Saturday, February 7, 2026
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‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ – धामी सरकार का संकल्प और सामाजिक क्रांति की शुरुआत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा शुरू किया गया ‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ अभियान न केवल एक प्रशासनिक पहल है, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक है, जो समाज के हर वर्ग को नशे की गिरफ्त से मुक्त करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की हालिया बैठक में लिए गए निर्णय इस संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण है, जो नशा मुक्ति केंद्रों की सख्त निगरानी, अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई, और जन-जागरूकता के माध्यम से समाज को स्वस्थ और सशक्त बनाने का लक्ष्य रखता है। स्वास्थ्य सचिव के निर्देशानुसार, मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम 2017 के तहत जिला-स्तरीय निरीक्षण टीमों का गठन और बिना पंजीकरण संचालित नशा मुक्ति केंद्रों पर कठोर कार्रवाई का फैसला इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अवैध और अपंजीकृत नशा मुक्ति केंद्रों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का निर्णय स्वागतयोग्य है। यह सुनिश्चित करना कि केवल मानकों को पूरा करने वाले केंद्र ही संचालित हों, न केवल मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखेगा, बल्कि उन लोगों के विश्वास को भी पुनर्स्थापित करेगा जो इन केंद्रों पर निर्भर हैं। आर्थिक दंड और बंदी की कार्रवाई निश्चित रूप से अनियमितताओं पर लगाम लगाएगी और पुनर्वास प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी।

इस अभियान की सफलता के लिए जन-जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। स्वास्थ्य सचिव की अपील, जिसमें सभी विभागों और आम नागरिकों से सहयोग मांगा गया है, इस बात को रेखांकित करती है कि नशा मुक्ति केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रह सकती। ग्राम स्तर से लेकर शहरी क्षेत्रों तक व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि नशे की लत को सामाजिक कलंक के बजाय एक ऐसी समस्या के रूप में देखा जाए, जिसका समाधान संभव है।

हालांकि, इस अभियान के सामने कई चुनौतियां भी हैं। नशा मुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ, ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों, संसाधनों और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी। साथ ही, नशे की लत से जूझ रहे व्यक्तियों और उनके परिवारों को सामाजिक समर्थन और पुनर्वास के बाद रोजगार के अवसर प्रदान करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि वे समाज में पुनः एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।

‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ अभियान को साकार करने के लिए धामी सरकार का यह प्रयास एक प्रेरणादायक शुरुआत है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को सशक्त और संसाधनयुक्त बनाने का निर्णय इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह अभियान समाज के सभी वर्गों की भागीदारी के साथ आगे बढ़ता है, तो उत्तराखंड न केवल नशे से मुक्त होगा, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। यह समय है कि हम सब इस जन आंदोलन का हिस्सा बनें और एक स्वस्थ, सशक्त और नशा मुक्त उत्तराखंड के निर्माण में योगदान दें।

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