नई दिल्ली/देहरादून: ग्राम्य विकास विभाग, उत्तराखण्ड के अंतर्गत कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (आईएफएडी) द्वारा सहायतित ग्रामीण उद्यम वेगवृद्धि परियोजना–ग्रामोत्थान (रीप) को प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड–2026 से नवाज़ा गया है। परियोजना को यह सम्मान ग्रामीण विकास डोमेन के अंतर्गत “उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास” श्रेणी में प्रदान किया गया। यह सम्मान शनिवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ओक हॉल में आयोजित 109वें स्कॉच समिट में प्रदान किया गया।
यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व एवं ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी के मार्गदर्शन में प्राप्त हुई है। सचिव ग्राम्य विकास एवं मुख्य परियोजना निदेशक, रीप धीराज सिंह गर्ब्याल के निर्देशन में यह पुरस्कार उत्तराखण्ड सरकार की ओर से अपर सचिव ग्राम्य विकास झरना कमठान ने प्राप्त किया। समारोह में उपस्थित अधिकारियों और विशेषज्ञों ने इस सम्मान को राज्य की ग्रामीण विकास नीतियों की सफलता का प्रमाण बताया। इस श्रेणी में 50 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए थे, जिनमें से रीप परियोजना का चयन बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया गया। सर्वप्रथम स्कॉच विश्लेषकों द्वारा नामांकन की गहन समीक्षा की गई। इसके उपरांत परियोजना को 30 जून 2026 को स्वतंत्र विषय विशेषज्ञों की जूरी के समक्ष प्रस्तुतीकरण हेतु चयनित किया गया।
विशेषज्ञों ने परियोजना की कार्यप्रणाली, महिलाओं के सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमों के विकास और बाजार संपर्कों की मजबूती को सराहा। इसके पश्चात स्कॉच के सार्वजनिक मतदान मंच पर परियोजना को 60,000 से अधिक मत प्राप्त हुए और उसने शीर्ष स्थान हासिल किया। 1 सितम्बर 2026 को परियोजना को स्कॉच ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया। अंतिम विशेषज्ञ मूल्यांकन में परियोजना का चयन गोल्ड अवार्ड के लिए हुआ। यह प्रक्रिया परियोजना की पारदर्शिता, प्रभावशीलता और जनसहभागिता को रेखांकित करती है।
रीप परियोजना प्रदेश के सभी 13 जनपदों के 95 विकासखंडों में महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों का सशक्त तंत्र विकसित कर रही है। परियोजना के अंतर्गत 440 क्लस्टर लेवल फेडरेशनों (सीएलएफ) के माध्यम से 8,000 से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को प्रोत्साहित किया गया है तथा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 4.77 लाख से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है। पर्वतीय क्षेत्रों की कृषि, हस्तशिल्प एवं पर्यटन संभावनाओं को सतत स्थानीय उद्यमों में परिवर्तित कर परियोजना ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा गांवों में ही आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य कर रही है। महिलाओं को न केवल उत्पादक के रूप में बल्कि उद्यमी और बाजार-संचालक के रूप में तैयार किया जा रहा है, जिससे परिवारों की आर्थिक स्थिति में स्थायी सुधार आ रहा है। रीप–ग्रामोत्थान उत्तराखण्ड सरकार की 378 मिलियन अमेरिकी डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जो आईएफएडी द्वारा वित्तपोषित है तथा उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास समिति (यूजीवीएस) के माध्यम से क्रियान्वित की जा रही है। मार्च 2029 तक संचालित यह परियोजना प्रदेश भर में महिलाओं एवं लघु कृषक परिवारों हेतु ग्रामीण उद्यमों, सामुदायिक संस्थाओं एवं बाज़ार संपर्कों को सुदृढ़ कर रही है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना, मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। इससे न केवल आय में वृद्धि हो रही है बल्कि युवाओं और महिलाओं का पलायन भी रुकने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्कॉच अवार्ड प्राप्त होने के बाद अधिकारियों ने कहा कि यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि राज्य की ग्रामीण विकास रणनीति की वैश्विक मान्यता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी के मार्गदर्शन में परियोजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल के निर्देशन में टीम ने महिलाओं के समूहों को संगठित कर उन्हें कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार पहुंच उपलब्ध कराई है।
अपर सचिव झरना कमठान ने पुरस्कार प्राप्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे उत्तराखण्ड की ग्रामीण महिलाओं और किसानों की मेहनत का परिणाम है। परियोजना के तहत पर्वतीय कृषि उत्पादों जैसे जैविक सब्जियां, फल, मसाले, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़े सेवा उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। क्लस्टर स्तर पर फेडरेशन बनाकर छोटे उद्यमों को सामूहिक शक्ति प्रदान की गई है, जिससे वे बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें। महिलाओं को डिजिटल साक्षरता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री के कौशल भी सिखाए जा रहे हैं।
परिणामस्वरूप कई महिला उद्यमी अब अपने उत्पादों को राज्य के बाहर भी बेच रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पुरस्कार उत्तराखण्ड को ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रीप मॉडल अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। परियोजना के शेष कार्यकाल में और अधिक उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार संपर्कों को और मजबूत करने तथा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नए आयाम देने का लक्ष्य रखा गया है।
स्कॉच समिट में उपस्थित राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने उत्तराखण्ड की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में चलने वाले ग्रामीण उद्यम न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन रहे हैं। गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा होने से परिवार एकजुट रह रहे हैं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। रीप–ग्रामोत्थान परियोजना का यह सम्मान पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह सिद्ध करता है कि सही नीति, मजबूत नेतृत्व और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। आगे भी राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगी ताकि उत्तराखण्ड के गांव आत्मनिर्भर बनें और हर परिवार को सम्मानजनक आजीविका का अवसर मिले।

