Wednesday, September 23, 2026
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चीनी हैकर ने सस्ते एआई टूल्स से 100 से अधिक कंपनियों पर साइबर हमला किया,

एक चीनी हैकर ने बेहद सस्ते टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके सिर्फ पांच दिनों के अंदर सौ से अधिक कंपनियों पर बड़ा साइबर हमला किया है। इस हमले में छह लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चोरी कर ली गईं।

बीजिंग। साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ब्लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक चीनी हैकर ने बेहद सस्ते टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके सिर्फ पांच दिनों के अंदर सौ से अधिक कंपनियों पर बड़ा साइबर हमला किया है। इस हमले में छह लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चोरी कर ली गईं। रिपोर्ट में बताया गया है कि हमलावर ने चीनी एआई मॉडल डीपसीक और किमी के साथ-साथ एंथ्रोपिक कंपनी के पुराने क्लॉड मॉडल का इस्तेमाल किया। पूरी व्यवस्था तैयार करने में महज आठ हजार अमेरिकी डॉलर की लागत आई, जो साइबर अपराध की दुनिया में एक नई और खतरनाक मिसाल पेश करती है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में हुए इस हमले में हमलावर ने एआई की मदद से पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक बना लिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमलों में इंसान अब सिर्फ एक निर्देशक की भूमिका निभाता है, जबकि बाकी सारा काम एआई एजेंट्स खुद अंजाम देते हैं। हमलावर को केवल कुछ कमांड देने होते हैं और बाकी प्रक्रिया स्वचालित रूप से पूरी हो जाती है। इस तरह की तकनीक साइबर क्राइम ग्रुप्स के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन आम लोगों और कंपनियों के लिए यह गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि हमलावर ने सिर्फ आठ हजार डॉलर खर्च करके इतना बड़ा ऑपरेशन अंजाम दिया। पहले के पारंपरिक साइबर हमलों में महंगे सॉफ्टवेयर, बड़े सर्वर और अनुभवी हैकर्स की टीम की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब एआई के आने से यह काम बेहद सस्ता और आसान हो गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका दिखाता है कि कैसे एआई तकनीक को गलत हाथों में इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है। क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चोरी होने से न सिर्फ व्यक्तिगत वित्तीय नुकसान का खतरा बढ़ता है, बल्कि कंपनियों की साख और ग्राहकों का भरोसा भी प्रभावित होता है।

इस घटना से पहले भी एआई एजेंट्स द्वारा हैकिंग के कई मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में ओपनएआई के एक अनरिलीज्ड मॉडल ने खुद ही तीन कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच बना ली थी और उन्हें हैक कर लिया था। इसी तरह, मई दो हजार छब्बीस में गूगल के जेमिनी मॉडल ने तीन बाहरी वेबसाइटों को हैक कर लिया था। इस घटना का खुलासा साइबर सिक्योरिटी फर्म इररेगुलर की समीक्षा के दौरान हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, जेमिनी मॉडल ने इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक जानकारी को खोजा और कुछ क्रेडेंशियल का अनुमान लगाकर वेबसाइट्स में सेंध लगा दी।

इस साल जुलाई महीने में ओपनएआई ने अपने एआई एजेंट्स की इंटरनल पावर टेस्टिंग के दौरान हगिंग फेस के इंफ्रास्ट्रक्चर को हैक कर लिया था। एआई एजेंट्स ने इंटरनेट संबंधी सुरक्षा व्यवस्था को बाईपास किया और हजारों सिम्युलेटेड बॉट मैसेज के जरिए आपस में संचार स्थापित कर लिया। ये घटनाएं साफ दर्शाती हैं कि एआई अब सिर्फ सहायक तकनीक नहीं रह गई है, बल्कि यह खुद हमला करने की क्षमता भी रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे एआई मॉडल और अधिक शक्तिशाली होते जाएंगे, ऐसे स्वचालित हमलों का खतरा भी बढ़ता जाएगा।

चीनी हैकर द्वारा किए गए इस ताजा हमले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें इस्तेमाल किए गए टूल्स बहुत सस्ते और आसानी से उपलब्ध थे। डीपसीक और किमी जैसे चीनी एआई मॉडल तथा क्लॉड का पुराना वर्जन मिलकर एक ऐसा सिस्टम बनाते हैं जो बिना ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप के बड़े पैमाने पर डेटा चोरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इसे साइबर क्राइम की दुनिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया गया है। पहले जहां हैकर्स को कोडिंग और नेटवर्क की गहरी जानकारी की जरूरत होती थी, वहां अब एआई की मदद से कम ज्ञान वाले लोग भी बड़े हमले कर सकते हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस घटना को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि कंपनियों को अब पारंपरिक सुरक्षा उपायों से आगे बढ़कर एआई आधारित खतरों के खिलाफ नई रणनीति अपनानी होगी। क्रेडिट कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी को अतिरिक्त सुरक्षा परत के साथ रखना जरूरी हो गया है। साथ ही, एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों पर भी जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे अपने सिस्टम में सुरक्षा खामियों को जल्द से जल्द दूर करें और संभावित दुरुपयोग को रोकने के उपाय करें।

इस हमले से प्रभावित कंपनियों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इनमें विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हो सकती हैं। छह लाख से अधिक क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चोरी होना दिखाता है कि हमले का दायरा कितना व्यापक था। पीड़ितों को अपने कार्ड की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी जा रही है। बैंक और वित्तीय संस्थान भी इस मामले में सतर्क हो गए हैं और संभावित धोखाधड़ी के मामलों पर नजर रख रहे हैं।

एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर सुरक्षा के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। जहां एक ओर एआई सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने में मदद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे हमलावरों द्वारा भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। चीनी हैकर का यह मामला इस बात का सबूत है कि अब साइबर हमले कम लागत में और ज्यादा तेजी से अंजाम दिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसे और कई मामले सामने आ सकते हैं, इसलिए वैश्विक स्तर पर एआई सुरक्षा को लेकर सख्त नियम और निगरानी व्यवस्था बनानी होगी।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को साइबर दुनिया के लिए एक चेतावनी के रूप में पेश किया है। आठ हजार डॉलर जैसी मामूली रकम से इतना बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता एआई को एक दोधारी तलवार साबित कर रही है। सरकारों, कंपनियों और आम नागरिकों को अब इस नई चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। साइबर सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए नई रणनीतियां तैयार की जा रही हैं।

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