नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को कड़ा निर्देश दिया है कि गोविंदघाट स्थित निजी हेलीपैड के बार-बार अस्थायी अधिग्रहण के खिलाफ विमानन कंपनी डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की दो याचिकाओं पर दो महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने चार धाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय में फैसला नहीं होता, तो कंपनी सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका दायर कर सकती है। पीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर याचिकाओं को 9 मार्च 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाए और संबंधित बेंच दो महीने में निपटारा करे।
डेक्कन चार्टर्स कंपनी का गोविंदघाट (चमोली जिला) में निजी हेलीपैड है, जिसका वैध लीज मार्च 2027 तक है। कंपनी का आरोप है कि राज्य सरकार ने उचित प्रक्रिया अपनाए बिना मई 2024 से बार-बार अस्थायी अधिग्रहण किया और हेलीपैड प्रतिस्पर्धी कंपनी पवन हंस लिमिटेड को सौंप दिया। पहला अधिग्रहण 23 मई 2024 को हुआ, जिसके खिलाफ याचिका दायर की गई। फिर भी जून 2025 में दोबारा अधिग्रहण किया गया। हाईकोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। कंपनी ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रक्रिया की अनदेखी की।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि चार धाम यात्रा के दौरान हेलीपैड की जरूरत बढ़ जाती है, इसलिए मामला जल्द निपटाया जाना चाहिए। यदि हाईकोर्ट समय पर फैसला नहीं लेता, तो कंपनी शीर्ष अदालत में वापस आ सकती है। यह फैसला चार धाम यात्रा 2026 से पहले हेलीपैड संचालन की अनिश्चितता को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। गोविंदघाट हेलीपैड बद्रीनाथ-हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए महत्वपूर्ण है।


