देहरादून: उत्तराखंड के वन विभाग में बड़े बदलाव की घंटी बज चुकी है। वर्तमान प्रमुख वन संरक्षक (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स-हॉफ) समीर सिन्हा की 30 नवंबर को सेवानिवृत्ति होने वाली है, जिसके बाद विभाग को नया मुखिया मिलने की प्रक्रिया तेज हो गई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के लिए सहमति दे दी है, और उत्तर प्रदेश के पीसीसीएफ सुनील चौधरी को इसकी नोडल भूमिका सौंपी गई है। हालांकि, डीपीसी बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री के उत्तराखंड दौरे के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
समीर सिन्हा ने जून 2025 में इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाली थी, जब तत्कालीन हॉफ धनंजय मोहन ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली थी। 1990 बैच के आईएफएस अधिकारी सिन्हा को न केवल पीसीसीएफ हॉफ का अतिरिक्त प्रभार मिला, बल्कि अगस्त में उन्हें उत्तराखंड वन विकास निगम का प्रबंध निदेशक (एमडी) भी बनाया गया। इसके अलावा, जून में ही उन्हें कैंपा (कॉम्पेंसेटरी एफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी) की सीईओ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। उनके कार्यकाल में वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरणीय परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया, लेकिन विभाग में सीनियर अधिकारियों की लगातार सेवानिवृत्ति ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
उत्तराखंड शासन ने 29 सितंबर को केंद्र को पत्र लिखकर डीपीसी की सहमति मांगी थी, जिस पर मंत्रालय ने तत्काल सहमति जताते हुए पद की खाली होने की पुष्टि की। डीपीसी की बैठक राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी, जिसमें केंद्र की ओर से सुनील चौधरी जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। परंपरागत रूप से, इस पद पर वरिष्ठता के आधार पर ही नियुक्तियां होती रही हैं। वर्तमान में उत्तराखंड वन विभाग के सबसे वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी 1992 बैच के बीपी गुप्ता हैं, जो पीसीसीएफ (प्रशासन) के पद पर कार्यरत हैं। वे भी दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जिससे विभाग में नेतृत्व की खाली सीटें बढ़ सकती हैं।
हाल के वर्षों में वन विभाग के मुखिया पद पर अस्थिरता का दौर चला है। पिछले साढ़े चार वर्षों में आठवीं बार यह जिम्मेदारी बदली जा रही है, जो विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। इससे पहले फरवरी 2025 में भी कई वरिष्ठ पीसीसीएफ अधिकारियों की सेवानिवृत्ति सूची में बीपी गुप्ता का नाम प्रमुखता से शामिल था। विशेषज्ञों का मानना है कि नई नियुक्ति में न केवल वरिष्ठता, बल्कि वन संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों को संभालने की क्षमता पर भी जोर दिया जाएगा। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में वन विभाग की भूमिका वन्यजीव सुरक्षा, अवैध कटाई रोकने और आपदा प्रबंधन में अहम है।
सूत्र बताते हैं कि डीपीसी में संभावित उम्मीदवारों की सूची में राज्य के अन्य वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी शामिल हो सकते हैं, लेकिन बीपी गुप्ता की वरिष्ठता के कारण वे प्रबल दावेदार बने रहेंगे। हालांकि, उनकी निकट भविष्य में सेवानिवृत्ति के कारण विभाग को लंबी अवधि के लिए स्थिर नेतृत्व की तलाश होगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह नियुक्ति न केवल प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की पर्यावरण नीतियों को मजबूत करने के लिए भी जरूरी है।
जैसे ही डीपीसी की बैठक होगी, नया नाम सामने आ जाएगा। तब तक, समीर सिन्हा अपने अंतिम दिनों में विभाग को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह बदलाव उत्तराखंड के हरे-भरे जंगलों की रक्षा के लिए एक नया अध्याय लिखेगा।

