देहरादून की धड़कन कहे जाने वाले ऐतिहासिक टाउन हॉल यानी जुगमिंदर हॉल की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। घंटाघर के ठीक सामने स्थित यह विरासत भवन अब सिर्फ अतीत की यादें नहीं, बल्कि भविष्य का सबसे आधुनिक एवं भव्य सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। नगर निगम ने 2 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से इसके बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। काम इतनी तेजी से चल रहा है कि अगले कुछ महीनों में ही शहरवासियों को इसका नया रूप देखने को मिल जाएगा।
- सबसे पुराना भवन 1902 में बना था, जो आज 103 वर्ष का हो चुका है। यही वह भवन है जिसमें मेयर, मुख्य नगर आयुक्त और अन्य बड़े कार्यालय आज भी संचालित हो रहे हैं। इसके बगल में 1937 में बना दूसरा भवन है, जिसकी दीवार पर आज भी गर्व से लिखा है – “नगर पालिका देहरादून”। तीसरा और सबसे खूबसूरत भवन 1938 में भगवान दास बैंक लिमिटेड ने अपने संस्थापक लाला स्वर्गीय जुगमिंदर दास की स्मृति में बनवाया था। इसी भवन के अंदर वह प्रसिद्ध जुगमिंदर हॉल है, जिसकी गूंज में कभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की आवाजें गूंजी थीं और जहाँ पुरानी नगरपालिका के ऐतिहासिक फैसले लिए गए।
जुगमिंदर हॉल सिर्फ एक सभागार नहीं, बल्कि देहरादून के स्वाधीनता संग्राम का जीता-जागता दस्तावेज है। यहाँ कभी पंडित गोविंद बल्लभ पंत, श्रीदेव सुमन जैसे महान क्रांतिकारियों की सभाएँ हुईं। यही वजह है कि शहर के बुजुर्ग आज भी इसे श्रद्धा से देखते हैं। वर्ष 2012 में इस भवन को हेरिटेज घोषित करने के लिए 3.5 करोड़ की योजना बनी थी, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी। 2015 में तत्कालीन महापौर डॉ. विनोद चमोली ने सौंदर्यीकरण का पहला बड़ा प्रयास किया था, पर वह भी अधूरा रह गया। अब 2025 में नगर आयुक्त नमामी बंसल के नेतृत्व में यह सपना साकार हो रहा है।
क्या-क्या होगा नया?
- हॉल की क्षमता मौजूदा 300 से बढ़कर 450-500 तक हो जाएगी
- पूरी तरह एयर-कंडीशनड हॉल, मॉडर्न लाइटिंग और डिजिटल साउंड सिस्टम
- उत्तराखंडी लकड़ी की नक्काशी, ऐपण कला और स्थानीय पत्थरों से बनी भित्ति-चित्रण
- आरामदायक थिएटर स्टाइल सीटें, वीआईपी लाउंज, ग्रीन रूम
- अग्निशमन, CCTV, दिव्यांग सुविधा, लिफ्ट जैसी सभी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं
- बाहरी हिस्से में पारंपरिक कुमाऊंनी-गढ़वाली स्थापत्य शैली में फसाड लाइटिंग

