Wednesday, March 25, 2026
HomeNewsपर्वतीय राज्यों में रोपवे परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता हुआ आसान

पर्वतीय राज्यों में रोपवे परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता हुआ आसान

NTI: उत्तराखंड सहित सभी पर्वतीय राज्यों में रोपवे परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता अब और आसान हो गया है। रोपवे निर्माण के लिए अब पूरी परियोजना क्षेत्र की वन भूमि का हस्तांतरण करना जरूरी नहीं होगा। केवल पिलर वाली वन भूमि का ही हस्तांतरण किया जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सलाहकार समिति ने वन संरक्षण अधिनियम में दी जाने वाली इस छूट की सिफारिश को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से उत्तराखंड के केदारनाथ, मसूरी, नीलकंठ और यमुनोत्री रोपवे परियोजनाओं को गति मिलेगी।

राज्य के नोडल मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) आरके मिश्रा ने इस बात की पुष्टि की है। उनके अनुसार, रोपवे परियोजनाओं के लिए मंत्रालय की यह छूट बड़ी राहत लेकर आई है। वन भूमि हस्तांतरण के लिए पहले दोगुनी भूमि का इंतजाम करना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था। लेकिन इस नई छूट के तहत एक हेक्टेयर से कम वन भूमि के लिए इस प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही, पेड़ों का कटान भी कम होगा। मंत्रालय ने 2019 में पर्वतीय राज्यों में रोपवे निर्माण के लिए जारी गाइडलाइन को पूरी तरह बहाल कर दिया है। हिमाचल सरकार की गाइडलाइन में राहत की मांग पर यह फैसला लिया गया है। मंत्रालय के वन संरक्षण प्रभाग के विज्ञानी चरन जीत सिंह ने सभी राज्यों के अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों (वन) को इस संबंध में पत्र भेज दिए हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में रोपवे: सुरक्षित और किफायती विकल्प

मंत्रालय की सलाहकार समिति ने रोपवे परियोजनाओं को पर्यावरण के अनुकूल गतिविधि माना है। समिति का कहना है कि रोपवे निर्माण से वन क्षेत्र में न्यूनतम अतिक्रमण होता है और पेड़ों का कटान भी नाममात्र होता है। इसके साथ ही, दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को परिवहन का एक सुरक्षित और किफायती साधन उपलब्ध हो पाता है।

RELATED ARTICLES