Saturday, October 17, 2026
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पुरटाड़ में 8 परिवारों ने खाली किए मकान

रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल की पांच साल की मुहिम के बीच बड़ा घटनाक्रम, किसान अजमेर सिंह चौहान बोले— राकेश उत्तराखंडी की मुहिम हमारे लिए वरदान

जौनसार-बावर के पुरटाड़ गांव में अनुसूचित जनजाति की भूमि से जुड़े मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यहां आठ परिवारों ने अपने मकान खाली कर संबंधित जमीन से कब्जा छोड़ दिया। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में भूमि अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रही मुहिम के बीच अहम माना जा रहा है। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी मौके पर पहुंचे। इस दौरान किसान अजमेर सिंह चौहान, सियाराम समेत कई क्षेत्रवासी मौजूद रहे। संगठन के अनुसार, जौनसार-बावर में भूमि अधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर पिछले करीब पांच वर्षों से लगातार आवाज उठाई जा रही है। पुराने राजस्व अभिलेखों, वर्ष 1951-52 और वर्ष 1983 के बंदोबस्त रिकॉर्ड तथा वर्तमान भूमि दस्तावेजों की जांच की मांग भी अभियान का प्रमुख हिस्सा रही है। पुरटाड़ में आठ परिवारों द्वारा मकान खाली किए जाने के बाद क्षेत्र में करीब 600 से 700 बीघा भूमि से संबंधित शिकायतों और अधिकारों को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
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अजमेर सिंह चौहान बोले— किसानों के लिए वरदान साबित हुई मुहिम

मौके पर मौजूद किसान अजमेर सिंह चौहान ने राकेश उत्तराखंडी और रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मुहिम चकराता विधानसभा क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। अजमेर सिंह चौहान ने कहा, “ये लोग पिछले कई वर्षों से हमारी जमीन पर बैठे थे। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के प्रयासों के कारण आज हमें न्याय मिला है और हमारी जमीन कब्जामुक्त हुई है। इसके लिए हम राकेश उत्तराखंडी के जीवनभर आभारी रहेंगे।” उन्होंने कहा कि जमीन के अधिकारों को लेकर लंबे समय से परेशान किसानों के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। भूमि संबंधी मामलों में प्रभावित पक्षों को न्याय मिलना चाहिए और पुराने राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
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राकेश उत्तराखंडी ने शासन-प्रशासन और क्षेत्रवासियों का जताया आभार

रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने पुरटाड़ पहुंचकर मौके की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अभियान में सहयोग देने वाले क्षेत्रवासियों और शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि भूमि अधिकारों से जुड़े मामलों को आगे बढ़ाने में स्थानीय किसानों, क्षेत्रवासियों और प्रशासनिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संगठन पिछले पांच वर्षों से जनजातीय भूमि और किसानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध अभियान चलाना नहीं, बल्कि पुराने राजस्व अभिलेखों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और कानून के अनुसार भूमि अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े मामलों में दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
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जौनसार-बावर और देवघार के भूमिहीन किसानों को जमीन देने की मांग

पुरटाड़ के घटनाक्रम के बीच राकेश उत्तराखंडी ने जौनसार-बावर और देवघार क्षेत्र के भूमिहीन मूल निवासी किसानों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने शासन से मांग की कि गरीब और भूमिहीन किसानों के हितों की रक्षा के लिए ठोस योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा, “जौनसार-बावर और देवघार क्षेत्र में जो मूल निवासी किसान भूमिहीन हैं, उनके हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद किसी भूमि का आवंटन संभव हो, तो पात्र भूमिहीन मूल निवासी किसानों को नियमानुसार भूमि उपलब्ध कराने की योजना बनाई जानी चाहिए।” राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि क्षेत्र के गरीब किसानों को भूमि अधिकारों के मामले में न्याय मिलना चाहिए। शासन को संबंधित कानूनों, पात्रता और उपलब्ध भूमि की स्थिति के आधार पर ऐसी नीति पर विचार करना चाहिए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को लाभ मिल सके।

1951-52 और 1983 के बंदोबस्त रिकॉर्ड की जांच की मांग

जौनसार-बावर में भूमि विवादों को लेकर पुराने बंदोबस्त अभिलेखों और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड का मिलान कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। प्रभावित किसानों का कहना है कि पूर्वजों की जमीन से संबंधित पुराने दस्तावेजों और मौजूदा राजस्व अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल की ओर से मांग की गई है कि जिन मामलों में नामांतरण या राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्रविष्टियों को लेकर अनियमितता की शिकायतें हैं, उनकी सक्षम अधिकारियों से जांच कराई जाए। यदि किसी मामले में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि भूमि से जुड़े प्रत्येक मामले का निस्तारण उपलब्ध दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो और प्रभावित पक्षों को न्याय मिल सके।
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जन, जंगल और जमीन के मुद्दे पर जारी रहेगा संघर्ष

रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल पिछले करीब पांच वर्षों से ‘जन, जंगल और जमीन’ के मुद्दे पर अभियान चला रही है। संगठन के अनुसार, इस दौरान प्रभावित किसानों को पुराने दस्तावेज जुटाने, भूमि संबंधी शिकायतें तैयार करने और उन्हें प्रशासन के समक्ष रखने के लिए प्रेरित किया गया है। पुरटाड़ में आठ परिवारों द्वारा मकान खाली किए जाने की घटना को संगठन अपनी मुहिम के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देख रहा है। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें भूमि से जुड़े अन्य मामलों की जांच और उनके नियमानुसार निस्तारण पर टिकी हैं। राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों की रक्षा और जनजातीय भूमि से जुड़े मामलों में कानून का पालन सुनिश्चित कराने के लिए आगे भी प्रयास जारी रखेगा। पुरटाड़ का यह घटनाक्रम एक बार फिर जौनसार-बावर में भूमि अधिकारों, पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच और भूमिहीन मूल निवासी किसानों के हितों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। अब देखना होगा कि क्षेत्र में लंबित अन्य मामलों में संबंधित विभागों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए क्या प्रगति होती है।
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