Wednesday, September 23, 2026
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उत्तराखंड में एसटीएफ ने सिम बॉक्स आधारित अवैध टेलीकॉम गेटवे का भंडाफोड़ किया

उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) साइबर कुमाऊं यूनिट ने दूरसंचार विभाग की महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में सिम बॉक्स के जरिए संचालित हो रहे अवैध टेलीकॉम गेटवे को बेनकाब किया गया है।

बाजपुर (ऊधमसिंह नगर)। उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) साइबर कुमाऊं यूनिट ने दूरसंचार विभाग की महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में सिम बॉक्स के जरिए संचालित हो रहे अवैध टेलीकॉम गेटवे को बेनकाब किया गया है। पुलिस ने बाजपुर क्षेत्र के मुड़िया में ईदगाह के निकट एक मकान पर छापा मारकर कादिर पुत्र जाबिर अली उर्फ कादिर (24) को गिरफ्तार किया है। आरोपी मुरादाबाद जिले का रहने वाला है। इस दौरान मौके से दो सिम बॉक्स, सत्तरह एंटीना, एक सौ चौदह एयरटेल सिम कार्ड, एक एयरटेल इंटरनेट राउटर, मोबाइल फोन और कई अन्य टेलीकॉम उपकरण जब्त किए गए हैं।

जांच में सामने आया है कि इस अवैध गेटवे का इस्तेमाल विदेशी नंबरों और वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) कॉलों को भारतीय स्थानीय मोबाइल नंबरों के रूप में बदलने के लिए किया जा रहा था। इसकी वजह से कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मोबाइल स्क्रीन पर विदेशी नंबर की जगह भारतीय मोबाइल नंबर दिखाई देता था। इस तरह साइबर ठग अपनी असली पहचान और लोकेशन दोनों को छिपाने में सफल हो जाते थे। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, यह तरीका साइबर अपराधियों के बीच काफी खतरनाक और चालाकी भरा माना जाता है क्योंकि इससे पीड़ित व्यक्ति आसानी से धोखा खा जाता है और ठगी का पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है।

आरोपी कादिर ने पूछताछ के दौरान बताया कि यह गेटवे करीब सात महीने से लगातार संचालित हो रहा था। उसने अलग-अलग लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर सिम कार्ड जारी करवाए और उन्हें इस नेटवर्क में इस्तेमाल किया। प्रारंभिक जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी बांग्लादेश के साइबर अपराधियों के संपर्क में था और उनके माध्यम से आर्थिक लाभ कमा रहा था। एसटीएफ ने बताया कि इस पूरे सिस्टम का मुख्य उद्देश्य कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान छिपाना और विदेशी ठगों को भारतीय नंबरों के जरिए आसान पहुंच प्रदान करना था।

यह कार्रवाई दूरसंचार विभाग (डीओटी) से मिली विश्वसनीय जानकारी के आधार पर की गई। एसटीएफ की टीम ने मुड़िया क्षेत्र में मौजूद मकान पर अचानक दबिश दी। मौके पर मौजूद उपकरणों और सिम कार्डों की संख्या देखकर यह साफ हो गया कि यह कोई छोटी घटना नहीं बल्कि एक संगठित अवैध टेलीकॉम ऑपरेशन था। पुलिस ने जब्त किए गए सभी उपकरणों और सिम कार्डों को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है। आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया है।

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। आरोपी कादिर इससे पहले भी इसी तरह के अवैध टेलीकॉम गेटवे चलाने के मामले में गिरफ्तार हो चुका है। साल 2023 में मुरादाबाद के थाना कटघर में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज हुआ था। उसी साल उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बावजूद वह फिर से इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त पाया गया। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों को देखते हुए उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस अवैध गेटवे के संचालन से न केवल आम नागरिकों को साइबर ठगी का शिकार बनाया जा रहा था बल्कि टेलीकॉम कंपनियों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा था। विदेशी कॉलों को भारतीय नंबरों के रूप में प्रदर्शित करने से कंपनियों के नेटवर्क पर अनावश्यक भार पड़ता था और राजस्व का नुकसान भी होता था। एसटीएफ ने इस मामले में टेलीकॉम कंपनियों से भी समन्वय स्थापित किया है ताकि ऐसे और नेटवर्कों का पता लगाया जा सके।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, सिम बॉक्स गेटवे का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगों द्वारा काफी समय से किया जा रहा है। इसमें विदेशी कॉल को स्थानीय कॉल के रूप में मास्क कर दिया जाता है जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है। उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी अब ऐसे नेटवर्क सक्रिय हो रहे हैं जो चिंता का विषय है। एसटीएफ साइबर कुमाऊं यूनिट लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए है और दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी कर रही है।

पुलिस ने आरोपी के अन्य सहयोगियों और बांग्लादेश से जुड़े संपर्कों की भी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस गेटवे के माध्यम से कई साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल होने वाली कॉलों का रूट किया जा रहा था। एसटीएफ का कहना है कि ऐसे मामलों में सिर्फ एक व्यक्ति को गिरफ्तार करना पर्याप्त नहीं है बल्कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना जरूरी है। इसी दिशा में आगे की कार्रवाई तेज की जा रही है।

ऊधमसिंह नगर जिले में हुई इस कार्रवाई को साइबर सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एसटीएफ अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉलों को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। साथ ही उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों से भी अनुरोध किया है कि सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाए ताकि पहचान के दुरुपयोग को रोका जा सके।

यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराध अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर तकनीकी रूप से अधिक जटिल हो गए हैं। सिम बॉक्स जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करके ठग अपनी पहचान छिपा लेते हैं और पीड़ितों को आसानी से निशाना बना लेते हैं। एसटीएफ की इस कार्रवाई से न केवल एक अवैध गेटवे बंद हुआ है बल्कि भविष्य में होने वाली संभावित ठगियों को भी रोकने में मदद मिलेगी। पुलिस जांच जारी है और जल्द ही इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है।

आरोपी कादिर को कोर्ट में पेश किया जाएगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया चलाई जाएगी। एसटीएफ ने इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए दूरसंचार विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी सूचनाओं के आधार पर समय रहते कार्रवाई करने से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। उत्तराखंड पुलिस साइबर अपराधों के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखेगी और ऐसे किसी भी अवैध नेटवर्क को बर्दाश्त नहीं करेगी।

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