Sunday, September 27, 2026
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शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की SLP

उत्तराखंड में हजारों शिक्षकों की नौकरी पर मंडरा रहे खतरे को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष पुनर्विचार याचिका (एसएलपी) दाखिल करने का फैसला लिया है, जिससे करीब 18,000 शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें शिक्षकों के लिए टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना अनिवार्य किया गया है।

शिक्षकों की चिंता का कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों ने TET पास नहीं किया है, उन्हें अगले दो साल में यह परीक्षा पास करनी होगी, अन्यथा उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है। उत्तराखंड में 2011 से पहले भर्ती हुए हजारों शिक्षकों को TET की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन नए आदेश ने इन शिक्षकों के सामने अनिश्चितता ला दी है। खासकर उन शिक्षकों को, जिन्होंने सालों तक सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शिक्षा मंत्री का आश्वासन शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने भरोसा जताया है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार शिक्षकों के पक्ष को मजबूती से रखेगी। उन्होंने कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में शिक्षकों को बड़ी राहत देगा, जिससे उनकी नौकरियों पर मंडरा रहा खतरा टल जाएगा।”

क्या है मामला? उत्तराखंड में 2011 में TET लागू होने से पहले भर्ती हुए शिक्षकों को यह परीक्षा देने की जरूरत नहीं थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने सभी शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले से राज्य के करीब 18,000 शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है।

सरकार का रुख और उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ही राज्य सरकार इस मुद्दे पर विचार-विमर्श कर रही थी। कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष पुनर्विचार याचिका दायर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार को भरोसा है कि इस याचिका के जरिए शिक्षकों की स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्हें राहत दी जा सकेगी।

आगे की राह यह याचिका न केवल शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि उत्तराखंड की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को भी स्थिरता प्रदान कर सकती है। शिक्षक समुदाय अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है, जिससे उनकी नौकरी और सम्मान दोनों बरकरार रह सकें।

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