Monday, February 9, 2026
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कीर्तिनगर में अलकनंदा नदी में अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन

NTI: कीर्तिनगर (टिहरी गढ़वाल)। विकासखंड कीर्तिनगर के बागवान क्षेत्र में अलकनंदा नदी में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों के जरिए अवैध खनन के खिलाफ ग्रामीणों ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश संयोजक गणेश भट्ट के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कीर्तिनगर तहसील पहुंचकर इस अवैध गतिविधि के खिलाफ आवाज उठाई।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन पट्टा संचालकों द्वारा पोकलैंड और जेसीबी मशीनों का उपयोग कर अलकनंदा नदी के किनारे से लेकर नदी के बीच तक बांध बनाकर बहुमूल्य पत्थरों को निकाला जा रहा है। इससे नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और जलीय जीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह का अत्यधिक खनन जारी रहा, तो भविष्य में नदी का रुख गांव के खेतों की ओर मुड़ सकता है, जिससे बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाएगा।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक गणेश भट्ट ने कहा, “बागवान और भल्ले गांव में खनन पट्टे कई वर्षों से संचालित हैं, लेकिन पहली बार यह देखा जा रहा है कि इन दोनों पट्टों में शासन-प्रशासन से अनुमति लेकर प्रकृति का दोहन जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से किया जा रहा है। यह न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका को भी प्रभावित कर रहा है।”

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि श्रीनगर बांध प्रबंधकों द्वारा रोज सुबह के अंधेरे में पानी रोक दिया जाता है और तब नदी का जल स्तर कम होते ही इन मशीनों से बहुमूल्य खनिज पत्थरों को निकाला जाता है। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की। उन्होंने बागवान और भल्ले गांव में खनन पट्टों में जेसीबी, पोकलैंड आदि मशीनों के प्रयोग को हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने की मांग की। साथ ही, बागवान के खनन पट्टे के क्षेत्र को घटाकर सिर्फ 2 हेक्टेयर तक करने की भी मांग की। इस संबंध में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी टिहरी को एक ज्ञापन भी भेजा है।

इस प्रदर्शन में सरला देवी, सुशीला देवी, बीना देवी, दीपा देवी, प्रतिमा देवी, मंगला देवी सहित कई ग्रामीण महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

इस मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो पर्यावरण और स्थानीय लोगों की आजीविका को गंभीर नुकसान हो सकता है।

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