देहरादून। जौनसार-बावर की करीब 700 बीघा भूमि से जुड़ा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग को लेकर रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल के कार्यकर्ताओं ने चकराता और त्यूनी तहसीलों में प्रदर्शन किया। गठन ने भूमि अभिलेखों की निष्पक्ष जांच, कथित अवैध कब्जों पर नियमानुसार कार्रवाई और मामले का शीघ्र निस्तारण करने की मांग उठाई। संगठन के अनुसार, पांच वर्षों से चल रहा यह संघर्ष अब न्यायालयीन कार्रवाई के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है।
1983 के भूमि अभिलेखों पर उठाए सवाल
रुद्रसेना का आरोप है कि वर्ष 1983 में भूमि अभिलेखों में नियमों के विपरीत कुछ नाम दर्ज किए गए थे। संगठन ने इन प्रविष्टियों की वैधानिक स्थिति की जांच कराने और यदि अवैध कब्जा प्रमाणित हो, तो संबंधित भूमि को कानून के अनुसार कब्जामुक्त कराने की मांग की है।
संगठन के अनुसार, जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश पर उपजिलाधिकारी त्यूनी को बेदखली की कार्रवाई के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद संबंधित भूमि प्रकरण में न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किए गए। इसी क्रम में संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। रुद्रसेना के कार्यकर्ताओं ने भी न्यायालय परिसर में उपस्थित होकर अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया।
चकराता में नारेबाजी, सुनवाई में देरी पर नाराजगी
चकराता तहसील परिसर में रुद्रसेना के कार्यकारी अध्यक्ष अंकित तोमर, महामंत्री सचिन खन्ना और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। संगठन के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी भी इस दौरान मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग करते हुए नारेबाजी की।
संगठन ने संबंधित प्रकरण की सुनवाई के दौरान उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। रुद्रसेना का कहना है कि मामले में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और सभी तथ्यों व अभिलेखों की जांच के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।
त्यूनी में भी प्रदर्शन, शीघ्र कार्रवाई की मांग
त्यूनी तहसील में भी रुद्रसेना के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र हुए। संगठन के अध्यक्ष मनोज बिजल्वाण के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भूमि विवाद को लेकर विरोध दर्ज कराया और संबंधित अधिकारियों से जल्द कार्रवाई की मांग की।
संगठन ने कहा कि चकराता और त्यूनी दोनों क्षेत्रों में भूमि के संरक्षण को लेकर उसका अभियान जारी रहेगा। रुद्रसेना ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि भूमि संबंधी कानूनों का पालन सुनिश्चित कराना और स्थानीय जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना है।
पदाधिकारियों से अभद्रता का आरोप, पुलिस को शिकायत
प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों के साथ कथित अभद्रता का मामला भी सामने आया। रुद्रसेना ने बिन्याबीन और जाकिर नामक दो व्यक्तियों पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया है। संगठन के अनुसार, इस संबंध में कोतवाली चकराता में लिखित शिकायत दी गई है।
रुद्रसेना ने पुलिस प्रशासन से शिकायत की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भूमि संरक्षण को लेकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग
रुद्रसेना के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि जौनसार-बावर अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है और यहां भूमि हस्तांतरण से जुड़े प्रावधानों का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संगठन पिछले पांच वर्षों से करीब 700 बीघा भूमि के मामले को उठा रहा है।
उन्होंने प्रशासन से भूमि अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने, उनकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने और यदि किसी तरह का अवैध कब्जा प्रमाणित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की। उनके मुताबिक, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र की भूमि की सुरक्षा और स्थानीय समुदाय के अधिकारों का संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
प्रदर्शन और संबंधित न्यायालयीन कार्रवाई के दौरान रुद्रसेना के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी, संगठन मंत्री भानु प्रताप सिंहराणा, अध्यक्ष मनोज बिजल्वाण, कार्यकारी अध्यक्ष अंकित तोमर, महामंत्री सचिन खन्ना, केसर सिंह चौहान, विजयपाल डोभाल, जयपाल सिंह, रामानंद शर्मा, अनु सिंगाराम शर्मा, अनु सोहन सिंह, महेंद्रनाथ, चंदन सिंह राणा, रडु और चमन राणा सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
संगठन ने प्रशासन से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 700 बीघा भूमि के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच, विवाद का शीघ्र निस्तारण, अवैध कब्जा प्रमाणित होने पर बेदखली, भूमि हस्तांतरण संबंधी नियमों का पालन और पदाधिकारियों से कथित अभद्रता की शिकायत की जांच शामिल है। अब मामले में प्रशासनिक और न्यायालयीन कार्रवाई की दिशा पर नजर रहेगी।




