NTI: उत्तराखंड में नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियां इस समय अपने शिखर पर हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद चुनावी माहौल गर्म है। प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, जबकि कुछ नेता अपनी ही पार्टी के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस विरोध से उपजे हालात को संभालने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने डैमेज कंट्रोल का फार्मूला अपनाना शुरू कर दिया है।
चुनावी जंग और विरोध का उभार
नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है, और नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 2 जनवरी होने के कारण पार्टियों के भीतर हलचल तेज हो गई है। 30 दिसंबर को नामांकन की अंतिम तिथि बीतने के बाद से ही राजनीतिक दल उन नेताओं को मनाने में जुटे हैं, जिन्होंने पार्टी के निर्णय के खिलाफ निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
पार्टी से नाराज निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनौती
पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने से वंचित नेता अब विरोध के स्वर मुखर कर रहे हैं और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं। इन नाराज नेताओं के कारण राजनीतिक दलों को चिंता सताने लगी है, क्योंकि ये उम्मीदवार पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सत्ताधारी पार्टी की स्थिति मजबूत, विपक्ष के लिए संकट
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ताधारी पार्टी नाराज कार्यकर्ताओं को सरकार और संगठन में अहम पद देने का वादा कर मनाने में सफल हो सकती है। लेकिन विपक्ष के पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक जय सिंह रावत ने कहा कि कई बार यह विरोध चुनावी नतीजों को भी प्रभावित करता है।
बीजेपी: विरोध से निपटने की तैयारी
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक विनोद चमोली ने बताया कि पार्टी ने कई नाराज नेताओं को मना लिया है और अन्य को मनाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता नहीं मानेंगे, उनके खिलाफ पार्टी अपने सिद्धांतों के अनुसार मजबूती से चुनाव लड़ेगी।
कांग्रेस के सामने डैमेज कंट्रोल की चुनौती
मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के लिए यह विरोध बड़ी चुनौती बन गया है। पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने स्वीकार किया कि जिन कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं मिला है, वे नाराज हैं। उन्होंने इसे स्वाभाविक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यकर्ताओं को मनाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
अंतिम दौर की हलचल
नामांकन वापसी से पहले के इस दौर में राजनीतिक दलों की सक्रियता चरम पर है। पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ओर से चल रही इस सियासी खींचतान ने चुनावी माहौल को और रोचक बना दिया है। अब देखना यह होगा कि कौन सी पार्टी इस सियासी जंग में बाजी मारती है।

