Sunday, February 8, 2026
HomeNewsबनबसा में ₹500 करोड़ की आधुनिक लैंड पोर्ट परियोजना 

बनबसा में ₹500 करोड़ की आधुनिक लैंड पोर्ट परियोजना 

बनबसा (चंपावत): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लागत से विकसित हो रही आधुनिक लैंड पोर्ट परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान सीएम ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। यह परियोजना भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार, यात्री आवागमन और सीमावर्ती विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत-नेपाल के बीच सहयोग, व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगी।” उन्होंने बताया कि भारत सरकार की LPAI उत्तराखंड सरकार के पूर्ण सहयोग से इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है। वर्तमान में परियोजना के लिए डिजाइन और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (DPMC) सेवाओं के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है, जो अगस्त 2025 में शुरू हुई थी।

पर्यावरणीय मंजूरियां पूरी, निर्माण कार्य तेज

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि परियोजना के आरंभ से ही सभी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इस वर्ष पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा लगभग 84 एकड़ वन भूमि को अंतिम स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसके बाद निर्माण कार्य को गति मिली है। प्रतिपूरक वनीकरण और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है। LPAI ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है, जिसमें 84 एकड़ भूमि का चयन किया गया है। परियोजना का डिजाइन प्रतियोगिता के माध्यम से तैयार किया जा रहा है, जो पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।

एकीकृत सुविधाओं से व्यापार में पारदर्शिता और गति

लगभग ₹500 करोड़ की इस परियोजना से भारत-नेपाल के बीच व्यापार एवं यात्री आवागमन के लिए एक समेकित, सुविधाजनक और सुरक्षित प्रणाली विकसित होगी। यहां कस्टम, इमिग्रेशन, सुरक्षा, व्यापार एवं अन्य बॉर्डर एजेंसियां एक ही परिसर में कार्य करेंगी, जिससे सीमा प्रबंधन में तेजी, पारदर्शिता और दक्षता आएगी। बनबसा, जो एशियन हाईवे-2 के निकट स्थित है, नेपाल के महेंद्रनगर से जुड़ा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार है।

बनबसा लैंड पोर्ट का ऐतिहासिक महत्व और व्यापारिक योगदान

बनबसा इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) का इतिहास 2014-15 से जुड़ा है, जब इसे आधिकारिक रूप से चालू किया गया था। यह भारत-नेपाल सीमा पर प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है, जो कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्री और दैनिक वस्तुओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत-नेपाल द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य US$ 8,920.78 मिलियन रहा, जिसमें बनबसा जैसे ICP महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ICPs के माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ कुल व्यापार का लगभग 40% हिस्सा संभाला जाता है। जनवरी 2025 तक बनबसा से भारत की 1,10,337 शिपमेंट निर्यात दर्ज हो चुकी हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। यह नया लैंड पोर्ट मौजूदा ICP को अपग्रेड करेगा, जिससे वार्षिक व्यापार मात्रा में 30% से अधिक वृद्धि की उम्मीद है।

आर्थिक क्रांति और रोजगार सृजन का माध्यम

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह परियोजना केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के आर्थिक परिदृश्य को बदल देगी। रणनीतिक रूप से स्थित बनबसा लैंड पोर्ट सीमा पार व्यापार को सशक्त बनाएगा, कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों के लिए औपचारिक प्रवेश द्वार तैयार करेगा। किसानों और छोटे उत्पादकों को सीधे बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जिससे परिवहन लागत घटेगी और मूल्य संवर्धन संभव होगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए हजारों रोजगार अवसर उत्पन्न होंगे, विशेषकर पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्रों में।

धामी ने कहा कि यह पहल भारत-नेपाल के आपसी संबंधों को मजबूत करेगी, जिससे पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना भारत सरकार की क्षेत्रीय एकीकरण दृष्टि और सुरक्षित, सतत सीमा विकास नीति के अनुरूप है। नेपाल सरकार ने भी अपनी ओर से मिरर इमेज लोकेशन पर समानांतर विकास की योजना बनाई है।

मुख्यमंत्री ने भारत सरकार, LPAI और राज्य के सभी विभागों-एजेंसियों से आपसी समन्वय बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा हो सके। उन्होंने कहा, “बनबसा लैंड पोर्ट उत्तराखंड की सीमाओं को समृद्धि, सहयोग और अवसरों की नई पहचान देगा।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना तराई क्षेत्र को व्यापारिक हब बना देगी, जिससे उत्तराखंड की जीडीपी में उल्लेखनीय योगदान होगा।

यह विकास न केवल आर्थिक मजबूती लाएगा, बल्कि सीमा सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा, जहां पारंपरिक व्यापार के साथ-साथ डिजिटल कस्टम्स और ग्रीन लॉजिस्टिक्स जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी।

RELATED ARTICLES