Wednesday, March 4, 2026
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इतना क्रूड ऑयल क्यों खरीद रहा है चीन?

बीजिंग/नई दिल्ली: दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल आयातक चीन 2025 में रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीद रहा है। नवंबर में चीन ने 12.43 मिलियन बैरल प्रतिदिन का आयात किया, जो 27 महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है। पूरे साल के लिए आयात 11.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक रहने का अनुमान है, जो 2023 के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भरने और कम कीमतों का फायदा उठाने के कारण है, न कि मांग में भारी वृद्धि के कारण।

मुख्य कारण: स्ट्रैटेजिक स्टॉकपाइलिंग और कम कीमतेंचीन की सरकार ने राज्य कंपनियों जैसे सिनोपेक और सीएनओओसी को निर्देश दिया है कि वे स्टोरेज टैंकों को भरें। 2025 में चीन ने औसतन 900,000 से 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन अतिरिक्त तेल स्टोर किया, जिससे कुल रिजर्व 1.2 से 1.5 बिलियन बैरल तक पहुंच गया है। यह स्टॉकपाइलिंग वैश्विक बाजार में अतिरिक्त सप्लाई को सोख रहा है और ब्रेंट क्रूड की कीमतों को $65 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रखने में मदद कर रहा है।

  • कम कीमतों का अवसर: 2025 में ब्रेंट क्रूड की कीमतें $60-70 के दायरे में रहीं, जो मुद्रास्फीति समायोजित आधार पर ऐतिहासिक रूप से कम हैं। रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से सैंक्शंड तेल पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है, जिससे रिफाइनरियां ज्यादा खरीद रही हैं।
  • नई स्टोरेज क्षमता: 2025-2026 में 11 नए साइट्स पर 169 मिलियन बैरल की अतिरिक्त क्षमता बन रही है। इससे चीन अपने रिजर्व को 6 महीने के आयात कवर तक बढ़ाने की योजना बना रहा है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: भू-राजनीतिक तनाव (रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संघर्ष) और अमेरिकी सैंक्शंस के जोखिम से बचाव के लिए चीन रिजर्व बढ़ा रहा है।

लेकिन स्टॉक बिल्डिंग जारी

चीन की तेल मांग 2025 में धीमी रही और 2025-2027 में पीक करने की उम्मीद है, मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और ग्रीन एनर्जी के कारण। फिर भी, रिफाइनरी रन्स बढ़े हैं और पेट्रोकेमिकल डिमांड मजबूत है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और EIA के अनुसार, 2026 में मांग वृद्धि 200,000-300,000 बैरल प्रतिदिन रह सकती है, लेकिन स्टॉकपाइलिंग से आयात ऊंचा बना रहेगा।
वैश्विक प्रभाव: पहले OPEC+ तेल कीमतें तय करता था, लेकिन 2025 में चीन की खरीदारी ने कीमतों को फ्लोर और सीलिंग प्रदान की। रॉयटर्स के अनुसार, चीन ने OPEC+ की जगह ले ली है, क्योंकि उसकी स्टॉकपाइलिंग ग्लोबल सरप्लस को अवशोषित कर रही है। अगर 2026 में भी यह जारी रहा, तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं; अन्यथा ओवरसप्लाई से दबाव बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रही है। आने वाले महीनों में स्टोरेज क्षमता और कीमतें इस ट्रेंड को तय करेंगी।
(स्रोत: रॉयटर्स, EIA, एनर्जी इंटेलिजेंस, ऑयलप्राइस.कॉम)
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