Sunday, February 8, 2026
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उत्तराखण्ड की बोलियों का जल्द भाषाई मानचित्र तैयार होगा – मुख्यमंत्री

NTI: उत्तराखण्ड भाषा संस्थान उत्तराखण्ड की बोलियों का भाषाई मानचित्र तैयार करेगा, साथ ही लोक कथाओं, लोकगीतों और साहित्य के डिजिटलीकरण के लिए ई-लाइब्रेरी बनाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह बात उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की बैठक में कही। उन्होंने स्कूलों में स्थानीय बोली-भाषा पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने, उत्तराखण्ड भाषा व साहित्य महोत्सव आयोजित करने और बुके के बजाय किताब भेंट करने की परंपरा को बढ़ावा देने की अपील की।

बैठक में निर्णय लिया गया कि उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान की राशि 5 लाख से बढ़ाकर 5.51 लाख और दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान की राशि 5 लाख रुपये होगी। युवा रचनाकारों के लिए 18-24 और 25-35 आयु वर्ग में युवा कलमकार प्रतियोगिता आयोजित होगी। सचल पुस्तकालयों और बड़े प्रकाशकों के सहयोग से पाठकों के लिए विविध साहित्य उपलब्ध कराया जाएगा। जौनसार बावर की पंडवाणी गायन ‘बाकणा’ का अभिलेखीकरण, गोविन्द बल्लभ पंत के साहित्य का संकलन, पुराने पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित साहित्य का संकलन और उच्च हिमालयी व जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के लिए शोध परियोजनाएं शुरू होंगी। इसके अलावा, दो साहित्य ग्राम बनाए जाएंगे।

भाषा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भाषा संस्थान ने भाषाओं के संरक्षण और स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की हैं। बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव वी. षणमुगम, निदेशक स्वाति भदौरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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