देहरादून: कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर आज हिमालयन लीफ (Himalayan LEAF) सामाजिक संस्था द्वारा देहरादून के हरभजवाला क्षेत्र में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बता दें कि हर वर्ष 26 जुलाई को देशभर में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है, जो वर्ष 1999 में भारतीय सेना द्वारा “ऑपरेशन विजय” के अंतर्गत कारगिल की चोटियों पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को पराजित कर पुनः कब्जा किए जाने की स्मृति में मनाया जाता है। लगभग दो महीने तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसी बलिदान को स्मरण करते हुए हिमालयन लीफ संस्था ने आज का यह कार्यक्रम आयोजित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना तथा आमजन के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर की गई, जिसके पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए। इस अवसर पर संस्था से जुड़े सदस्यों के साथ-साथ बड़ी संख्या में बच्चे और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे उत्साह के साथ पौधारोपण कार्य में भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने न केवल पौधे लगाए, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण करने का संकल्प भी लिया, ताकि आने वाले समय में ये पौधे वृक्ष का रूप लेकर क्षेत्र की हरियाली में योगदान दे सकें।
कार्यक्रम के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्था के संस्थापक अध्यक्ष हरीश सनवाल ने कहा कि “एक पौधा वीरों के नाम” थीम के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम शहीदों के बलिदान को नमन करने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण न केवल पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में सहायक सिद्ध होता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित एवं सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे भी अपने आस-पास पौधारोपण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और प्रकृति के संरक्षण में अपना योगदान दें।
उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार हमारे वीर सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं, उसी प्रकार हमें भी अपनी प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आना होगा। यह कार्यक्रम इसी भावना को समर्पित रहा।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखें तो वृक्षारोपण का महत्व वर्तमान समय में और भी अधिक बढ़ जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष औसतन 20 से 25 किलोग्राम तक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करने में सहायक होता है, साथ ही यह ऑक्सीजन उत्पादन, भूमि कटाव की रोकथाम, जल संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहाँ भूस्खलन और जल स्रोतों के सूखने की समस्या लगातार बढ़ रही है, वहाँ इस प्रकार के सामुदायिक वृक्षारोपण कार्यक्रम पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में विशेष रूप से सहायक साबित होते हैं। भारत सरकार द्वारा भी समय-समय पर “हरित भारत” और वृहद स्तर पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने वाली योजनाएं चलाई जाती रही हैं, जिसका उद्देश्य देश के वन क्षेत्र को बढ़ाकर पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करना है।
इस अवसर पर उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे लगाए गए पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और समय-समय पर उनकी सिंचाई एवं देखभाल करते रहेंगे, जिससे यह पहल केवल एक दिवसीय आयोजन न रहकर एक दीर्घकालिक पर्यावरणीय अभियान का रूप ले सके। संस्था के सदस्यों ने बताया कि आगे भी इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिक से अधिक लोगों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ा जा सके और शहीदों की स्मृति को भी जीवंत रखा जा सके।
कार्यक्रम में हिमालयन लीफ संस्था के अध्यक्ष हरीश सनवाल सहित राजेंद्र कुँवर, सुनीता भंडारी, चंद्रमोहन नगवाल, सतीश मनौड़ी, शिवम सनवाल, दिनेश पांडे, राजू रावत एवं जय प्रकाश सहित अनेक स्थानीय नागरिक व बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दिया और आगे भी इससे जुड़े रहने की इच्छा व्यक्त की। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित जनों ने एक साथ “जय हिंद” के नारे के साथ शहीदों को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसके बाद कार्यक्रम विधिवत रूप से संपन्न हुआ।



