देहरादून: बदरीनाथ धाम को और अधिक दिव्य, भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए मास्टर प्लान में सभी आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित किए जाएंगे। स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की और संबंधित निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बदरीनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य न केवल आध्यात्मिक वातावरण को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। परियोजना पूर्ण होने पर यह धाम आस्था, आधुनिकता और प्रकृति के संतुलित संगम का प्रतीक बनेगा। उन्होंने स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे, इस पर विशेष जोर दिया।
बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान की कुल लागत लगभग 424 से 481 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप आगे बढ़ रही है और सीएम धामी के सीधे पर्यवेक्षण में है। योजना 85 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करती है और इसे तीन चरणों में क्रियान्वित किया जा रहा है। उद्देश्य अगले 50 वर्षों में बढ़ने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित करना है।
इससे पहले 2024 में सीएम धामी ने 424 करोड़ रुपये के मास्टर प्लान की घोषणा की थी। योजना केदारनाथ पुनर्निर्माण की तर्ज पर तैयार की गई है, जिसमें स्मार्ट स्पिरिचुअल हिल टाउन की अवधारणा शामिल है। पर्यटन विभाग के अनुसार, कार्य बहुआयामी और चरणबद्ध तरीके से हो रहे हैं।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बैठक में प्रस्तुतीकरण देते हुए विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण कार्यों के साथ-साथ स्पिरिचुअल हिल टाउन विकसित करने की कार्ययोजना तेजी से चल रही है।
प्रमुख विकास कार्य और आकर्षण
- देव दर्शनी पॉइंट: श्रद्धालुओं को बदरीनाथ धाम के प्रथम दर्शन यहां से भव्य और दिव्य रूप में प्राप्त होंगे। यह पॉइंट विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है।
- बदरीनारायण चौक: प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होगा, जहां बेहतर सुविधाएं और आकर्षक पब्लिक स्पेस बनाए जा रहे हैं।
- आइएसबीटी वाल: स्थानीय कला और धार्मिक विषयों पर आधारित भित्ति चित्रों (म्यूरल्स) से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत प्रदर्शित की जाएगी।
- वसुधा वाटिका: कलाकृति के माध्यम से प्रकृति, आध्यात्मिकता और उत्तराखंड की पारंपरिक कला का समावेश होगा। आकर्षक लैंडस्केप तैयार किए जाएंगे।
भगवान विष्णु से जुड़े प्रतीक: पांचजन्य शंख, कौमोदकी गदा, सुदर्शन चक्र, बैकुंठ द्वार जैसी भव्य कलाकृतियां बनाई जाएंगी। शेषनेत्र कलाकृति और पंच तत्व थीम पर आधारित संरचनाएं आध्यात्मिक ऊर्जा और भारतीय दर्शन को जीवंत करेंगी। रामायण-महाभारत कालीन प्रतीकों का भी समावेश होगा।
दिया आरती स्थल: विशेष आरती स्थल विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु दिव्य अनुभव प्राप्त कर सकें।
स्ट्रीटस्कैप विकास: आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधाएं, साइनेज और सुंदरीकरण कार्य होंगे। अलकनंदा नदी किनारे रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, पार्किंग, क्लोक रूम, वेटिंग हॉल जैसी सुविधाएं बनेंगी।
अन्य कार्यों में अस्पताल भवन, दो पुल, पुजारियों के लिए आवासीय सुविधाएं, बद्रीश झील और शेषनेत्र झील की सुंदरता बढ़ाना, लूप रोड और अराइवल प्लाजा शामिल हैं। कुछ कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि अन्य तेजी से चल रहे हैं।
बदरीनाथ धाम हिंदू धर्म के चार धामों में प्रमुख है। यह भगवान विष्णु के बाल रूप बदरीनारायण को समर्पित है। altitude लगभग 3,133 मीटर है और यह हिमालय की गोद में स्थित है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं, खासकर मई-नवंबर के यात्री सीजन में।
2020-21 से ही ‘स्मार्ट स्पिरिचुअल हिल टाउन’ की अवधारणा पर काम शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं इसकी समीक्षा की थी। केदारनाथ की सफल तर्ज पर बदरीनाथ में भी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं, लेकिन पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखा जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण: हिमालयी क्षेत्र भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित रहता है। मास्टर प्लान में अलकनंदा नदी किनारे इकोसिस्टम को मजबूत करने, फ्लड रेसिलिएंट डिजाइन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर जोर है। स्थानीय समुदायों को होमस्टे और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
आर्थिक प्रभाव: चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। बेहतर सुविधाओं से पर्यटक संख्या बढ़ेगी, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा। अनुमान है कि अगले वर्षों में यात्री संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सांस्कृतिक संरक्षण: भित्ति चित्र, कलाकृतियां और थीम्ड गैलरी उत्तराखंड की लोक कला, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक परंपराओं को संरक्षित एवं प्रदर्शित करेंगी। म्यूजियम और आर्ट गैलरी भी प्रस्तावित हैं।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बैठक में जोर दिया कि विकास कार्य बहुआयामी और चरणबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “बदरीनाथ को स्पिरिचुअल स्मार्ट हिल टाउन के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना पर तेजी से काम हो रहा है। मास्टर प्लान में क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक महत्व को प्राथमिकता दी गई है।”
पर्यटन सचिव ने विस्तार से बताया कि देव दर्शनी पॉइंट से पहला दर्शन दिव्य होगा। बदरीनारायण चौक सांस्कृतिक हब बनेगा। आईएसबीटी वॉल पर म्यूरल्स, वसुधा वाटिका में लैंडस्केप, विष्णु प्रतीकों वाली कलाकृतियां और दिया आरती स्थल श्रद्धालुओं के अनुभव को यादगार बनाएंगे।
पर्यावरण अनुकूल स्ट्रीटस्कैप, पैदल पथ और आधुनिक सुविधाओं पर बल दिया। गरब्याल के अनुसार, सभी कार्यों में स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को शामिल किया जा रहा है, ताकि सांस्कृतिक authenticity बनी रहे। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुनर्निर्माण के साथ पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, लेकिन पर्यावरण और आस्था दोनों का संतुलन बनाए रखा जाएगा।

