Monday, February 9, 2026
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देहरादून के सुद्धोवाला की वाइन एंड बियर शॉप का लाइसेंस निरस्त

NTI: देहरादून जिला प्रशासन ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए एक सख्त और सराहनीय फैसला लिया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सुद्धोवाला स्थित एक विवादित वाइन एंड बियर शॉप का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। यह निर्णय आबकारी अधिनियम 1910 की धारा 34 और 59 के तहत लिया गया है। इसके साथ ही जिला आबकारी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुद्धोवाला गांव के निवासियों ने लंबे समय से इस वाइन एंड बियर शॉप के खिलाफ आवाज उठाई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि यह शॉप शैक्षणिक संस्थानों और एक डिपार्टमेंटल स्टोर के नजदीक स्थित है, जिसके कारण छात्र-छात्राओं और आसपास के निवासियों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा, ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शॉप का लाइसेंस चकराता रोड के नाम पर लिया गया था, लेकिन यह दुकान वास्तव में भाउवाला रोड पर स्थित है। इस तरह के मानकों के उल्लंघन और झूठे दस्तावेजों के आरोप भी लगाए गए थे।

इस मामले में स्थानीय महिलाएं और बुजुर्ग लंबे समय से धरने पर बैठे हुए थे। उनका कहना था कि शराब की दुकान के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है और युवाओं पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से लगातार इस मुद्दे को उठाया और उचित कार्रवाई की मांग की।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई की। वाइन एंड बियर शॉप के मालिक ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर लाइसेंस प्राप्त किया है और यह संपत्ति वाणिज्यिक उपयोग के लिए एमडीडीए (Mussoorie Dehradun Development Authority) से स्वीकृत है। हालांकि, जिलाधिकारी ने स्थानीय अधिसूचना इकाई से प्राप्त रिपोर्ट और सभी तथ्यों का परीक्षण करने के बाद शॉप का लाइसेंस निरस्त करने का फैसला किया।

जिलाधिकारी के इस सख्त निर्णय पर स्थानीय निवासियों ने खुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि इस फैसले से उन्हें राहत मिली है और प्रशासन पर उनका विश्वास भी बढ़ा है। ग्रामीणों ने कहा कि यह निर्णय न केवल उनकी मांगों को पूरा करता है, बल्कि समाज के नैतिक और सामाजिक मूल्यों की रक्षा भी करता है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि यह फैसला सिर्फ एक शॉप का लाइसेंस निरस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि प्रशासन जनभावनाओं को गंभीरता से लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में और भी सख्ती बरती जाएगी और किसी भी तरह के मानकों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

देहरादून जिला प्रशासन का यह फैसला न केवल स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि यह समाज के हित में लिए गए सख्त निर्णयों का एक उदाहरण भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन जनता की आवाज को सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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