उत्तराखंड ट्रेकिंग पर्यटन के क्षेत्र में देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जहां वैज्ञानिक GPS/GIS तकनीक के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स की डिजिटल मैपिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) की GPS/GIS मैपिंग टीमों को रवाना किया। ये टीमें प्रदेश के 100 प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स का वैज्ञानिक GPS मैपिंग एवं तकनीकी सर्वेक्षण करेंगी।
इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत लगभग 5,000 से 10,000 किलोमीटर तक के ट्रैक रूट्स को वैज्ञानिक GPS/GIS तकनीक से मैप करने का लक्ष्य रखा गया है। इतने व्यापक स्तर पर ट्रेकिंग रूट्स की डिजिटल एवं वैज्ञानिक मैपिंग को अधिकारियों ने उत्तराखंड के ट्रेकिंग पर्यटन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है, जिसका पैमाना देश में अब तक हासिल किए गए प्रयासों से कहीं अलग और अभूतपूर्व है। रवाना की गई टीमों में GPS विशेषज्ञ, GIS विशेषज्ञ, ट्रेकिंग विशेषज्ञ, ट्रैक लीडर्स, कंटेंट राइटर्स तथा ऐप डेवलपर्स शामिल हैं। पहले चरण में टीमें 35 ट्रैक रूट्स को कवर करेंगी, जिनमें विशेष फोकस 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हाई-एल्टीट्यूड ट्रैक रूट्स पर रहेगा, ताकि नवंबर में बर्फबारी शुरू होने से पहले इनका सर्वेक्षण पूर्ण किया जा सके।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान हमेशा से साहसिक एवं ट्रेकिंग पर्यटन की रही है और आज देश में पहली बार प्रदेश अपने ट्रेकिंग रूट्स को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नया इतिहास रच रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के संकल्प के अनुरूप है और उत्तराखंड को एक तकनीक-सक्षम, सुरक्षित एवं टिकाऊ ट्रेकिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करेगी। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य के साहसिक पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नई दिशा बताते हुए कहा कि आने वाले समय में यह पहल देश-विदेश के ट्रेकर्स के बीच उत्तराखंड की छवि को और मजबूत करेगी।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि यह देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है, जिसे वन विभाग, उत्तराखंड के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत तैयार होने वाला डेटाबेस ट्रैक रूट्स, कैंपसाइट्स और टॉयलेट्स सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध कराएगा, जिससे ट्रेकिंग की फिजिबिलिटी, सुरक्षा और टिकाऊ प्रबंधन — तीनों सुनिश्चित हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत तैयार किया जाने वाला विस्तृत डिजिटल डेटाबेस प्रदेश के संपूर्ण ट्रेकिंग नेटवर्क को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे नीति-निर्माण और संसाधन प्रबंधन दोनों को बल मिलेगा।
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इससे विकसित होने वाला ऑनलाइन एवं ऑफलाइन GPS नेविगेशन ऐप है। इसकी खास बात यह है कि यह इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने वाले “नो-नेटवर्क जोन” में भी काम करेगा। यदि कोई ट्रेकर रास्ता भटक जाए या निर्धारित ट्रैक से हट जाए, तो ऐप स्वतः उसे सही मार्ग पर वापस रीरूट कर देगा। इससे दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में ट्रेकर्स की सुरक्षा काफी बेहतर होगी और आपात स्थितियों में रेस्क्यू अभियानों को भी सटीक दिशा मिल सकेगी।
चयनित ट्रेकिंग रूट्स की विस्तृत GPS/GIS मैपिंग के माध्यम से प्रदेश के व्यापक ट्रेकिंग नेटवर्क को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। मैपिंग के दौरान ट्रेकिंग रूट्स की वास्तविक लंबाई, ऊंचाई, प्रमुख पड़ाव, कैंपिंग साइट्स, जल स्रोत, टॉयलेट्स तथा अन्य उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे प्रदेश के दूरस्थ और अपेक्षाकृत कम ज्ञात ट्रेकिंग स्थलों को भी डिजिटल पर्यटन मानचित्र पर पहचान मिल सकेगी, जो अब तक अनदेखे रहे हैं।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अनुसार यह पहल प्रदेश में सुरक्षित, जिम्मेदार, सुगम एवं तकनीक आधारित ट्रेकिंग पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। परिषद का मानना है कि इससे राज्य के व्यापक ट्रेकिंग नेटवर्क का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, बेहतर प्रबंधन, पर्यटक सुरक्षा तथा दूरस्थ पर्यटन स्थलों का डिजिटल प्रोमोशन — इन सभी को नई गति मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में शेष रूट्स की मैपिंग भी चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी, जिससे उत्तराखंड ट्रेकिंग पर्यटन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा।

