देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न उत्तराखंड कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 11 प्रस्तावों पर सहमति बनी। बैठक में वित्त, कृषि, संस्कृति, आवास, औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कई दूरगामी निर्णय लिए गए। विशेष रूप से, उपनल (उत्तराखंड पावर निगम लिमिटेड) कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन के मुद्दे को मंत्रिमंडल उपसमिति को सौंप दिया गया है। कैबिनेट ने आर्थिक राहत, स्वास्थ्य सुधार और सामाजिक कल्याण पर जोर देते हुए कई कदम उठाए, जो राज्य की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को मजबूत करेंगे।
बैठक के प्रमुख फैसलों में वित्त विभाग का निर्णय प्रमुख रहा। कैबिनेट ने नेचुरल गैस पर वैट की दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने पर मुहर लगा दी। यह कदम औद्योगिक इकाइयों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में है, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वित्त सचिव ने कहा, “यह निर्णय केंद्र की ऊर्जा नीति के अनुरूप है, जो उत्तराखंड को ग्रीन एनर्जी हब बनाने में सहायक होगा।”
कृषि क्षेत्र में आपदा प्रभावित धराली और आसपास के क्षेत्रों के सेब उत्पादकों को राहत दी गई। कैबिनेट ने रॉयल डिलिशियस सेब का समर्थन मूल्य 51 रुपये प्रति किलो और रेड डिलिशियस सेब का 45 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया। यह निर्णय 2024 की आपदा से प्रभावित किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया, “यह कदम हिमालयी कृषि को मजबूत करेगा, जहां सेब उत्पादन राज्य की जीडीपी का 15% योगदान देता है।”
संस्कृति विभाग के लिए एक सकारात्मक फैसला लिया गया। कैबिनेट ने राज्य के कलाकारों और लेखकों को दी जाने वाली मासिक पेंशन को 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये करने का निर्णय लिया। इससे लगभग 1,200 से अधिक कलाकारों को लाभ मिलेगा, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में सहायक होगा। संस्कृति मंत्री रीता बिष्ट ने कहा, “यह कदम लोक कलाओं को प्रोत्साहित करेगा, जो राज्य की पहचान हैं।”
आवास एवं शहरी नियोजन के क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने केंद्र के निर्देशानुसार निम्न जोखिम वाले भवनों या छोटे व्यावसायिक भवनों के नक्शा स्वीकृति को सरलीकृत किया। अब एम्पैनल्ड आर्किटेक्ट इनकी मंजूरी दे सकेंगे, जो पहले विचलन के दायरे में था। इससे निर्माण कार्यों में देरी कम होगी और छोटे व्यवसायियों को राहत मिलेगी।
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए ग्राउंड कवरेज को एमएसएमई यूनिट्स और औद्योगिक इकाइयों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इससे भूमि उपयोग की क्षमता बढ़ेगी और नए उद्योगों को आकर्षित किया जा सकेगा। इसके अलावा, बांस एवं रेशा विकास परिषद के ढांचे में परिवर्तन किया गया। तकनीकी स्टाफ को उपनल के बजाय आउटसोर्सिंग पर रखने की व्यवस्था की गई, जिसमें 13 पद कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे। यह कदम परिषद की दक्षता बढ़ाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कई क्रांतिकारी फैसले हुए। कैबिनेट ने आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान योजना को 100% इंश्योरेंस मोड में संचालित करने का निर्णय लिया। गोल्डन कार्ड हाइब्रिड मोड में चलेगा, जहां 5 लाख रुपये से कम के क्लेम इंश्योरेंस से भुगतान होंगे और इससे अधिक ट्रस्ट मोड से। महंगाई दर के आधार पर कर्मचारियों का अंशदान 250 रुपये से बढ़कर 450 रुपये तक हो जाएगा। इससे योजना की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी और 50 लाख से अधिक लाभार्थियों को कवरेज मिलेगा।
सिंचाई एवं लोक निर्माण विभाग के वर्क चार्ज कर्मचारियों को पेंशन का लाभ देने का फैसला भी मंजूर हुआ। इससे हजारों अस्थायी कर्मचारियों को रिटायरमेंट सुरक्षा मिलेगी। चिकित्सा शिक्षा में सुधार के लिए उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा (संशोधन) नियमावली को मंजूरी मिली। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की सेवानिवृत्ति आयु 50 से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई। सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए अलग विभाग बनाए गए। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट हल्द्वानी के लिए 4 नए पद सृजित किए गए।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 277 कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन का लाभ देने का मामला कैबिनेट उपसमिति को भेजा गया। दुर्गम एवं अति दुर्गम इलाकों में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों को 50% अतिरिक्त भत्ता देने का निर्णय लिया गया, जिससे करीब 300 डॉक्टर लाभान्वित होंगे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रंजीत सिंह ने कहा, “ये फैसले स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होंगे।”
विज्ञापन नीति पर भी चर्चा हुई, हालांकि विस्तृत फैसला अगली बैठक में। कैबिनेट के इन निर्णयों से राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 7% से ऊपर रहने का लक्ष्य मजबूत होगा। मुख्यमंत्री धामी ने बैठक के बाद कहा, “ये कदम जनकल्याण और विकास को प्राथमिकता देते हैं। 2026 में उत्तराखंड आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छुएगा।”

