रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की हालत बेहद खराब है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए स्थापित यह आवासीय विद्यालय वर्ष 2009 से ही उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। यहां न तो खेल मैदान है और न ही खुला आंगन, जिससे छात्रों का जीवन चारदीवारी में कैद सा हो गया है। विद्यालय जिला मुख्यालय से सटे मालतोली क्षेत्र में स्थित है, जहां खुले नाले, टूटी पानी की टंकियां और क्षतिग्रस्त चाहरदीवारी ने परिसर को असुरक्षित बना दिया है। छात्र केवल भवन की छत पर बैठकर बाहरी दुनिया को देखने को मजबूर हैं।
यह विद्यालय केंद्र सरकार की नवोदय विद्यालय योजना के तहत स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण यहां छात्रों की संख्या कभी 100 तक नहीं पहुंची। वर्तमान में कक्षा 6 से 12 तक कुल 92 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें छात्र और छात्राओं की संख्या लगभग समान है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि ये हालात छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर रहे हैं।
परिसर में अव्यवस्था का आलम
विद्यालय परिसर में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। शौचालयों की संख्या अपर्याप्त होने से छात्रों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। खुले नालों से लगातार दुर्गंध फैलती रहती है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा है। खाद्य सामग्री को रखने वाले स्टोर रूम में सीलन की समस्या बनी हुई है, खासकर बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से सामग्री खराब होने का जोखिम रहता है। भवन की बनावट और रंग-रोगन भी उदास करने वाला है, जिससे पूरा वातावरण निराशाजनक लगता है।
क्षतिग्रस्त चाहरदीवारी के कारण सुरक्षा भी खतरे में है। पहले दो सुरक्षा गार्ड तैनात थे, लेकिन हाल ही में एक की आकस्मिक मृत्यु हो गई है। विद्यालय के आसपास कोई खेल मैदान न होने से छात्रों को शारीरिक व्यायाम के अवसर नहीं मिलते। वे भवन की छत पर ही सीमित गतिविधियां कर पाते हैं। स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी
विद्यालय में स्टाफ की कमी भी एक बड़ी समस्या है। वर्तमान में कुल 13 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें केवल दो स्थायी शिक्षक हैं। शेष संविदा और अतिथि कर्मी हैं। तीन शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। कार्यालय स्टाफ के नाम पर केवल एक कंप्यूटर ऑपरेटर है, जो उपनल के माध्यम से तैनात है। इस कमी के कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
नीचे दी गई तालिका में विद्यालय की वर्तमान स्थिति का विवरण है:
| विवरण | संख्या/विवरण |
|---|---|
| कुल छात्र (कक्षा 6-12) | 92 (लगभग समान छात्र-छात्राएं) |
| स्थायी शिक्षक | 2 |
| संविदा/अतिथि कर्मी | 11 |
| रिक्त पद (शिक्षक) | 3 |
| सुरक्षा गार्ड | 1 (एक की मृत्यु) |
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि विद्यालय की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। प्रबंधन का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण छात्रों को व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पाता, जो उनकी शैक्षणिक प्रगति को बाधित करता है।
नए परिसर की उम्मीद
राहत की बात यह है कि वर्ष 2015-16 में स्वीकृत भूमि पर नया परिसर निर्माणाधीन है। जखोली ब्लॉक के सुमाड़ी क्षेत्र में 45 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह भवन जल्द पूरा होने की उम्मीद है। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि भवन पूर्ण होते ही विद्यालय को नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इससे छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जैसे खेल मैदान, आधुनिक शौचालय और सुरक्षित वातावरण।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए स्थापित यह संस्थान उपेक्षा के कारण अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहा। स्थानीय अभिभावक और शिक्षाविदों का मानना है कि यदि समय पर सुधार नहीं हुए तो छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए। नए परिसर के पूरा होने से विद्यालय को नई पहचान मिलेगी और छात्रों के सपनों को पंख लगेंगे।


