Wednesday, May 27, 2026
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भारत के गांवों में सपनों को wings दे रहा FUEL

डॉ. केतन देशपांडे ने FUEL की नींव रख दी। यह कोई साधारण NGO नहीं था। यह लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने का मिशन था। उनके जीवन पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का गहरा प्रभाव रहा। कलाम जी की यह बात उनके मन में बस गई कि “अपने लिए सफल होना आसान है, लेकिन दूसरों को आगे बढ़ाना असली सफलता है।”

मुंबई | विशेष रिपोर्ट : भारत के हजारों गांवों और छोटे कस्बों में हर रोज लाखों सपने जन्म लेते हैं। ये सपने डॉक्टर बनने के, इंजीनियर बनने के, उद्यमी बनने के होते हैं। लेकिन ज्यादातर सपने अधूरे रह जाते हैं। सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसरों की कमी इन सपनों को तोड़ देती है। होशियार बच्चे हुनर के बावजूद पीछे छूट जाते हैं।

महाराष्ट्र के लातूर जिले में जन्मे डॉ. केतन देशपांडे ने इस कड़वी हकीकत को बहुत करीब से देखा। उन्होंने तय किया कि इस असमानता को खत्म करना है। यही सोच उन्हें 19 साल की उम्र में एक बड़े मिशन की ओर ले गई — FUEL (Friends Union for Energising Lives) की स्थापना। आज यह संगठन लाखों ग्रामीण युवाओं की जिंदगी बदल रहा है।

लातूर से निकली एक बड़ी सोच

डॉ. केतन देशपांडे का बचपन लातूर के एक सामान्य परिवार में बीता। आसपास के बच्चे प्रतिभावान थे, लेकिन उनके पास न सही जानकारी थी, न मार्गदर्शन और न ही सही प्लेटफॉर्म। केतन देशपांडे ने खुद को इस स्थिति से ऊपर उठाया। उन्होंने समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से MBA और CSR (Corporate Social Responsibility) में PhD पूरा किया। Cambridge University में Visiting Fellow बनने का गौरव भी प्राप्त किया। लेकिन उनकी सारी उपलब्धियों के बीच एक सवाल हमेशा गूंजता रहा — “गांव के बच्चे पीछे क्यों रह जाते हैं?”

डॉ. देशपांडे कहते हैं,

“मैंने बचपन से देखा कि टैलेंट किसी खास जगह तक सीमित नहीं होता। गांव के बच्चे शहरों के बच्चों जितने ही सक्षम होते हैं। फर्क सिर्फ मौकों का होता है। मैंने फैसला किया कि इस फर्क को मिटाना है।”

19 साल की उम्र में शुरू किया मिशन

जब ज्यादातर युवा कॉलेज और करियर की चिंता में होते हैं, उसी उम्र में डॉ. केतन देशपांडे ने FUEL की नींव रख दी। यह कोई साधारण NGO नहीं था। यह लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने का मिशन था। उनके जीवन पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का गहरा प्रभाव रहा। कलाम जी की यह बात उनके मन में बस गई कि “अपने लिए सफल होना आसान है, लेकिन दूसरों को आगे बढ़ाना असली सफलता है।”

डॉ. देशपांडे याद करते हैं,

“कलाम साहब की बात ने मुझे झकझोर दिया। उसी दिन तय हो गया कि मुझे दूसरों के लिए काम करना है।”

शुरुआती दिन बेहद चुनौतीपूर्ण थे। संसाधन नहीं थे, फंडिंग नहीं थी और लोगों का विश्वास भी नहीं था। एक युवा द्वारा शुरू किए गए संगठन को गंभीरता से लेना मुश्किल था। कई बार निराशा हुई, लेकिन हार नहीं मानी गई।

संघर्ष से सफलता तक

FUEL का सफर आसान नहीं रहा। गांवों में काम करने की सबसे बड़ी चुनौती सोच बदलने की थी। कई परिवार शिक्षा को प्राथमिकता नहीं देते थे। इंटरनेट, जागरूकता और संसाधनों की कमी अलग समस्या थी।

डॉ. देशपांडे बताते हैं,

“सबसे बड़ी लड़ाई संसाधनों की नहीं, बल्कि सोच की थी। हमें छात्रों में आत्मविश्वास जगाना था। जब तक वे खुद पर विश्वास नहीं करेंगे, कोई बदलाव संभव नहीं।”

