Sunday, February 8, 2026
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हिमाचल की Woodsmen Mountain Whiskey ने बाजार में मचाया धमाल

NTI (मोहन भुलानी) : भारत में व्हिस्की पीना कोई नई बात नहीं, लेकिन असली देसी स्वाद की तलाश अब भी जारी है। अक्सर “मेड इन इंडिया” लिखी बोतलों में विदेशी स्पिरिट्स का मिश्रण होता है या फिर वो ब्रांड्स से आती हैं, जिनका भारत से बस मार्केटिंग का नाता है। लेकिन अब एक नया नाम उभर रहा है, जो न सिर्फ स्वाद में, बल्कि सोच में भी पूरी तरह देसी है। इस ब्रांड की शुरुआत हुई है हिमाचल प्रदेश से, इस व्हिस्की ब्रांड का नाम है Woodsmen Mountain Whiskey

Woodsmen एक ऐसा ब्रांड है, जो धीरे-धीरे देश के व्हिस्की प्रेमियों को यकीन दिला रहा है कि पहाड़ों की गोद में बना स्वाद मैदानों की बोतलों से कहीं अलग और खास है। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी योजना और हिमाचल की मिट्टी से जुड़ाव का नतीजा है। इस स्टार्टअप की शुरुआत दिल्ली के युवा उद्यमी शिवम गिंगलानी ने की, लेकिन इसका दिल और प्रोडक्शन सेंटर हिमाचल की वादियों में है, खासकर सोलन की घाटियों में, जहां कंपनी की डिस्टिलरी स्थित है। यह वही इलाका है, जिसे कभी ब्रिटिश हिल एस्टेट्स कहा जाता था और जहां शराब बनाना एक शाही परंपरा थी।

शिवम बताते हैं कि हिमाचल की भौगोलिक खासियतें व्हिस्की के स्वाद को अनोखा बनाती हैं। यहां का ग्लेशियर से आया शुद्ध पानी, ठंडा तापमान, और प्राकृतिक शीतलता—ये तीनों मिलकर व्हिस्की को एक अलग स्तर पर ले जाते हैं। डिस्टिलेशन में इस्तेमाल होने वाला पानी स्पिरिट को स्मूथ और कम जलन वाला बनाता है। जब यही स्पिरिट पहाड़ों की ठंडी हवा में महीनों तक ओक बैरल्स में परिपक्व होती है, तो उसमें वुडी और नेचुरल सुगंध आती है, जो गर्म मैदानी इलाकों में संभव नहीं।

वुड्समैन की डिस्टिलेशन प्रक्रिया में डबल डिस्टिलेशन होता है, जो शराब को और शुद्ध बनाता है। स्थानीय जौ से तैयार बेस माल्ट में हर्बल नोट्स आते हैं, और ओक बैरल्स में रखने पर स्वाद में देसी लेकिन प्रीमियम अहसास उभरता है। शिवम और उनकी टीम का मानना है कि व्हिस्की सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, एक अनुभव है। और जब यह अनुभव हिमाचल की मिट्टी से जुड़ा हो, तो उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है।

वुड्समैन की शुरुआत 2020 में हुई थी। पहले ही साल कंपनी ने 1.5 लाख बोतलें बेचीं, जो हिमाचल और दिल्ली जैसे सीमित बाजारों में बड़ी उपलब्धि थी। पिछले तीन सालों में ब्रांड ने 125 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया, और इस साल का लक्ष्य 80 करोड़ रुपये है। ये आंकड़े सिर्फ बिजनेस की ग्रोथ नहीं, बल्कि एक नई सोच की जीत दिखाते हैं—भारतीय उपभोक्ता अब सिर्फ बड़े नाम नहीं, बल्कि लोकल क्वालिटी को भी पहचानने लगा है।

वुड्समैन की कहानी तब और चर्चा में आई, जब शिवम शार्क टैंक इंडिया के मंच पर पहुंचे। उन्होंने ₹1.5 करोड़ के बदले सिर्फ 0.5% इक्विटी की मांग रखी, यानी 300 करोड़ की वैल्यूएशन। यह सुनकर कुछ शार्क्स के होश उड़ गए। बोट के फाउंडर अमन गुप्ता ने मजाक में पूछा, “अपनी व्हिस्की पीकर आए हो क्या?” यह लाइन वायरल हो गई, और वुड्समैन की पब्लिसिटी रातोंरात बढ़ गई। भले ही कोई शार्क निवेश न कर सका, लेकिन रितेश अग्रवाल की बात याद रही, “अगर यह किसी और इंडस्ट्री में होता, तो मैं चेक लेकर आपके पीछे भागता।” शिवम ने साफ कहा कि वो शो में सिर्फ निवेश के लिए नहीं, बल्कि ब्रांड को पहचान दिलाने आए थे—और इसमें वो पूरी तरह कामयाब रहे।

शो के बाद सोशल मीडिया पर वुड्समैन को लेकर सकारात्मक रिव्यूज की बाढ़ आ गई। यूट्यूब चैनलों पर इसकी टेस्टिंग हुई, और लोगों ने कहा कि इसमें “पहाड़ों का अहसास” है। किसी ने लिखा, “लगता है जैसे शिमला की सर्दियों को बोतल में भर दिया हो।” इंस्टाग्राम पर #MountainWhisky और #HimachaliSpirit ट्रेंड करने लगे। दिल्ली और चंडीगढ़ के होटल्स और हाई-एंड बार्स में इसकी डिमांड बढ़ी। कंपनी अब होरेका सेगमेंट (होटल, रेस्टोरेंट, कैफे) में फोकस कर रही है, ताकि वुड्समैन को एक प्रीमियम और एस्पिरेशनल ब्रांड बनाया जा सके।

वुड्समैन का असर सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं। यह हिमाचल की ब्रांड वैल्यू को बढ़ा रहा है। पहाड़ी इलाकों में रोजगार के नए अवसर खुले हैं—खेती, डिस्टिलेशन, पैकेजिंग से लेकर मार्केटिंग तक। हिमाचल में अब माउंटेन प्रोडक्ट्स की नई इमेज बन रही है। जहां पहले सेब, शहद और हस्तशिल्प की बात होती थी, अब व्हिस्की भी उस लिस्ट में शामिल हो रही है। कंपनी भविष्य में हिमाचल व्हिस्की ट्रेल्स जैसे टूरिज्म प्रोजेक्ट्स शुरू करना चाहती है, जहां पर्यटक लोकल व्हिस्की की टेस्टिंग कर सकें। इससे ब्रांड बिल्डिंग, टूरिज्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ फायदा होगा।

शिवम का अगला लक्ष्य है 100% सिंगल माल्ट हिमाचली व्हिस्की लॉन्च करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात शुरू करना। उनका फोकस तीन चीजों पर है—क्रिएटिविटी, कस्टमर्स, और कंसिस्टेंसी। सबसे बड़ी बात, उन्होंने यह साबित किया कि अगर सोच साफ हो, क्वालिटी से समझौता न हो, और अपनी जड़ों से जुड़ाव हो, तो मेड इन हिमाचल भी ग्लोबल स्टेटमेंट बन सकता है।

वुड्समैन सिर्फ एक व्हिस्की नहीं, हिमाचल की मिट्टी, पानी और हवा का जादू है, जो अब बोतल में बंद होकर दुनिया को अपनी कहानी सुना रहा है।

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