देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के चकराता रोड स्थित खादी ग्रामोद्योग भवन से स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी कर एक प्रेरणादायी संदेश दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएँ और त्योहारी सीजन में खादी तथा स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। यह कदम न केवल स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को सशक्त करेगा, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के स्वदेशी और स्वावलंबन के विचारों की जीवंत विरासत है। यह आत्मनिर्भर भारत की आत्मा और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान को दोहराते हुए कहा कि यह अभियान आज देशभर में एक जनआंदोलन बन चुका है। स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर हम न केवल अपने स्थानीय उद्योगों को मजबूत करते हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक ताकत को भी प्रदर्शित करते हैं।
स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी से स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा, “त्योहारों का मौसम नजदीक है। यह समय है कि हम अपने घरों को स्वदेशी उत्पादों से सजाएँ और अपने कारीगरों के हुनर को सम्मान दें। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का भी एक शानदार अवसर है।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत का सपना तेजी से साकार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन और सांस्कृतिक गौरव का आधार है। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड जल्द ही खादी और अन्य स्वदेशी उत्पादों का एक प्रमुख केंद्र बनेगा, जो न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को बल देगा, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की अनूठी पहचान को और मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के इस महायज्ञ में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा, “आइए, हम सब मिलकर स्वदेशी को गले लगाएँ और अपने देश के कारीगरों, उनकी मेहनत और उनके हुनर को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।”
इस अवसर पर खादी ग्रामोद्योग भवन में मौजूद कारीगरों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना की और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों को ऐतिहासिक बताया। यह पहल निश्चित रूप से उत्तराखंड के स्थानीय उद्योगों और कारीगरों के लिए एक नया सवेरा लाएगी।

