NTI: उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा, अन्य तीर्थ यात्राओं और मेलों के सुचारु संचालन के लिए धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद का गठन किया है। इससे पहले, त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड बनाया था, जिसे जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए धामी सरकार ने भंग कर दिया था। अब, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यात्राओं और मेलों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए यह नया परिषद गठित किया गया है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि परिषद के गठन की प्रक्रिया, उद्देश्य और इसकी मुख्य भूमिका क्या होगी।
उत्तराखंड में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं, जिनमें धार्मिक पर्यटकों की संख्या सर्वाधिक होती है। चारधाम यात्रा, नंदा देवी राजजात यात्रा, आदि कैलाश यात्रा, पूर्णागिरि यात्रा और विभिन्न मेलों जैसे कांवड़ मेला व अर्धकुंभ का आयोजन होता है। इन आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण व्यवस्थाएं अक्सर चरमरा जाती हैं। विशेष रूप से, 2024 की चारधाम यात्रा में अचानक उमड़ी भीड़ ने व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया। इसे देखते हुए सरकार ने यात्रियों की सुविधा और आयोजनों के कुशल प्रबंधन के लिए धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद के गठन का निर्णय लिया।
सतपाल महाराज, धर्मस्व मंत्री: “परिषद के गठन से यात्रा और मेलों का संचालन व्यवस्थित होगा। अनुभवी लोगों की क्षमता का उपयोग कर नंदा देवी राजजात जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा।”
20 मई 2024 को, चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण उत्पन्न अव्यवस्था को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने यात्रा के बेहतर प्रबंधन के लिए एक यात्रा प्राधिकरण स्थापित करने के निर्देश दिए। इसके बाद, शासन ने तेजी से कदम उठाए और प्राधिकरण के स्वरूप को निर्धारित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।
उच्च स्तरीय समिति का गठन
जून 2024 में, तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (वर्तमान मुख्य सचिव) आनंद बर्धन की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल थे:
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सचिव सचिन कुर्वे और दिलीप जावलकर
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तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) एपी अंशुमन
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गढ़वाल मंडलायुक्त विनय शंकर पांडेय
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तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल केएस नगन्याल
समिति ने सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के बाद 3 जुलाई 2024 को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। इस रिपोर्ट में यात्राओं और मेलों के सुचारु संचालन के लिए सुझाव और परिषद के स्वरूप की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
शैलेश बगौली, गृह सचिव: “उच्च स्तरीय समिति की संस्तुतियों के आधार पर मंत्रिमंडल की सहमति से धर्मस्व एवं तीर्थाटन परिषद का गठन किया गया।”
परिषद का स्वरूप और भूमिका
उच्च स्तरीय समिति की संस्तुतियों के आधार पर परिषद को तीन स्तरों पर संरचित किया गया है। यह परिषद साल भर सक्रिय रहेगी और निम्नलिखित कार्य करेगी:
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चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब यात्रा और अन्य तीर्थ यात्राओं का प्रबंधन।
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नंदा देवी राजजात, कांवड़ मेला और अर्धकुंभ जैसे मेलों की व्यवस्था।
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गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के आयुक्तों को परिषद के सीईओ की जिम्मेदारी।
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यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए योजनाओं का निर्माण और कार्यान्वयन।
देवस्थानम बोर्ड का भंग होना और पुराने प्रयास
जय सिंह रावत ने बताया कि त्रिवेंद्र सरकार द्वारा गठित देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को अव्यावहारिक मानकर भंग किया गया, जबकि इसे व्यावहारिक बनाया जा सकता था। साथ ही, एनडी तिवारी सरकार के दौरान भी चारधाम परिषद के गठन का प्रस्ताव तैयार हुआ था, लेकिन पांडा पुरोहितों के विरोध के कारण यह आगे नहीं बढ़ सका।