धीरे-धीरे FUEL ने मजबूत मॉडल विकसित किया। आज यह संगठन 10 लाख से ज्यादा युवाओं तक पहुंच चुका है। 3 लाख से अधिक छात्रों को स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी है। हजारों छात्रों को स्कॉलरशिप प्रदान की गई है। कई बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी स्थापित हुई है।

एंड-टू-एंड समाधान

FUEL की सबसे बड़ी ताकत इसका एंड-टू-एंड मॉडल है। यह सिर्फ शिक्षा या स्किलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्र को रोजगार तक पहुंचाता है। AI, Data Analytics, Banking, Financial Services & Insurance (BFSI) और IT जैसे आधुनिक क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी जाती है। इससे छात्र सीधे जॉब मार्केट के लिए तैयार होते हैं। डॉ. केतन देशपांडे कहते हैं,

“हम शिक्षा को नौकरी से जोड़ते हैं। अगर पढ़ाई के बाद रोजगार नहीं मिलता तो सिस्टम अधूरा है। हमारा लक्ष्य हर छात्र को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वह अपने परिवार को आगे ले जा सके।”

‘10 People 1 Degree’ जैसी अनोखी पहल

FUEL की एक सराहनीय पहल है “10 People 1 Degree”। इसमें 10 लोग मिलकर एक गरीब छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। यह न सिर्फ आर्थिक मदद करता है बल्कि समाज में सामूहिक जिम्मेदारी का भाव भी जगाता है।

महिलाओं पर विशेष फोकस

FUEL महिलाओं के सशक्तिकरण पर खास ध्यान देता है। लड़कियों को शिक्षा, डिजिटल स्किल्स और उद्यमिता की ट्रेनिंग दी जाती है। डॉ. देशपांडे मानते हैं कि

“जब एक लड़की आगे बढ़ती है तो पूरा परिवार और समाज बदल जाता है। इसलिए महिला सशक्तिकरण हमारे मिशन का केंद्र है।”

NSE Social Stock Exchange पर ऐतिहासिक लिस्टिंग

FUEL ने हाल ही में NSE Social Stock Exchange पर लिस्टिंग हासिल की है। यह सामाजिक क्षेत्र के लिए एक बड़ा कदम है। अब सामाजिक कार्यों को निवेश के रूप में देखा जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ज्यादा फंडिंग के रास्ते खुलेंगे।

डॉ. देशपांडे कहते हैं,

“Social Stock Exchange एक नया अध्याय है। अब लोग सिर्फ दान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ निवेश कर सकते हैं। इसका असर साफ दिखाई देगा।”

भविष्य की योजना

आने वाले समय में FUEL और भी बड़ा लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। FUEL SkillTech University की स्थापना की योजना चल रही है। इसमें उद्योग से जुड़े अलग-अलग स्कूल होंगे जहां पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर दिया जाएगा। डॉ. देशपांडे का सपना है कि छात्र सिर्फ डिग्री लेकर न निकलें, बल्कि पूरी तरह तैयार होकर निकलें — रोजगार और उद्यमिता दोनों के लिए।

डॉ. केतन देशपांडे का मानना है,

“सफलता का असली मतलब यह नहीं है कि आप कितनी ऊंचाई तक पहुंचे। असली सफलता यह है कि आप कितने लोगों को साथ लेकर आगे बढ़े। अगर आपके काम से किसी की जिंदगी बेहतर होती है, तो वही सबसे बड़ी उपलब्धि है।”

FUEL की कहानी सिर्फ एक NGO की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जो गांवों से शहरों की ओर नहीं, बल्कि गांवों को भी मुख्यधारा में लाने की दिशा में बढ़ रहा है। 10 लाख युवाओं तक पहुंच, 3 लाख स्किल्ड छात्र और हजारों बदली जिंदगियां — FUEL साबित कर रहा है कि सही सोच, समर्पण और दूरदर्शिता से असंभव भी संभव हो जाता है। भारत जब तक अपने गांवों के सपनों को पंख नहीं देगा, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। डॉ. केतन देशपांडे और FUEL जैसे प्रयास उसी अधूरे सपने को पूरा करने की दिशा में एक मजबूत कदम हैं।

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