Sunday, February 8, 2026
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सावधान! सावन में कढ़ी-चावल और साग खाना है ‘महापाप’? 

सावन का पावन महीना चल रहा है, चारों ओर हरियाली है, भक्ति का माहौल है… और आपकी रसोई में पक रही है गरमागरम कढ़ी और साग! लेकिन रुकिए! क्या आपको पता है कि आप कितना बड़ा ‘पाप’ कर रहे हैं? जी हाँ, वही ‘पाप’, जिसके बारे में सदियों से हमारे पूर्वज हमें बताते आ रहे हैं… और अब आयुर्वेद भी उसका समर्थन कर रहा है!

कढ़ी और साग: सावन के ‘विलेन’ क्यों?

आपको शायद सुनकर अजीब लगे, लेकिन इस महीने में आपकी पसंदीदा कढ़ी और साग जैसे ‘देसी’ और ‘पौष्टिक’ खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह नहीं दी जाती है। क्या आप जानना चाहते हैं कि आपकी पसंदीदा कढ़ी-चावल और साग सावन में क्यों नहीं खानी चाहिए? अरे बिल्कुल जानना चाहेंगे, क्योंकि आखिर ‘ज्ञान’ कहीं से भी मिले, ले लेना चाहिए!

आयुर्वेद का ‘अनोखा’ ज्ञान: बरसात में ‘पेट’ बचाओ!

आयुर्वेद कहता है कि बरसात के मौसम में कुछ फूड्स को खाने से परहेज करना चाहिए। क्यों? क्योंकि वातावरण में नमी बहुत ज़्यादा होती है, जो सीधे आपके डाइजेशन पर हमला करती है! अब आप सोचिए, आपकी प्यारी कढ़ी, जो खट्टी और पेट के लिए ‘भारी’ होती है, और आपका ‘सुपरफूड’ साग, जिसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा होती है, इन सबको पचाना कितना ‘मुश्किल’ होगा! तो जनाब, सावन में इनका सेवन ‘ज्यादा सही नहीं होता है’ – मतलब सीधे-सीधे कहें तो ‘गुनाह’ है!

कढ़ी का ‘षड्यंत्र’

आप सोच रहे होंगे, कढ़ी में ऐसा क्या है? अरे भाई, कढ़ी बेसन और छाछ से बनती है। और सावन में हमारी सीधी-सादी गायें ताजी गीली घास खाती हैं, जिससे उनकी छाछ की ‘गुणवत्ता प्रभावित’ हो सकती है। अब ये मत पूछना कि कैसे, बस ‘मान लिया’ गया है कि इस मौसम में यह मिश्रण पेट के लिए बहुत ‘ठंडा’ या ‘भारी’ होता है और इसे पचाना ‘मुश्किल’ होता है। तो बस, कढ़ी से दूरी बनाइए, अपनी गायों और उनके ‘आहार’ पर थोड़ा रहम खाइए!

साग: सिर्फ ‘कीटाणुओं’ का बसेरा!

और अब बात करते हैं साग (पत्तेदार सब्जियों) की। पालक और सरसों के पत्ते जैसी सब्जियां भी ‘ठंडी’ मानी जाती हैं। और आप तो जानते ही हैं, मॉनसून में डाइजेशन ‘बहुत कमजोर’ रहता है, जिसकी वजह से इन्हें पचाना और भी ‘मुश्किल’ होता है। लेकिन असली ‘राज’ कुछ और है! बारिश के मौसम में पर्यावरण में जीव-जंतु, कीटाणु और विषाणुओं भी बहुत ज़्यादा पनपते हैं। और ये ‘स्मार्ट’ कीटाणु क्या करते हैं? ये सीधे हरी पत्तेदार सब्जियों को अपना घर बनाते हैं! तो बस, अगर आपको बीमारियों को ‘न्योता’ नहीं देना है, तो साग से भी दूरी बनाइए। बीमार होने से अच्छा है, थोड़ी ‘भूख’ सह लें!

तो क्या खाएं? ‘धार्मिक’ और ‘सेहतमंद’ फल-फूल!

तो फिर क्या करें? सावन में भूखे रहें? नहीं-नहीं! सावन के दौरान, आपको फल, सब्जियां, साबुत अनाज, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स और दूध व घी जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स खाने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसे फूड्स ‘ओवरऑल हेल्थ’ को बढ़ाने के साथ ही ‘धार्मिक नजरिए से’ खाने भी अच्छे होते हैं। यानी, आपकी सेहत भी बनेगी और धर्म भी! अब इतनी ‘विशाल’ जानकारी मिलने के बाद भी अगर आप अपनी कढ़ी और साग पर अड़े रहे, तो ये आपकी अपनी ‘अज्ञानता’ होगी!

तो अगली बार जब आपकी पसंदीदा कढ़ी या साग आपके सामने आए, तो ज़रा इन ‘अटपटे’ लेकिन ‘ज्ञानवर्धक’ कारणों को याद कर लीजिएगा! क्या पता, आपका पेट और ‘आपका धर्म’ दोनों बच जाएं!

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