक्टिव क्षमता) के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं।
क्या है गट-ब्रेन एक्सिस और इसकी अहमियत?
‘गट-ब्रेन एक्सिस’ हमारे पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच होने वाले निरंतर दो-तरफा संवाद को कहा जाता है। हालिया शोध बताते हैं कि हमारा मूड, नींद और तनाव का स्तर काफी हद तक हमारे पेट में मौजूद बैक्टीरिया पर निर्भर करता है। सही प्रीबायोटिक फाइबर के जरिए इन बैक्टीरिया को पोषण देकर इस संवाद को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया जा सकता है।
भारत का बायोटेक क्षेत्र 2030 तक 300 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। ऐसे में गट-आधारित वेलनेस अब केवल एक खास वर्ग तक सीमित न रहकर मुख्यधारा का हिस्सा बन गई है।
कॉफी के छिलके से दिमाग की सुरक्षा तक का सफर
Iom Bioworks का यह प्रोजेक्ट केवल एक विचार नहीं, बल्कि गहरे वैज्ञानिक शोध पर आधारित है। कंपनी की बायोप्रोडक्ट्स रिसर्च हेड, डॉ. दिव्याश्री जी., एक प्रतिष्ठित शोध पत्र की मुख्य लेखिका हैं, जिसमें गैर-पाचन योग्य ओलिगोसेकेराइड्स (जैसे POS) की न्यूरोप्रोटेक्टिव क्षमता के प्रायोगिक साक्ष्य दिए गए हैं।
प्रक्रिया और लाभ:
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वेस्ट से वेल्थ: भारत एक प्रमुख कॉफी उत्पादक देश है, जहाँ भारी मात्रा में कॉफी का छिलका कचरे के रूप में निकलता है।
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POS का निर्माण: इस छिलके में प्रचुर मात्रा में ‘पेक्टिन’ होता है, जिसे तोड़कर POS बनाया जाता है।
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कार्यक्षमता: POS पेट के एसिड से सुरक्षित रहकर बड़ी आंत तक पहुँचते हैं, जहाँ अच्छे बैक्टीरिया इनका किण्वन (Fermentation) करते हैं। इससे ऐसे यौगिक बनते हैं जो मस्तिष्क में ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ को कम करने और तंत्रिका कोशिकाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं।
दिग्गज नेतृत्व और राष्ट्रीय पहचान
2022 में स्थापित इस स्टार्टअप की नींव बेहद मजबूत है। इसके संस्थापकों में सीईओ बिपिन प्रदीप कुमार और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. समिक घोष के साथ डॉ. हिरोआकी किटानो भी शामिल हैं। डॉ. किटानो ‘सिस्टम्स बायोलॉजी’ के क्षेत्र के दिग्गज हैं और वर्तमान में सोनी ग्रुप (Sony Group) के सीटीओ हैं।
कंपनी की उपलब्धियां इसकी गंभीरता को दर्शाती हैं:
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निवेश: जून 2025 में, कंपनी ने ‘इन्फ्लेक्शन पॉइंट वेंचर्स’ के नेतृत्व में 4 करोड़ रुपये का सीड फंड जुटाया।
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मान्यता: कंपनी को नेशनल बायो एंटरप्रेन्योरशिप कॉम्पिटिशन (NBEC) 2025 के विजेताओं में चुना गया, जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित डीप-साइंस मंचों में से एक है।
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पेटेंट और प्रमाणन: कंपनी के पास दो ग्रांटेड पेटेंट हैं और यह ISO 9001 और ISO 27001 प्रमाणित प्रक्रियाओं का पालन करती है।
विज्ञान से उत्पाद तक
Iom Bioworks पहले से ही डीएनए सीक्वेंसिंग आधारित माइक्रोबायोम टेस्ट और नींद व तनाव के लिए लक्षित प्रीबायोटिक्स बेच रही है। इन्होंने भारत का पहला विस्तृत PCOS गट माइक्रोबायोम टेस्ट भी बाजार में उतारा है।
हालांकि, कॉफी के छिलके से जुड़े POS के मस्तिष्क पर प्रभाव के साक्ष्य अभी शुरुआती प्रयोगशाला अध्ययनों तक सीमित हैं, लेकिन कंपनी इसे बड़े पैमाने पर मानव परीक्षणों (Human Trials) तक ले जाने की दिशा में काम कर रही है। यदि यह तकनीक सफल होती है, तो इसके तीन बड़े फायदे होंगे:
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सस्ता और स्वदेशी प्रीबायोटिक।
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कृषि कचरे का सही प्रबंधन।
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वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित एक नया हेल्थ सप्लीमेंट।
बेंगलुरु की यह स्टार्टअप साबित कर रही है कि भारत न केवल आईटी क्षेत्र में, बल्कि जटिल जीव विज्ञान और पर्यावरण अनुकूल समाधानों में भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

