NTI: सिलिकॉन वैली स्थित स्टार्टअप Human Archive ने फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रशिक्षण के लिए भारत में तेज़ी से विस्तार करते हुए घरेलू‑सेवा कर्मियों को कैमरा‑लगे हेडसेट और बहु‑सेंसर उपकरण प्रदान करने वाली एक पहल शुरू कर दी है। कंपनी का कहना है कि इससे रोबोटों को इंसानों की तरह देखकर और महसूस करके जटिल घरेलू कार्य सीखाने में मदद मिलेगी, जबकि आलोचकों ने श्रमिक‑अधिकार, निजता और मुआवज़े को लेकर चिंता जताई है।
Human Archive ने हाल ही में Wing Venture Capital, NVP Capital, Y Combinator और OpenAI, Nvidia, Google, Meta के कुछ एंजल‑निवेशकों सहित कुल 8.2 मिलियन डॉलर का फंडिंग राउंड बंद किया है। कंपनी का लक्ष्य इस पूँजी से डिवाइस‑पोर्टफोलियो बढ़ाना, डेटा‑प्रोसेसिंग क्षमता मजबूत करना और मॉडल‑फाइन‑ट्यूनिंग सुविधाएँ विकसित करना है। कंपनी ने कहा है कि उसके पास भारत के विभिन्न स्थानों पर 1,000 से अधिक सक्रिय हेडसेट तैनात हैं और वह घरेलू सेवा, होटल व रेस्टोरेंट सेक्टरों के साथ साझेदारी कर रही है।
फिजिकल AI का उद्देश्य ऐसे रोबोट बनाना है जो कपड़े मोड़ना, सैंडविच बनाना या रसोई साफ़ करना जैसे जटिल, वास्तविक‑दुनिया कार्य कर सकें। कंपनियों के अनुसार लैब‑सिमुलेशन सीमित स्थिति तक ही प्रभावी रहते हैं, इसलिए “इंसान कैसे करते हैं” यह दिखाने वाला पहले‑व्यक्ति (egocentric) वीडियो और बहु‑सेंसर (RGB‑D, मोशन‑कैप्चर, टैक्टाइल ग्लव्स, wrist‑कैम आदि) डेटा जरूरी है। Human Archive का कहना है कि बहु‑सेंसर डेटा से प्रशिक्षित मॉडल ज्यादा सटीक और व्यवहारिक निर्णय ले पाएंगे।
Human Archive ने भारत को इसलिए चुना क्योंकि यहाँ की गिग‑इकोनॉमी बेहद विशाल और विविध है—खाद्य‑डिलीवरी, घरेलू‑सेवाएँ और छोटे रेस्तरां व होटल में लाखों श्रमिक प्रतिदिन विभिन्न गतिविधियाँ करते हैं। कंपनी के अनुसार यह विविधता व पैमाना उच्च‑गुणवत्ता, वास्तविक‑दुनिया डेटा उपलब्ध कराने के लिए अनुकूल है।
कंपनी के कदमों पर आलोचना भी तेज़ हुई है। कुछ बड़े घरेलू‑सेवा प्लेटफार्मों ने साझेदारी के प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं। Urban Company के CEO अभिराज सिंह भाल ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी कंपनी इस तरह के डेटा संग्रह में शामिल नहीं होगी। इसके अलावा, Pronto के एक संस्थापक द्वारा को‑फाउंडर को अपमानजनक शब्द कहे जाने की भी खबरें आईं। आलोचक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या गिग‑वर्कर्स को इन प्रयोगों के लिए डेटा‑स्रोत बनाना नैतिक है और क्या उनके अधिकारों व निजता की उचित सुरक्षा हो रही है।
Human Archive श्रमिकों को रिकॉर्डिंग के लिए प्रति घंटे 1 अमेरिकी डॉलर बेस रेट के रूप में देती है। यह कुछ अन्य रिपोर्टेड दरों से कम है, जिनमें प्रति घंटे लगभग $2.63–$4.20 तक की दरें देखी गई हैं। कंपनी का तर्क है कि उसका बड़े ऑन‑ग्राउंड नेटवर्क और तुरंत कमाने का अवसर श्रमिकों के लिए फायदेमंद है। साथ ही कंपनी ग्राहकों को सेवाओं पर छूट दे कर डेटा‑संग्रह के लिए सहमति हासिल करती है — एक व्यावसायिक रणनीति जो लागत‑प्रोत्साहन के ज़रिये डेटा‑पाइपलाइन बनाती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में पारदर्शी सहमति प्रक्रियाएँ, उचित मुआवजा, मजबूत डेटा‑गवर्नेंस और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा अनिवार्य है। आलोचना का मुख्य विषय यह रहा कि कम भुगतान, सहमति की वास्तविकता (क्या श्रमिकों के पास विकल्प था?) और संभावित शोषण गंभीर चिंताएँ हैं। बड़ी भारतीय कंपनियों की अनिच्छा का कारण ब्रांड‑रीप्यूटेशन जोखिम और कानूनी जटिलताएँ भी बताये जा रहे हैं।
Wing VC के पार्टनर Zach DeWitt ने कहा है कि बड़ी‑बड़ी लैब्स और यूनिवर्सिटीज़ इस तरह के डेटासेट का उपयोग करने के लिए उत्साहित हैं। Human Archive स्वयं मॉडल‑फाइन‑ट्यूनिंग और रोबोट‑टेस्टिंग की तकनीकें विकसित कर रहा है ताकि डेटा की उपयोगिता दिखायी जा सके। अगर कंपनी नैतिक, कानूनी और साझेदारी‑सम्बन्धी चुनौतियों को पार कर लेती है तो उसका मॉडल रोबोटिक्स, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवा और घरेलू सहायक रोबोटों के विकास को तेज़ कर सकता है।
विशेषज्ञ टिप्पणियाँ
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नीतिशास्त्रियों का कहना है कि सहमति प्रक्रियाओं को सहज, पारदर्शी और लिखित होना चाहिए; मौखिक या दबाव में ली गई सहमति पर्याप्त नहीं मानी जानी चाहिए।
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डेटा‑गवर्नेंस विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि संवेदनशील घरेलू वीडियो के उपयोग व भंडारण पर कड़े मानक, एन्क्रिप्शन और सीमित पहुँच आवश्यक है।
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श्रमिक अधिकार समूह मांग कर रहे हैं कि भुगतान बाज़ार‑अनुकूल दरों के अनुरूप हो और रिकॉर्डिंग से जुड़ी शिकायत निवारण व्यवस्था स्पष्ट हो।
Human Archive की पहल AI के उस क्षेत्र से जुड़ी है जहाँ वास्तविक‑दुनिया का डेटा निर्णायक भूमिका निभाता है। भारत जैसे बड़े गिग‑वर्क बाज़ार में यह प्रयोग संभावनाओं के साथ‑साथ नैतिक, कानूनी और साझेदारी संबंधी चुनौतियाँ भी लाया है। अंतिम सफलतापूर्वक क्रियान्वयन इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी श्रमिकों के अधिकारों, पारदर्शी सहमति, उचित मुआवजा और कड़े डेटा‑गवर्नेंस मानकों को अपनाती है या नहीं, और स्थानीय साझेदारों व नियामक निकायों का भरोसा जीत पाती है।

