(NTI): भारत में करीब 40 प्रतिशत लोग मोटापे से जूझ रहे हैं। मुख्य वजह अनहेल्दी स्नैकिंग है – कचौड़ी, समोसा, चिप्स और प्रोसेस्ड फूड्स। लोग अब हेल्दी अल्टरनेटिव की तलाश में हैं। इसी बदलाव को भुनाते हुए नोएडा बेस्ड ब्रांड फार्मली (Farmley) ने हेल्दी स्नैकिंग मार्केट में तूफान ला दिया है। 90 प्रतिशत मखाना बिहार में उगाया जाता है। फार्मली इसे सीधे किसानों से खरीदकर प्रोसेस करती है। ब्रांड के एंबेसडर राहुल द्रविड़ हैं। कंपनी FY25 में 394 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल कर चुकी है और 2026 में 370 करोड़ के टारगेट पर काम कर रही है।
Farmley की शुरुआत 2017 में आईआईटी ग्रेजुएट्स आकाश शर्मा और अभिषेक अग्रवाल ने की। शुरू में यह B2B होलसेल बिजनेस था जो रिलायंस और ग्रोफर्स जैसी कंपनियों को ड्राई फ्रूट्स सप्लाई करता था। 2020 में B2C ब्रांड लॉन्च किया गया। कंपनी का फोकस सरल है – स्वास्थ्य और स्वाद का सही मेल। आज फार्मली के पास 100 से ज्यादा प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें फ्लेवर्ड मखाना, रोस्टेड नट्स, ट्रेल मिक्स, डेट बाइट्स और मसाला मंची शामिल हैं।
मखाना फार्मली का सबसे बड़ा प्रोडक्ट है। दुनिया का 90 प्रतिशत मखाना भारत में और उसमें भी ज्यादातर बिहार में उगता है। मिथिला क्षेत्र के तालाबों में कमल के बीज निकालकर माले समुदाय के लोग इन्हें पॉप करके मखाना बनाते हैं। फार्मली ने बिहार में पांच प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की हैं ताकि कच्चा माल सीधे फार्मगेट पर प्रोसेस हो सके। महाराष्ट्र में रेजिन्स और आयातित सामग्री की यूनिट है।
क्वालिटी कंट्रोल फार्मली की सबसे मजबूत कड़ी है। आने वाले हर ट्रक के 10 प्रतिशत मटेरियल को 25 पैरामीटर्स पर चेक किया जाता है। फिजिकल पैरामीटर्स, मॉइश्चर कंटेंट, सॉल्ट टेस्ट, सीजनिंग का केमिकल एनालिसिस – सब कुछ जांचा जाता है। बादाम के लिए मॉइश्चर टेस्ट में 4-5 मिनट लगते हैं, जबकि सूखे फलों में 20-25 मिनट। करीब 20 प्रतिशत ट्रक्स क्वालिटी चेक में रिजेक्ट हो जाते हैं। कंपनी रोजाना औसतन 15 टन प्रोडक्शन करती है, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना ज्यादा है।
रॉ मटेरियल को स्पेशल स्टोरेज में रखा जाता है। कोल्ड स्टोरेज 1100 वर्ग फीट का है, जहां 45-50 मीट्रिक टन सामग्री रखी जा सकती है। तापमान 36°F और ह्यूमिडिटी 50-60 प्रतिशत रखी जाती है। हाई मॉइश्चर वाले प्रोडक्ट्स जैसे डेट्स को 2-3 डिग्री पर स्टोर किया जाता है। कंपनी कुल इन्वेंटरी 60-70 दिनों के लिए रखती है।
प्रोडक्शन के बाद पैकेजिंग का स्टेज आता है। मैनुअल पैकेजिंग छोटे लॉट्स के लिए है, जबकि ऑटोमेटेड पिक-फील-सील (PFS) मशीनें बड़े पैमाने पर काम करती हैं। हर मशीन पर 70-75 लाख रुपये का निवेश हुआ है। पाउच वैक्यूम सील किए जाते हैं ताकि 7-8 महीने तक ताजगी बनी रहे। कंपनी पैकेजिंग मटेरियल पर ही दो करोड़ रुपये का इन्वेंटरी रखती है।
फार्मली के इनोवेटिव प्रोडक्ट्स में डेट बाइट्स खास है। इसमें बादाम, काजू, डेट्स, घी और शहद का मिश्रण होता है। कटिंग मशीन से सटीक साइज में काटकर फ्लो रैप मशीन से पैक किया जाता है – एक मिनट में 100 पीस। रिटेल प्राइस 10 रुपये है। मटेरियल कॉस्ट 1-1.5 रुपये, पैकेजिंग 1.5 रुपये, प्रोसेसिंग 2 रुपये, डिस्ट्रीब्यूशन 2-2.5 रुपये। 40 प्रतिशत ग्रॉस मार्जिन मिलता है। मसाला मंची भी हाई मार्जिन वाला प्रोडक्ट है।
कंपनी ने सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में शुरुआती साल बिताए। 2019 में पहला 2 मिलियन डॉलर फंडिंग आई। कुल मिलाकर 8.5 करोड़ रुपये इस फैसिलिटी में लगे हैं। अगले साल 3.5 करोड़ रुपये और प्लान हैं। बिजनेस 80 प्रतिशत ऑनलाइन और 20 प्रतिशत ऑफलाइन है।
राहुल द्रविड़ ब्रांड एंबेसडर बनने के बाद फार्मली को व्यापक पहुंच मिली। क्रिकेट सीजन में प्रमोशन ने साउथ और नॉर्थ दोनों को कनेक्ट किया। कंपनी में 60 प्रतिशत महिला वर्कफोर्स है।
फार्मली का सफर दिखाता है कि सप्लाई चेन की गहराई, क्वालिटी कंट्रोल और इनोवेशन से हेल्दी स्नैकिंग ब्रांड सफल हो सकता है। मोटापे की बढ़ती समस्या और लोगों की हेल्दी अल्टरनेटिव की तलाश ने इस मार्केट को बढ़ावा दिया है। फार्मली FY25 में 394 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है और आगे और तेज ग्रोथ की तैयारी में है। अगर भारतीय स्टार्टअप्स सप्लाई चेन की समस्याएं सुलझाएं और गवर्नेंस मजबूत रखें तो बड़े निवेशक आसानी से आकर्षित होंगे। फार्मली जैसे ब्रांड्स न सिर्फ स्वास्थ्य सुधार रहे हैं, बल्कि बिहार जैसे क्षेत्रों के किसानों को भी नई आय का जरिया दे रहे हैं।

