Saturday, May 30, 2026
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11 सालों से दो कमरों में सिमटी आदिबदरी तहसील

तहसील आदिबदरी वर्षों से बदहाली और उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। गैरसैंण तहसील के अंतर्गत आने वाले 70 राजस्व गांवों को समेटने वाली यह तहसील पिछले 11 वर्षों से आदिबदरी स्थित पटवारी चौकी के मात्र दो छोटे कमरों से संचालित हो रही है। न तो तहसील का अपना भवन है और न ही पर्याप्त कर्मचारी।

आदिबदरी (चमोली): तहसील आदिबदरी वर्षों से बदहाली और उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। गैरसैंण तहसील के अंतर्गत आने वाले 70 राजस्व गांवों को समेटने वाली यह तहसील पिछले 11 वर्षों से आदिबदरी स्थित पटवारी चौकी के मात्र दो छोटे कमरों से संचालित हो रही है। न तो तहसील का अपना भवन है और न ही पर्याप्त कर्मचारी। इस कारण स्थानीय जनता को राजस्व संबंधी कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान स्थिति बेहद दयनीय है। तहसील में पूर्णकालिक तहसीलदार या नायब तहसीलदार की तैनाती नहीं है। हाल ही में यहां तैनात नाजिर को भी गैरसैंण एसडीएम कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। अब पूरी तहसील केवल एक महिला कर्मचारी के भरोसे चल रही है। एसडीएम का प्रभार गैरसैंण, तहसीलदार का प्रभार कर्णप्रयाग और नायब तहसीलदार का कार्यभार थराली तहसील के अधिकारियों के पास है। ऐसे में दैनिक प्रशासनिक कार्यों का संचालन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात बनाने में महीनों का समय लग जाता है। कई बार तो लोगों को गैरसैंण, कर्णप्रयाग या थराली तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विजयेश नवानी ने शासन-प्रशासन पर गंभीर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा, “कर्मचारियों की कमी के कारण आम जनता को रोजमर्रा के सरकारी कामों के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह स्थिति लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।”

आदिबदरी क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण और पहाड़ी इलाका है। यहां के अधिकांश लोग कृषि, पशुपालन और छोटे व्यवसाय पर निर्भर हैं। राजस्व कार्यों में देरी के कारण भूमि विवाद, उत्तराधिकार मामलों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें आ रही हैं। कई लाभार्थी प्रधानमंत्री आवास योजना, वन अधिकार पत्र और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े दस्तावेज समय पर नहीं बन पाने के कारण परेशान हैं।

कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ने इस समस्या को स्वीकार करते हुए कहा कि आदिबदरी तहसील भवन के निर्माण के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्ताव मंजूर होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही तहसील में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया जा रहा है। विधायक ने कहा, “आदिबदरी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां तहसील भवन और पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं।”

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि तहसील भवन का शीघ्र निर्माण किया जाए और तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा पर्याप्त सहायक कर्मचारियों की तैनाती की जाए। साथ ही पटवारी चौकी को अस्थायी रूप से बेहतर सुविधाओं से युक्त किया जाए, ताकि जनता को तत्काल राहत मिल सके।

आदिबदरी तहसील का यह मामला उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधाओं की कमी का एक जीवंत उदाहरण है। गैरसैंण को राज्य की समरूप राजधानी बनाने की घोषणा के बावजूद आसपास की तहसीलों की बदहाली जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तहसील स्तर पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी तो स्थानीय विकास प्रभावित होगा और पलायन की समस्या बढ़ेगी।

विधायक अनिल नौटियाल और स्थानीय प्रशासन के आश्वासन से क्षेत्रवासियों में कुछ उम्मीद जगी है। यदि 10 करोड़ रुपये की भवन प्रस्तावना शीघ्र स्वीकृत हो जाती है और स्टाफ की नियुक्ति होती है, तो आदिबदरी तहसील अपनी बदहाली से उबर सकती है। इस मुद्दे पर शासन को तुरंत संज्ञान लेते हुए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

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