अहमदाबाद:– स्पेगेटी की एक धागे से भी पतली रक्त वाहिकाओं को जोड़ना सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में से एक है। इसकी मांग इतनी अधिक है कि योग्य सर्जनों की कमी के कारण कई मरीजों को अनावश्यक कष्ट झेलना पड़ता है। अब अहमदाबाद के शिरा मेडटेक स्टार्टअप ने इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है। कंपनी ने कम लागत वाले हाई-प्रिसीजन इम्प्लांटेबल डिवाइस विकसित कर सूतुरलेस (बिना टांके) माइक्रोवास्कुलर एनास्टोमोसिस को संभव बनाया है। इससे पुनर्निर्माण सर्जरी ग्रामीण और संसाधन-सीमित क्षेत्रों तक पहुंच सकेगी तथा अनावश्यक अंग-कटाव को रोका जा सकेगा।
यह नवाचार न केवल सर्जरी को तेज और सुरक्षित बनाएगा बल्कि उन हजारों मरीजों की जिंदगी बदल देगा जिन्हें कैंसर सर्जरी, ट्रॉमा या अन्य कारणों से रक्त संचार बहाल करने की जरूरत होती है।
माइक्रोवास्कुलर सर्जरी
माइक्रोवास्कुलर एनास्टोमोसिस वह प्रक्रिया है जिसमें दो छोटी रक्त वाहिकाओं (अक्सर 2 मिलीमीटर से भी कम व्यास वाली) के सिरों को जोड़कर रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है। यह कैंसर के ट्यूमर हटाने, ट्रॉमा या पुनर्निर्माण सर्जरी के बाद बेहद जरूरी होती है। परंपरागत तरीके में सर्जन माइक्रोस्कोप के नीचे बेहद महीन सूई और धागे से वाहिका के किनारे पर दर्जनों टांके लगाते हैं। एक छोटी-सी गलती से क्लॉट बन सकता है, लीक हो सकता है या पूरा ऑपरेशन विफल हो सकता है। परिणामस्वरूप मरीज को अंग काटना पड़ सकता है। भारत में लगभग 1.2 करोड़ लोग शारीरिक विकलांगता के साथ जी रहे हैं, जिनमें से कई अंग-कटाव के शिकार हैं।
जूनियर डॉक्टर्स के लिए इसकी लर्निंग कर्व इतनी खड़ी है कि कई इसे छोड़ देते हैं। परिणामस्वरूप विशेषज्ञ सर्जनों की भारी कमी है, खासकर छोटे शहरों और जिला अस्पतालों में।
शिरा मेडटेक
शिरा मेडटेक की स्थापना 2016 में आईआईटी-मद्रास के स्नातक आनंद पारिख ने की थी। कंपनी ने 2018 से ही शिरा माइक्रोवास्कुलर क्लैंप का उपयोग शुरू कर दिया। यह थंबनेल साइज का पेटेंटेड डिवाइस है जो वाहिका के सिरों को खुला रखता है, सर्जन को स्पष्ट दृष्टि प्रदान करता है और ऊतकों के अनावश्यक मैनिपुलेशन को कम करता है।
इस क्लैंप के तीन-जॉ डिजाइन ने पारंपरिक दो-जॉ क्लैंप की समस्या को हल किया है। पारंपरिक क्लैंप में वाहिका घूम जाती है, जिससे एनास्टोमोसिस विफल होने का खतरा बढ़ जाता है। शिरा क्लैंप समान रूप से दबाव बांटता है, रोटेशन रोकता है और थ्रोम्बोसिस (खून के थक्के) का जोखिम कम करता है। इससे अनुभवी सर्जनों के साथ-साथ कम अनुभवी डॉक्टर्स भी सुरक्षित सर्जरी कर पाते हैं।
कंपनी अब अगले स्तर पर पहुंच गई है। उसका नया सूतुरलेस इम्प्लांटेबल डिवाइस टांकों को पूरी तरह हटाने जा रहा है। यह डिवाइस सर्जरी का समय कम करेगा, स्किल बैरियर घटाएगा और छोटे अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय सर्जरी संभव बनाएगा।
सरकारी और अंतरराष्ट्रीय मान्यता
शिरा मेडटेक को भारत सरकार, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात सरकार, टाटा ट्रस्ट्स, लॉकहीड मार्टिन और टाइटन कंपनी जैसी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है। कंपनी को BIRAC के बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन इनक्यूबेटर का समर्थन मिला है। इसे गांधी युवा तकनीकी नवाचार पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
2025 में सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर प्लेटफॉर्म्स (C-CAMP) द्वारा आयोजित नेशनल बायो एंटरप्रेन्योरशिप कॉम्पिटिशन (NBEC) में इसका आइडिया विजेता चुना गया। कंपनी के क्लिनिकल कार्य पीयर-रिव्यूड जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके उत्पाद अब मलेशिया में भी उपलब्ध हैं जहां MDA अप्रूवल मिल चुका है।
मरीजों के लिए फायदे
सूतुरलेस डिवाइस से ऑपरेशन का समय काफी कम हो जाएगा। पारंपरिक तरीके में कई घंटे लगने वाली सर्जरी अब तेज हो सकेगी। इससे अस्पताल का खर्च घटेगा, मरीजों का रिकवरी समय कम होगा और संक्रमण का खतरा भी कम होगा।
कैंसर सर्जरी के बाद पुनर्निर्माण, ट्रॉमा केस और डायबिटिक फुट जैसी स्थितियों में यह डिवाइस गेम चेंजर साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंग-कटाव की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
मेडिकल डिवाइस इनोवेशन की जरूरत
भारत में मेडिकल डिवाइसेस का बड़ा बाजार है, लेकिन ज्यादातर आयात पर निर्भर हैं। शिरा मेडटेक जैसी कंपनियां मेक इन इंडिया को मजबूत कर रही हैं। कम लागत वाला डिवाइस न केवल घरेलू जरूरत पूरी करेगा बल्कि निर्यात के अवसर भी पैदा करेगा।
आनंद पारिख कहते हैं, “हमारा लक्ष्य जटिलता कम करना है, न कि बढ़ाना। उन्नत सर्जरी को आम अस्पतालों तक पहुंचाना है ताकि हर मरीज को समान अवसर मिले।”
भविष्य
शिरा मेडटेक अब क्लिनिकल वैलिडेशन और बड़े पैमाने पर उत्पादन की दिशा में काम कर रही है। अगर यह डिवाइस सफल रहा तो न केवल भारत बल्कि विकासशील देशों में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता बदल जाएगी। सरकार द्वारा स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाली नीतियां और इनक्यूबेटर्स जैसे C-CAMP का समर्थन ऐसे नवाचारों को गति दे रहे हैं।
शिरा मेडटेक का यह प्रयास दिखाता है कि भारतीय इंजीनियरिंग और मेडिकल इनोवेशन दुनिया को नई दिशा दे सकता है। सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को जोड़ने की यह तकनीक न केवल सर्जनों के लिए वरदान है बल्कि लाखों मरीजों के लिए नई उम्मीद भी।जब सर्जरी की जटिलता कम होगी, तो स्वास्थ्य सेवा सुलभ और किफायती बनेगी। शिरा मेडटेक की सफलता भारत के डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम की ताकत का प्रमाण है।

