Tuesday, January 13, 2026
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घसियारी कल्याण योजना में चारे की आपूर्ति ठप, पशुपालकों की बढ़ी मुश्किलें

देहरादून: उत्तराखंड में पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित कई योजनाओं में से एक महत्वपूर्ण योजना घसियारी कल्याण योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को पशुओं के चारे के बोझ से मुक्ति दिलाना है। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को पशु आहार और साइलेज उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उन्हें जंगलों या दूरस्थ इलाकों में घास काटने जाने की जरूरत नहीं पड़ती और घर पर ही पशुओं के लिए चारा उपलब्ध हो जाता है।

यह योजना वर्ष 2023 में शुरू की गई थी, लेकिन शुरुआत से ही विभिन्न कारणों से इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अब एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता को लेकर नई समस्या उत्पन्न हो गई है। कई पशुपालकों का कहना है कि उनके इलाकों में लंबे समय से पशुओं का चारा नहीं पहुंचाया जा रहा है, जिसकी वजह से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं, क्योंकि वन विभाग लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे अपने मवेशियों को जंगलों में चराने न छोड़ें। विभाग का तर्क है कि जंगलों में शिकारी वन्यजीवों का खतरा बढ़ गया है, जिससे न केवल मवेशियों बल्कि उन्हें चराने जाने वाली महिलाओं की जान को भी जोखिम हो सकता है। हाल के दिनों में महिलाओं पर वन्यजीवों के हमले के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में पशुपालक दुविधा में हैं कि वे अपने पशुओं के लिए सुरक्षित चारे की व्यवस्था कहां से करें।

घसियारी योजना के तहत चारे की आपूर्ति रुकने की मुख्य वजह बजट का समय पर जारी न होना बताया जा रहा है। योजना में साइलेज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एक निजी संस्था को दी गई थी, लेकिन लंबे समय तक भुगतान न होने के कारण उस संस्था ने चारा आपूर्ति से इनकार कर दिया। इसका सीधा असर पर्वतीय जिलों के पशुपालकों पर पड़ा है।

आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में हर महीने लगभग 3 हजार टन साइलेज भेजा जाता है। वहीं, बड़े पैमाने पर व्यावसायिक पशुपालन करने वाले डेयरी फार्मरों के लिए अब कुछ नई शर्तें लागू की गई हैं। इसके तहत केवल पांच पशुओं तक के पशुपालकों को ही सब्सिडी पर चारा मिलेगा। निर्धारित मात्रा से अधिक चारा लेने पर उन्हें व्यावसायिक दरों पर भुगतान करना होगा।

पशुपालकों की शिकायतों के बीच सहकारिता विभाग का कहना है कि अब बजट जारी कर दिया गया है और जल्द ही योजना को सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा। सहकारिता विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार आनंद शुक्ला ने बताया कि भुगतान न होने के कारण वेंडर ने चारा आपूर्ति रोक दी थी, लेकिन अब बजट मिलने के बाद सभी व्यवस्थाएं दोबारा ठीक की जा रही हैं। विभाग का दावा है कि आने वाले दिनों में पशुपालकों को इस समस्या से राहत मिलेगी।

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