उत्तरकाशी। उत्तराखंड जल विद्युत निगम (यूजेवीएनएल) के लिए मनेरी-भाली फेज-टू जलविद्युत परियोजना की हेड रेस टनल (एचआरटी) में हो रहा लगातार पानी का रिसाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। लंबे समय से जारी इस समस्या को सुलझाने के लिए निगम अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। सुरंग के अंदर पानी में उतरकर जांच करने में सक्षम रोबोट (रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल – आरओवी) को जल्द ही सुरंग में उतारा जाएगा, जो उच्च गुणवत्ता वाले फोटो और वीडियो उपलब्ध कराकर रिसाव के सटीक स्थान और कारण का पता लगाएगा।
परियोजना की 16 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल में परीक्षण के दौरान ही रिसाव शुरू हो गया था। 304 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना वर्ष 2008 में बनकर तैयार हुई थी, लेकिन जोशियाड़ा से धरासू तक की सुरंग में कई स्थानों पर पानी रिसने लगा। शुरुआती उपचार के बाद परियोजना शुरू की गई, लेकिन चिन्यालीसौड़ क्षेत्र में गमरीगाड के पास रिसाव की समस्या बनी रही। वर्ष 2021 में मरगांव चमियारी के पास भारी रिसाव से मरगांव की सिंचाई नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।तब से अब तक रिसाव रोकने के उपचार पर निगम तीन करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुका है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। वर्तमान में सुरंग से करीब 1,500 लीटर प्रति सेकंड तक पानी रिस रहा है, जो परियोजना की दक्षता और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
जल विद्युत निगम के जनसंपर्क अधिकारी विमल डबराल ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम (एनएचपीसी, सिंचाई विभाग और टीएचडीसी के विशेषज्ञ शामिल) फरवरी के प्रथम सप्ताह में सुरंग का निरीक्षण करेगी। आरओवी को उतारने के लिए धरासू पावर हाउस से उत्तरकाशी की ओर करीब तीन किलोमीटर तक एक से डेढ़ दिन का क्लोजर लिया जाएगा। रोबोट गमरीगाड क्षेत्र के आसपास हो रहे रिसाव की वास्तविक स्थिति का उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो और फोटो कैप्चर करेगा।हाई पावर कमेटी की निगरानी में यह पूरा अभियान चलाया जा रहा है।
रोबोट से प्राप्त जानकारी के आधार पर रिसाव के स्थायी उपचार का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। निगम का प्रयास है कि जल्द से जल्द इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि परियोजना पूर्ण क्षमता से चल सके और आसपास के क्षेत्रों में कोई खतरा न रहे। यह घटना उत्तराखंड की जलविद्युत परियोजनाओं में तकनीकी चुनौतियों और रखरखाव की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है। विशेषज्ञों की उम्मीद है कि रोबोटिक जांच से समस्या का सटीक निदान संभव होगा और भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचा जा सकेगा।

