देहरादून : पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रखकर इसे सांस्कृतिक और सामाजिक विकास का माध्यम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने वाले उत्तराखंड के नए पर्यटन सचिव धीरज गर्ब्याल एक प्रेरणा हैं। पहाड़ों को समझने और उनकी चुनौतियों का सामना करने की उनकी कार्यशैली उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग करती है। जहां पूर्व में उनके द्वारा संभाले गए जिलाधिकारी के पदों पर उन्होंने पर्वतीय सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और पर्यटकों को पहाड़ी संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, वहीं अब पर्यटन सचिव के रूप में उन्होंने अपने कर्तव्यों को और भी गंभीरता से लिया है।
उत्तराखंड में भयंकर बरसात और आपदा की स्थिति में जहां अधिकांश अधिकारी सचिवालय में बैठकर समीक्षा बैठकों तक सीमित रहते हैं, वहीं धीरज गर्ब्याल ने पहाड़ों के दौरे को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि आपदा की स्थिति में जनमानस की समस्याओं को समझने और उनका निदान करने के लिए मैदान में उतरना जरूरी है। अपने पहले दौरे पर वे गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर बद्रीनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात, उन्होंने बद्रीनाथ धाम में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण किया और कार्यों में तेजी लाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
माणा: वाइब्रेंट विलेज की संभावनाएं
पर्यटन सचिव का अगला पड़ाव था भारत का प्रथम गांव माणा। हल्की बारिश के बीच माणा वासियों ने पूर्व प्रधान पीताम्बर मोलपा की अगवाही में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यहां उन्होंने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के साथ पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। माणा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय संस्कृति और संसाधनों का उपयोग कैसे किया जा सकता है, इस पर विचार-विमर्श हुआ।
औली और तपोवन: पर्यटन ढांचे को मजबूत करने की पहल
धीरज गर्ब्याल ने औली पहुंचकर GMVN गेस्टहाउस के सुधार के लिए आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही, औली की महत्वपूर्ण ट्रॉली के मरम्मत कार्यों से संबंधित एक बैठक भी आयोजित की। इसके बाद, वे नीती मार्ग पर तपोवन स्थित तप्त कुंड पहुंचे और वहां के ढांचे का निरीक्षण किया। उनकी यह सक्रियता दर्शाती है कि वे पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बेनीताल: एस्ट्रो विलेज की ओर कदम
अपने दौरे के अंतिम पड़ाव में पर्यटन सचिव बेनीताल पहुंचे, जहां उन्होंने बन एस्ट्रो विलेज का निरीक्षण किया। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।
धीरज गर्ब्याल का यह दौरा उत्तराखंड में पर्यटन के क्षेत्र में एक नए दृष्टिकोण को दर्शाता है। जहां पहले पर्यटन सचिवों का ध्यान मुख्य रूप से सचिवालय में बैठकर नीतियां बनाने तक सीमित रहता था, वहीं गर्ब्याल ने मैदान में उतरकर वास्तविक समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनकी यह पहल न केवल पर्यटन को नए आयाम देगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तराखंड के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए धीरज गर्ब्याल जैसे जुझारू और कर्मठ अधिकारियों की जरूरत है, जो न केवल नीतियां बनाएं, बल्कि जमीन पर उतरकर उन्हें लागू भी करें।


