NTI: स्ट्रेट ऑफ गिब्राल्टर का रहस्यमैड्रिड/रबात: यूरोप और अफ्रीका के बीच महज 14 किलोमीटर का फासला, जिसे स्ट्रेट ऑफ गिब्राल्टर के नाम से जाना जाता है, आज भी दोनों महाद्वीपों को जोड़ने वाले किसी ब्रिज या टनल के बिना है। यह दूरी इतनी कम है कि बिना ट्रैफिक के इसे आधे घंटे में पार किया जा सकता है, फिर भी पिछले 100 सालों में कोई भी देश इस गैप को पाटने में कामयाब नहीं हो सका। आखिर क्यों?सामरिक और व्यापारिक महत्व: स्ट्रेट ऑफ गिब्राल्टर दुनिया की सबसे व्यस्त शिपिंग लेन में से एक है। हर साल करीब 1 लाख जहाज और 18,000 ऑयल टैंकर इस रास्ते से गुजरते हैं। विश्व का 33% तेल और गैस, 50% व्यापार, और यूरोपीय संघ का 80% मर्चेंडाइज ट्रेड इसी 14 किमी की संकरी दरार से होकर गुजरता है। यदि इस रास्ते पर एक ब्रिज या टनल बन जाए, तो यह न केवल स्पेन और मोरक्को, बल्कि पूरे यूरोप और अफ्रीका के लिए एक बड़ा सामरिक लाभ होगा।
इंजीनियरिंग की चुनौतियां: स्ट्रेट ऑफ गिब्राल्टर की भौगोलिक स्थिति इसे एक जटिल क्षेत्र बनाती है। समुद्र की गहराई 800-900 मीटर तक है, जो इंजीनियरिंग के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसके तल में ब्रेकिया और क्ले की परतें हैं, जो नरम और कमजोर होती हैं, जिससे ब्रिज के खंभे स्थिर करना मुश्किल है। इसके अलावा, यह क्षेत्र अफ्रीकन और यूरेशियन टेक्टॉनिक प्लेट्स के फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जो इसे भूकंप संवेदनशील बनाता है। तेज समुद्री धाराएं और विभिन्न घनत्व के पानी का मिश्रण भी निर्माण को और जटिल बनाता है।
ऐतिहासिक प्रयास और असफलताएं: 1920 में जर्मन आर्किटेक्ट हरमन सोरगिल ने ‘प्रोजेक्ट अटलांट्रोपा’ प्रस्तावित किया था, जिसमें मेडिटेरेनियन सागर का जलस्तर कम कर दोनों महाद्वीपों को जोड़ने की योजना थी। हालांकि, यह योजना पर्यावरणीय और आर्थिक कारणों से लागू नहीं हो सकी। 1980 में स्पेन और मोरक्को ने संयुक्त रूप से इस दिशा में काम शुरू किया, लेकिन बार-बार तकनीकी और राजनैतिक बाधाओं ने प्रोजेक्ट को रोका। 1997 में दो रूट्स (कैनियन और थ्रेशहोल्ड) पर विचार किया गया, लेकिन गहराई और भूकंपीय जोखिमों ने इन्हें अव्यवहारिक बनाया।
राजनैतिक तनाव: स्पेन और मोरक्को के बीच सटा और मेलिला जैसे क्षेत्रों को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। 2008 में स्पेन के राजा की इन क्षेत्रों की यात्रा और 2020 में वेस्टर्न सहारा के एक रिबेल लीडर को स्पेन में इलाज की अनुमति जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा किया, जिससे प्रोजेक्ट बार-बार रुका।
नया दृष्टिकोण: हाल के वर्षों में थ्रेशहोल्ड रूट (28 किमी) को प्राथमिकता दी गई है, जहां समुद्र की गहराई केवल 300 मीटर है। इस रूट पर तीन टनल्स बनाने की योजना है, जिसमें दो रेलवे और एक सर्विस टनल होगी। यदि यह प्रोजेक्ट पूरा होता है, तो कैसाब्लांका से मैड्रिड का सफर 12 घंटे से घटकर 5.5 घंटे हो जाएगा।
आगे की राह: विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट की सफलता न केवल इंजीनियरिंग पर, बल्कि स्पेन और मोरक्को के बीच विश्वास और सहयोग पर भी निर्भर करती है। वैश्विक दबाव के बीच, यह देखना बाकी है कि क्या यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट साकार होगा या फिर स्ट्रेट ऑफ गिब्राल्टर का रहस्य अनसुलझा रहेगा।

