उत्तराखंड सरकार ने राज्य के राजकीय उद्यानों (सरकारी बागानों) को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम उठाया है। राज्य में कुल 97 राजकीय उद्यान मौजूद हैं, जिन्हें आधुनिक मॉडल सेंटर्स के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उद्यान विभाग की महानिदेशक वंदना सिंह के अनुसार, ये उद्यान न केवल उत्पादकता बढ़ाने के केंद्र बनेंगे, बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण हब और औषधीय पर्यटन (मेडिसिनल टूरिज्म) के आकर्षण का प्रमुख स्रोत भी बनेंगे। यह योजना उत्तराखंड की बागवानी, कृषि और पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान करने वाली साबित होगी।
उत्तराखंड की पहाड़ी भूगोल और जलवायु के कारण यहां औषधीय पौधों, फलों और सब्जियों की खेती की अपार संभावनाएं हैं। राज्य में सेब, आड़ू, नाशपाती, कीवी, अखरोट जैसे फल तथा जड़ी-बूटियां जैसे अश्वगंधा, ब्राह्मी, जटामांसी आदि प्राकृतिक रूप से उगते हैं। राजकीय उद्यानों की शुरुआत दशकों पहले हुई थी, जब ये औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण और उत्पादन के लिए प्रसिद्ध थे। इन उद्यानों में उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार किए जाते थे और किसानों को वितरित किए जाते थे।
लेकिन समय के साथ अधिकांश उद्यान उपेक्षा का शिकार हो गए। पुरानी तकनीकें, रखरखाव की कमी, मानव संसाधन की कमी और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से इनकी उत्पादकता घटी। कई उद्यानों में पौधे सूख गए, संरचनाएं जर्जर हो गईं और ये केवल नाममात्र के बागान बनकर रह गए। उद्यान विभाग की हालिया समीक्षाओं में पाया गया कि इन उद्यानों को पुनर्जीवित करना आवश्यक है, ताकि राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
योजना के प्रमुख बिंदु
उद्यान विभाग द्वारा तैयार की जा रही इस कार्ययोजना में निम्नलिखित प्रमुख तत्व शामिल हैं:
- आधुनिकीकरण और उत्पादकता वृद्धि — पुरानी पारंपरिक पद्धतियों की जगह सघन बागवानी (इंटेंसिव हॉर्टिकल्चर), ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। नवीनतम तकनीकों जैसे हाई-डेंसिटी प्लांटिंग, टिश्यू कल्चर और प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन को अपनाया जाएगा।
- किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र — प्रत्येक प्रमुख उद्यान को किसान प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां किसानों को उन्नत बीज, रोपण तकनीक, फसल प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण और बाजार से जुड़ाव पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और बागवानी में रुचि बढ़ेगी।
- औषधीय पर्यटन का विकास — उत्तराखंड पहले से ही आयुष (AYUSH) और वेलनेस टूरिज्म में अग्रणी है। इन उद्यानों को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जाएगा, जहां वे औषधीय पौधों की बारीकियां देख सकें, स्थानीय जलवायु-अनुकूल फल प्रजातियों का रोपण समझ सकें और हर्बल वॉक, योग सेशन या हर्बल प्रोडक्ट्स की खरीदारी कर सकें। कुछ उद्यानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (उत्कृष्टता केंद्र) के रूप में विकसित किया जाएगा, जैसे औषधीय पौधों या विशिष्ट फलों के लिए।
- पर्यटक सुविधाएं और रोजगार सृजन — उद्यानों में वॉकवे, रेस्ट एरिया, इंटरप्रिटेशन सेंटर, कैफेटेरिया और पार्किंग जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। इससे स्थानीय लोगों को गाइड, होमस्टे, उत्पाद बिक्री आदि से जुड़े रोजगार मिलेंगे।
कुमाऊं मंडल में उद्यानों की संख्या (जिला-वार)
कुमाऊं मंडल में उद्यानों की अच्छी संख्या है, जो योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे:
- अल्मोड़ा: 11
- नैनीताल: 10
- पिथौरागढ़: 10
- बागेश्वर: 06
- चंपावत: 06
- ऊधम सिंह नगर: 05
शेष उद्यान गढ़वाल मंडल में हैं, जहां कुल 97 उद्यानों में से अधिकांश स्थित हैं।
प्रमुख उद्यान जैसे चौबटिया (अल्मोड़ा) पहले से ही हॉर्टी-टूरिज्म के रूप में उभर रहा हैं, जहां सेब और अन्य फलों के बागानों के साथ पर्यटक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यह पहल उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभों—बागवानी, पर्यटन और ग्रामीण रोजगार—को मजबूत करेगी। राज्य में बागवानी क्षेत्र से लाखों किसान जुड़े हैं। पुनर्जीवित उद्यान बेहतर पौध सामग्री उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाएंगे। औषधीय पर्यटन से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, जो पहले से ही योग, आयुर्वेद और हर्बल थेरेपी के लिए यहां आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में हिमालयी क्षेत्रों के लिए ऐसी योजनाएं आवश्यक हैं। उत्तराखंड सरकार की यह पहल प्रधानमंत्री कृषि योजनाओं और राज्य की हर्बल पार्क परियोजनाओं से भी जुड़ सकती है। योजना को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
यह कदम न केवल पुराने उद्यानों को नया जीवन देगा, बल्कि उत्तराखंड को हर्बल और हॉर्टी-टूरिज्म के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। सरकार का लक्ष्य है कि इन उद्यानों से किसानों की आय दोगुनी हो और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त बने।

