Haridwar: विश्व प्रसिद्ध महाकुंभ-2025 की अभूतपूर्व सफलता और माघ मेले की शानदार व्यवस्थाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। उत्तर प्रदेश की इस मेगा धार्मिक आयोजन प्रबंधन की मिसाल अब अन्य राज्य भी अपनाना चाहते हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड के हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले अर्धकुंभ मेले की तैयारियों के लिए अधिकारियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रयागराज पहुंचा है। प्रतिनिधिमंडल का दो दिवसीय दौरा बेहद महत्वपूर्ण है। टीम महाकुंभ और माघ मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और प्रबंधन के लिए विकसित की गई अत्याधुनिक व्यवस्थाओं का स्थलीय अध्ययन कर रही है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य यातायात प्रबंधन, श्रद्धालु सुविधाएं, एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम और क्राउड मैनेजमेंट डैशबोर्ड की कार्यप्रणाली को करीब से समझेंगे। विशेष रूप से प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा समन्वय और आपातकालीन प्रबंधन पर फोकस रहेगा।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य आकाश जोशी ने बताया, “प्रयागराज में जो व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, वे विश्व स्तर की हैं। हम हरिद्वार अर्धकुंभ के लिए इन्हें अपनाना चाहते हैं।” उन्होंने विस्तार से बताया कि टीम मेला क्षेत्र में सुगम यातायात, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, रिंग मेन यूनिट व्यवस्था, विद्युत पोलों पर लगे क्यूआर कोड, जियो ट्यूब से नदी कटाव निरोधक कार्य, पारंपरिक ओपन एसटीपी की जगह प्री-फैब्रिकेटेड एसटीपी, टेंट सिटी, वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां और ऑनलाइन ऐप के माध्यम से फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी सुविधाओं की जानकारी लेगी। इसके अलावा बाइक टैक्सी संचालन, मेला सेवा ऐप, जन सुविधाओं में नवाचार, ट्रैफिक मूवमेंट प्लान के तहत अस्थायी होल्डिंग एरिया, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली और स्नान घाटों की डिजाइन व व्यवस्था का भी गहन अध्ययन किया जाएगा।
माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि हरिद्वार की टीम माघ मेले की सफलता को देखते हुए यहां की व्यवस्थाओं को समझने आई है। दो दिनों तक टीम घाटों, यातायात प्रबंधन और क्राउड मैनेजमेंट का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेगी। उन्होंने कहा, “प्रयागराज में हमने जो सीखा है, उसे अन्य राज्य भी अपनाना चाहते हैं। यह उत्तर प्रदेश के लिए गर्व की बात है।”
दूसरी ओर माघ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। महाकुंभ की भव्यता के बाद सनातन परंपरा में माघ मेले के संगम स्नान का महत्व और बढ़ गया है। गंगा, यमुना तथा अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान को मोक्षदायी माना जाता है। पिछले एक सप्ताह तक स्नान करने वालों की संख्या में कुछ कमी आई थी, लेकिन रविवार को फिर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हनुमान मंदिर में भी लंबी कतारें दिखीं। अब तक 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं।
मेला प्रशासन के अनुसार यदि यह क्रम जारी रहा तो 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम प्रमुख स्नान तक माघ मेला ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना लेगा। संगम तट पर सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहता है। प्रशासन ने सभी घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। एआई आधारित कैमरे, ड्रोन निगरानी और क्राउड मैनेजमेंट डैशबोर्ड से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
प्रयागराज की यह सफलता केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक मॉडल बन चुका है जिसे देश के अन्य राज्य भी अपनाना चाहते हैं। उत्तराखंड और महाराष्ट्र की टीमें प्रयागराज से सीखकर लौट रही हैं तो यह सिद्ध करता है कि उत्तर प्रदेश ने मेले के प्रबंधन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। माघ मेला का यह अंतिम चरण श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महोत्सव बना हुआ है और संगम की पुकार दूर-दूर तक गूंज रही है।

