उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भाजपा और कांग्रेस से पहले चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए 16 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। शनिवार को देहरादून में आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने फाइव-लेयर सिस्टम के तहत उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। पार्टी ने कहा कि प्रत्याशियों के चयन में संगठन के प्रति निष्ठा, जनसरोकार, समर्पण और उत्तराखंड के हितों के लिए किए गए संघर्ष को प्राथमिकता दी गई है।
जारी सूची में कर्णप्रयाग से आशीष नेगी, पिथौरागढ़ से काशी सिंह ऐरी, धारचूला से पुष्पेश त्रिपाठी, देवप्रयाग से पूरन सिंह कठैत, प्रतापनगर से प्रकाश राणा और जागेश्वर से दिनेश कुंजवाल को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा राजपुर से देव चंद उत्तराखंडी, सल्ट से प्रताप सिंह, टिहरी से डीडी पंत, कपकोट से करण चंदोला, काशीपुर से प्रदीप चंद, नानकमत्ता से कैलाश सिंह पांगती, रामनगर से भुवन चंद्र, देहरादून कैंट से राजेंद्र सिंह नेगी, खानपुर से रितु कंडियाल भूयाल और घनसाली से चंदन सिंह राणा चुनाव मैदान में उतरेंगे।
गैरसैंण राजधानी और 1992 के ब्लूप्रिंट पर जोर
प्रेसवार्ता में यूकेडी नेता आशीष नेगी ने प्रदेश की विकास नीतियों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के इतने वर्षों बाद भी पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और महिलाओं को होने वाली परेशानियां गंभीर चिंता का विषय हैं। उनके अनुसार, उत्तराखंड के विकास के लिए व्यापक योजना तैयार करने की जरूरत है।
नेगी ने 1992 के ब्लूप्रिंट का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें प्रदेश के लिए 23 जिलों, 150 से 200 ब्लॉक, करीब 104 विधानसभा क्षेत्रों और चार कमिश्नरियों की परिकल्पना की गई थी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक इकाइयां छोटी होने से सरकारी योजनाओं का लाभ गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय समस्याओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग दोहराते हुए कहा कि पहाड़ों की समस्याओं को समझने और उनके अनुरूप नीतियां बनाने के लिए प्रदेश का शासन पहाड़ में बैठना जरूरी है। जंगली जानवरों के हमले, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और ग्रामीणों के रोजमर्रा के संघर्षों को विकास की योजना में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
युवाओं और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का दावा
नेगी के मुताबिक, पहली सूची में चार टिकट युवाओं और युवा प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं। सैनिक प्रकोष्ठ, महिलाओं और राज्य आंदोलनकारियों को भी प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा को साथ लेकर चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है। सूची में काशी सिंह ऐरी और पुष्पेश त्रिपाठी जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी जगह दी गई है।
परिसंपत्तियों और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया
यूकेडी नेता ने जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ यहां के निवासियों को मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड के लोग अपने संसाधनों के बावजूद बिजली और पानी के बिल चुकाने को मजबूर हैं।
नेगी ने पेपर लीक, जमीनों की खरीद-फरोख्त में कथित अनियमितताओं और प्रदेश के संसाधनों पर कब्जे के मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर उत्तराखंड की करीब डेढ़ से दो लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों पर कब्जा बनाए रखने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यूकेडी आगामी विधानसभा चुनाव केवल सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों और उत्तराखंड के नवनिर्माण के संकल्प के साथ लड़ेगी। पार्टी नेतृत्व के अनुसार, पहली सूची के बाद चुनावी और संगठनात्मक गतिविधियों को तेज किया जाएगा तथा जल्द ही प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी की जाएगी।