नई दिल्ली। भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। वर्ष 2025 में जबकि नई कारों की बिक्री लगभग 45 लाख यूनिट्स रही, वहीं यूज्ड कारों की बिक्री 60 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। यह आंकड़ा न केवल आश्चर्यजनक है बल्कि पूरे सेक्टर की दिशा को बदलने वाला साबित हो रहा है। आज भारत का यूज्ड कार बाजार 40 अरब डॉलर का हो चुका है और हर साल करीब 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यह आकार भारतीय एडटेक बाजार से तीन गुना बड़ा है। लेकिन इस विशाल बाजार के बावजूद ज्यादातर स्टार्टअप्स घाटे में डूबे हुए हैं। स्पिनी, कार्स24 और कारDekho जैसे बड़े खिलाड़ी सालों से मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। वहीं एक कंपनी कारट्रेड इस बाजार में मुनाफा कमा रही है। आज इस लेख में हम इस परिदृश्य को विस्तार से समझेंगे।
बाजार का आकार और बदलते उपभोक्ता व्यवहार
भारतीय उपभोक्ताओं की कार खरीदने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। पहले लोग एंट्री-लेवल कार से शुरू करके धीरे-धीरे प्रीमियम और SUV मॉडल्स की ओर बढ़ते थे। लेकिन अब ज्यादातर लोग सीधे प्रीमियम SUV या हाई-एंड कार से शुरुआत करना चाहते हैं। नई कार की ऊंची कीमत के कारण वे यूज्ड या सेकंड-हैंड, बल्कि थर्ड-हैंड कारों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बदलाव ने यूज्ड कार स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है।
IMC रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 40 अरब डॉलर का यह बाजार 2034 तक 109 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें सालाना 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी। इस बाजार में शीर्ष तीन खिलाड़ी कार्स24, स्पिनी और कारDekho हैं। लेकिन इनकी स्थिति चिंताजनक है।
कार्स24 की स्थापना 2015 में हुई थी। पिछले 11 वर्षों में इसकी आय 6,233 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, लेकिन FY25 में इसका नेट लॉस 543 करोड़ रुपये रहा। स्पिनी, जो इसी वर्ष शुरू हुई थी, FY25 में 4,657 करोड़ रुपये की आय के बावजूद 423 करोड़ रुपये का घाटा उठाया। वहीं कारDekho (जिसे अमित जैन की कंपनी कहा जाता है) 2008 से सक्रिय है। FY25 में 2,795 करोड़ रुपये की आय पर इसका घाटा 266 करोड़ रुपये रहा।
इन कंपनियों के घाटे का मुख्य कारण क्या है? इनका बिजनेस मॉडल कम मार्जिन वाला रिटेल बिजनेस है, लेकिन वे हाई मार्जिन टेक कंपनी की तरह काम कर रही हैं और वैल्यूएशन भी उसी हिसाब से लिए हैं।
कम मार्जिन और अनऑर्गनाइज्ड कॉम्पिटिशन
इन प्लेटफॉर्म्स का कोर बिजनेस यूज्ड कार खरीदना, स्टोर करना, रिपेयर करना और फिर मार्जिन के साथ बेचना है। इसमें ज्यादा टेक इनोवेशन नहीं है। मान लीजिए कोई प्लेटफॉर्म 10 लाख रुपये में कार बेच रहा है, लेकिन आपके पड़ोस का छोटा सा लोकल डीलर उसी कार को 9.5 लाख में दे रहा है। ज्यादातर ग्राहक लोकल डीलर को ही चुनेंगे क्योंकि कीमत बेहतर है। वेबसाइट या शोरूम की सुविधा से ज्यादा ग्राहक कीमत देखता है।
अमित जैन (कारDekho) ने इस समस्या को बहुत अच्छे से समझाया है। उन्होंने बताया कि कारDekho पहले 5 लाख रुपये में कार खरीदती थी और तीन महीने बाद 5.5 लाख में बेचती थी। 50,000 रुपये का मार्जिन दिखता था, लेकिन लागतें ज्यादा थीं:
- रिफर्बिशमेंट: 25,000 रुपये
- पार्किंग: 7,500 रुपये
- ब्याज: 15,000 रुपये
- मैनपावर, सेल्स और सिक्योरिटी: 8,000 रुपये
- RTO फीस: 6,000 रुपये
- फ्यूल और ड्राइवर: 3,000 रुपये
- मैनेजमेंट खर्च: 15,000 रुपये
इन सबको जोड़ने पर प्रति कार 30,000-35,000 रुपये का नुकसान होता था। ये कंपनियां 5-10% मार्जिन पर काम करती हैं, जो इतनी बड़ी ऑपरेशन्स के लिए काफी कम है। कीमत बढ़ाने पर ग्राहक अनऑर्गनाइज्ड प्लेयर्स के पास चले जाते हैं, जिनके ओवरहेड खर्च बहुत कम होते हैं।
हाई वैल्यूएशन और टेक जैसी खर्च करने की आदत
