देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने न्यायपालिका को बड़ी राहत प्रदान की है। अब हाईकोर्ट के सेवारत मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों और उनके आश्रितों के निजी अस्पतालों में इलाज का शत-प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी। स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। यह सुविधा रिटायर्ड न्यायाधीशों और उनके आश्रितों पर भी लागू होगी। इस फैसले से न्यायिक अधिकारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 29 अप्रैल 2025 के आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें सभी राज्यों को न्यायाधीशों के लिए एक समान चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश दिया गया था। आंध्र प्रदेश ने इस मॉडल को पहले लागू किया था, और अब उत्तराखंड ने उसी नीति को अपनाते हुए राज्यपाल की अनुमति के बाद यह निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में न्यायाधीशों के लिए अब तक चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मानक 19 जनवरी 2007 और 24 फरवरी 2021 के गोपनीय विभाग के आदेशों के अनुसार तय थे। नई व्यवस्था इन पुरानी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाती है।
पहले क्या था?
पहले न्यायाधीशों को एमएस/सीजीएचएस दरों के अनुसार प्रतिपूर्ति मिलती थी, लेकिन अब प्राइवेट अस्पतालों में भी बिना किसी सीमा के पूरा खर्च सरकार देगी। आंध्र प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड यह सुविधा लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, और स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने स्पष्ट किया कि यह न्यायाधीशों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का प्रयास है। क्या यह अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बनेगा? समय बताएगा।

