Sunday, February 8, 2026
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मुनस्यारी इको-हट परियोजना में ₹1.63 करोड़ का घपला

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ वन प्रभाग की मुनस्यारी रेंज में वर्ष 2019 में निर्मित इको-हट्स, डॉरमेट्री, और वन कुटीर उत्पाद विक्रय केंद्र से जुड़ी एक प्रमुख इको-टूरिज्म परियोजना गंभीर सवालों के घेरे में है। इस परियोजना पर लगभग ₹1.63 करोड़ की वित्तीय अनियमितता और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं। तत्कालीन प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) और वर्तमान में पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डॉ. विनय कुमार भार्गव इस मामले में जांच के दायरे में हैं। प्रमुख सचिव वन ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है, और मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच की सिफारिश की गई है।

मुनस्यारी, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव-विविधता के लिए प्रसिद्ध, उत्तराखंड का एक प्रमुख इको-टूरिज्म गंतव्य है। वर्ष 2019 में, पिथौरागढ़ वन प्रभाग के अंतर्गत मुनस्यारी रेंज के खलिया आरक्षित कक्ष संख्या-तीन में 10 इको-हट्स, एक डॉरमेट्री, एक वन कुटीर उत्पाद विक्रय केंद्र, और एक ग्रोथ सेंटर का निर्माण किया गया। इन पक्की संरचनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में पर्यावरणीय पर्यटन को बढ़ावा देना था। हालांकि, अब यह परियोजना कई गंभीर अनियमितताओं के आरोपों से घिर गई है।

प्रमुख आरोप

  • बिना अनुमति के निर्माण: आरोप है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति और उचित निविदा प्रक्रिया के बिना ₹1.63 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य किए गए।

  • वन (संरक्षण) अधिनियम का उल्लंघन: आरक्षित वन भूमि पर बिना केंद्रीय सरकार की मंजूरी के पक्की संरचनाओं का निर्माण, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का स्पष्ट उल्लंघन है।

  • फर्जी फर्मों से खरीद: निर्माण सामग्री की खरीद फर्जी फर्मों से की गई, जिसमें एक ही दिन में ₹87 लाख के 13 बिल पास किए गए।

  • फायरलाइन में हेराफेरी: 90 किमी फायरलाइन की सफाई का खर्च दिखाया गया, जबकि वास्तव में केवल 14.6 किमी ही साफ की गई।

  • निजी संस्थाओं को अनुचित लाभ: परियोजना से प्राप्त आय का 70% एक निजी संस्था को देने का आरोप, जो वित्तीय अनियमितता को और गंभीर बनाता है।

जांच और कानूनी कार्रवाई

मामले का खुलासा मुख्य वन संरक्षक (कार्ययोजना) संजीव चतुर्वेदी की विस्तृत जांच रिपोर्ट से हुआ, जिसे दिसंबर 2024 में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक धनंजय मोहन ने 17 जनवरी 2025 को प्रमुख सचिव वन को भेजा था। इस रिपोर्ट में सभी अनियमितताओं का विस्तार से उल्लेख किया गया। प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु ने 18 जुलाई 2025 को डॉ. विनय कुमार भार्गव को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत यह कार्रवाई की गई है। इसके अतिरिक्त, मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई और ईडी से जांच के साथ-साथ पीएमएलए के तहत कानूनी कार्यवाही की सिफारिश की गई है।

यह मामला उत्तराखंड के वन प्रबंधन और इको-टूरिज्म परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है। मुनस्यारी जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्रों में इस तरह की अनियमितताएं न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों और पर्यटन क्षेत्र की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं। जांच के परिणाम और कानूनी कार्रवाई इस मामले में भविष्य की दिशा तय करेंगे।

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