दूसरी बड़ी समस्या हाई वैल्यूएशन है। स्पिनी को 2021 में 1.8 बिलियन डॉलर (करीब 13,000 करोड़ रुपये) की वैल्यूएशन मिली, जबकि उस साल उसकी आय सिर्फ 40 करोड़ रुपये थी और वह घाटे में थी। इसी तरह अन्य कंपनियों ने भी फंडिंग के अच्छे समय में भारी वैल्यूएशन हासिल किए। इन वैल्यूएशन्स को जस्टिफाई करने के लिए हजारों कर्मचारी भर्ती किए गए, फैंसी ऑफिस बनाए गए, जिसका बोझ अब घाटे के रूप में दिख रहा है।
वास्तव में ये कंपनियां कार डीलरशिप बिजनेस हैं जिनके पास सिर्फ एक वेबसाइट है। कोई भी कार डीलरशिप सॉफ्टवेयर कंपनी की तरह 70-80% ग्रॉस मार्जिन नहीं कमा सकती।
इन्वेंटरी रिस्क: सबसे बड़ी चुनौती
इन्वेंटरी-लेड मॉडल में सबसे बड़ा खतरा इन्वेंटरी रिस्क है। यूज्ड कार रोजाना डेप्रिशिएट होती है। अगर कार 1-2 महीने नहीं बिकती तो नुकसान बढ़ता जाता है। ये कंपनियां फाइनेंस पर कार खरीदती हैं, इसलिए ब्याज भी लगातार चलता रहता है।
इसके अलावा E20 फ्यूल का मुद्दा भी है। पुरानी कारों के इंजन पर इसका असर पड़ने की आशंका से लोग पुरानी कारें कम खरीद रहे हैं। इससे स्टार्टअप्स के पास पड़ी हजारों कारों की वैल्यू और गिर रही है।
CarTrade का सफल मॉडल: क्लासिफाइड बिजनेस
लेकिन इस बाजार में एक खिलाड़ी मुनाफा कमा रहा है — कारट्रेड। FY26 में इसकी कुल आय 870 करोड़ रुपये रही और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 243 करोड़ रुपये रहा। दूसरे शब्दों में, हजारों करोड़ की आय वाले स्टार्टअप्स घाटे में हैं, जबकि यह छोटे स्केल पर भारी मुनाफा कमा रही है।
कारट्रेड का मॉडल क्लासिफाइड है। यह खरीदार और विक्रेता को जोड़ती है, खुद कोई इन्वेंटरी नहीं रखती। इससे फिक्स्ड कॉस्ट बहुत कम है। फुल-स्टैक मॉडल (जैसे स्पिनी) को खरीदार और विक्रेता दोनों को अलग-अलग एक्वायर करना पड़ता है, जो बहुत महंगा है।
कारDekho ने भी दो साल पहले इन्वेंटरी-बेस्ड रिटेल बिजनेस बंद कर दिया। अमित जैन ने कहा कि पार्किंग, शोरूम और मैनपावर का खर्च बहुत ज्यादा था और मुनाफे की कोई संभावना नहीं दिख रही थी। अब वे क्लासिफाइड बिजनेस पर फोकस कर रहे हैं और इंश्योरेंस, लेंडिंग जैसे वर्टिकल्स से कमाई कर रहे हैं। FY24 में उनका कोर कार क्लासिफाइड बिजनेस पहली बार प्रॉफिटेबल हुआ।
समाधान क्या हैं?
- क्लासिफाइड मॉडल अपनाएं: इन्वेंटरी रिस्क से बचने के लिए सिर्फ कनेक्टिंग प्लेटफॉर्म बनें।
- ऑफलाइन-फर्स्ट सोच: 10-15 लाख की कार खरीदने वाला ग्राहक टेस्ट ड्राइव लेगा, शोरूम आएगा। इसलिए कंपनियों को ब्रिक-एंड-मॉर्टार बिजनेस की तरह काम करना होगा।
- ओईएम का फायदा: मारुति, महिंद्रा, हुंडई जैसे कंपनियां इस बाजार में मजबूत स्थिति में हैं। मारुति ट्रू वैल्यू, हुंडई प्रॉमिस, महिंद्रा फर्स्ट चॉइस पहले से सक्रिय हैं। इनके पास पहले से कस्टमर बेस है। पुरानी कार वापस लेकर नई बेचने का मॉडल दोनों पक्षों के लिए विन-विन है। स्टार्टअप्स के पास यह एडवांटेज नहीं है।
चुनौतियां और संभावनाएं
यूज्ड कार बाजार बढ़ रहा है, लेकिन संगठित क्षेत्र को अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर से कड़ी टक्कर मिल रही है। डिजिटल ट्रांसपेरेंसी, बेहतर कस्टमर सर्विस, फाइनेंस और इंश्योरेंस जैसे वैल्यू-एडेड सर्विसेस प्रदान करके ही स्टार्टअप्स टिक सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में हाइब्रिड मॉडल काम कर सकता है — जहां थोड़ी इन्वेंटरी रखी जाए लेकिन ज्यादातर ट्रांजेक्शन्स क्लासिफाइड के जरिए हों। साथ ही AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके कार की वैल्यूएशन को और सटीक बनाया जा सकता है, जिससे इन्वेंटरी होल्डिंग पीरियड कम हो।
भारत में बढ़ती मध्यम वर्ग आबादी, युवाओं की डिस्पोजेबल इनकम और शहरीकरण इस बाजार को और आगे ले जाएगा। लेकिन टिकाऊ मुनाफा कमाने के लिए बिजनेस मॉडल में मौलिक बदलाव जरूरी है।
भारत का यूज्ड कार बाजार अवसरों से भरा है, लेकिन गलत बिजनेस मॉडल इसे चुनौती में बदल सकता है। स्पिनी और कार्स24 जैसे प्लेयर्स को कारDekho और कारट्रेड से सीख लेनी चाहिए। इन्वेंटरी से दूर रहकर, कम खर्च वाले ऑपरेशन्स अपनाकर और अतिरिक्त सेवाओं पर फोकस करके ही वे मुनाफे की राह पर आ सकते हैं।

