Friday, September 25, 2026
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मानसून सत्र से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में रौनक लौटी

गैरसैंण: एक साल के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का सन्नाटा आखिरकार टूट गया है। मंगलवार से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों भराड़ीसैंण पहुंच चुके हैं, जिससे इस क्षेत्र में फिर से चहल-पहल लौट आई है। पिछले साल 21 अगस्त को यहां मानसून सत्र हुआ था, जिसके बाद से भराड़ीसैंण में शांति थी। इस बार 19 अगस्त से शुरू हो रहे सत्र से प्रदेशवासियों को विकास की नई किरण दिखने की उम्मीद है।

एक साल के दौरान राज्य में कई राजनीतिक हलचलें हुईं, और बजट सत्र देहरादून में आयोजित हुआ। लेकिन, इस दौरान गैरसैंण और भराड़ीसैंण पूरी तरह शांत रहे। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने मंत्रियों और विधायकों के साथ गैरसैंण पहुंचे, जबकि विपक्ष भी सरकार पर हमला करने की तैयारी के साथ वहां एकजुट हो गया है। देहरादून से गैरसैंण तक के रास्ते में इस साल की आपदा के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं, जिससे जनता की परेशानियां भी उजागर होती हैं।

इन मुश्किलों के बीच सरकार के पहुंचने से पहाड़ के लोगों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों को यह उम्मीद है कि टूटी हुई सड़कों और भूस्खलन से जूझते हुए सरकार ने जो दर्द महसूस किया है, वह इस सत्र में पहाड़ के विकास के लिए एक नई दिशा प्रदान करेगा। उन्हें आशा है कि इस सत्र से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और उनकी समस्याओं का समाधान होगा।

मानसून के इस मौसम में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने जहां पहाड़ों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, वहीं सरकार और उसके अधिकारियों ने भी इन चुनौतियों का सामना करते हुए गैरसैंण तक का सफर तय किया। दिन भर भूस्खलन और मलबे के खतरों के बीच सरकारी गाड़ियां गैरसैंण पहुंचीं। इस यात्रा से यह साबित होता है कि अगर पहाड़ के विकास का जुनून हो, तो कोई भी चुनौती असंभव नहीं है।

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