Sunday, February 8, 2026
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वन्यजीव हमले में जनहानि पर सहायता राशि 10 लाख रुपये – मुख्यमंत्री

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून चिड़ियाघर में वन्यजीव सप्ताह का उद्घाटन करते हुए घोषणा की कि राज्य में वन्यजीवों के हमले में होने वाली जनहानि के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाएगा। वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। हमारे देवी-देवताओं ने भी उनके साथ सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। मां दुर्गा का वाहन शेर, गणेश जी का मूषक, मां सरस्वती का हंस, भगवान कार्तिकेय का मोर, लक्ष्मी जी का उल्लू और भगवान शिव के कंठ पर विराजमान नागराज व नंदी हमारी सनातन संस्कृति में मानव और प्रकृति के बीच एकता के प्रतीक हैं। यही कारण है कि प्राचीन काल से वन्यजीवों का संरक्षण भारत की जीवनशैली का स्वाभाविक हिस्सा रहा है।

 उत्तराखंड की लगभग 14.77 प्रतिशत भूमि 6 राष्ट्रीय उद्यानों, 7 वन्यजीव विहारों और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के रूप में संरक्षित है, जबकि पूरे देश में यह अनुपात केवल 5.27 प्रतिशत है। यह अंतर राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हरियाली और यहां स्वच्छंद विचरण करने वाले वन्यजीव साल भर देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार पर्यटकों की सुविधाओं के साथ-साथ वनों के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और तकनीक के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए काम कर रही है। उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान कर उसे विकसित किया जाए, बिना प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए इको-टूरिज्म मॉडल पर काम चल रहा है, ताकि लोग प्रकृति से जुड़ें, लेकिन पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।

 राज्य सरकार के प्रयासों से बाघ, गुलदार, हाथी और हिम तेंदुए जैसे दुर्लभ वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इस संघर्ष को कम करने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपायों का उपयोग कर रही है। वन विभाग को ड्रोन और जीपीएस जैसी तकनीकी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि वन्यजीवों की बेहतर निगरानी और सुरक्षा हो सके। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, ताकि वे वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बन सकें।

 ’सीएम यंग ईको-प्रिन्योर’ योजना के तहत एक लाख युवाओं को नेचर गाइड, ड्रोन पाइलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और इकोटूरिज्म जैसे कार्यों में उद्यमी बनाने का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा, प्रत्येक जिले में छात्रों के लिए इको क्लब के माध्यम से वन्यजीवों से संबंधित शैक्षिक यात्राओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ’लाइफ स्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ का आह्वान धरती को बचाने का मंत्र है। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे जंगल सफारी या धार्मिक स्थलों पर जाते समय गंदगी न फैलाएं। इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन और वन्यजीवों को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और तकनीक के समन्वय से ही प्रदेश प्रगति कर सकता है।

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