देहरादून : उत्तराखंड परिवहन विभाग के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पिछले कई वर्षों से करीब 22 हजार कमर्शियल वाहनों के मालिकों ने विभाग को चूना लगाकर 50 करोड़ रुपये का बकाया टैक्स बकायी छोड़ दी है। आश्चर्यजनक रूप से, ये वाहन स्वामी ‘गायब’ हो चुके हैं—कई तो 15 साल पुराने वाहनों के मालिक हैं, जिनकी गाड़ियां खत्म हो चुकी हैं, लेकिन टैक्स का मीटर अभी भी चल रहा है। यह आंकड़ा केवल देहरादून संभाग का है, जो राज्य की सड़क सुरक्षा और राजस्व के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। विभाग ने अब बकायेदारों को चेतावनी देते हुए वसूली अभियान तेज कर दिया है, जिसमें जुर्माने के साथ पूरी राशि जमा न करने पर NOC जारी न करने का सख्त नियम लागू कर दिया गया है।
गायब स्वामियों का खेल: गलत पते और पुरानी गाड़ियां, विभाग की नींद हराम
परिवहन विभाग की जांच में सामने आया कि ये 22 हजार वाहन स्वामी टैक्स चोरी के लिए पंजीकरण के समय गलत पते दर्ज करा चुके हैं। रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करने के बाद भी विभाग के कर्मचारी उनके घरों पर पहुंचे, तो पता चला कि वहां कोई नहीं रहता। कई मामलों में स्वामी की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन वाहनों का अकाउंट बंद न होने से बकाया बढ़ता जा रहा है। देहरादून आरटीओ संदीप सैनी ने बताया, “ये वाहन 2012 से पहले, 2012-2022 और 2022 से अब तक के स्लैब में बांटे गए हैं। नोटिस जारी हो चुके हैं, और रिकवरी सर्टिफिकेट काटे जा रहे हैं। बड़े बकायेदारों के घर टीम भेजी जा रही है, जबकि फोन पर संपर्क की कोशिश हो रही है।”
सैनी ने चेतावनी दी, “पुरानी गाड़ियां खत्म हो जाने पर भी टैक्स का बोझ कम नहीं होता। स्वामियों को विभाग में आकर अकाउंट बंद कराना होगा, वरना आगे नोटिस और जुर्माना बढ़ेगा। जब तक पूरी राशि जुर्माने समेत जमा न हो, NOC नहीं मिलेगी।” विभाग की टीमों ने अलग-अलग स्लैब बनाकर अभियान शुरू किया है, जिसमें प्राथमिकता पुराने बकायों को दी जा रही है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कैसे हुई? क्या पंजीकरण प्रक्रिया में लापरवाही थी?
राज्यव्यापी संकट की आशंका: क्या अन्य संभागों में भी यही हाल?
देहरादून संभाग के इस आंकड़े ने पूरे उत्तराखंड परिवहन विभाग को हिलाकर रख दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अन्य संभागों—जैसे हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर या नैनीताल—में भी इसी तरह की जांच हुई, तो बकाया राशि सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकती है। पर्वतीय इलाकों में पुराने कमर्शियल वाहन, जैसे टैक्सी और बसें, अक्सर टैक्स से बचने के लिए ‘गायब’ हो जाते हैं। इससे न केवल विभाग का राजस्व प्रभावित हो रहा है, बल्कि सड़क सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं—क्योंकि बकायेदार वाहन अक्सर बिना फिटनेस सर्टिफिकेट चलाए जाते हैं।
परिवहन विभाग ने अब डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत करने का फैसला लिया है। आधार लिंकिंग और GPS ट्रै킹 के जरिए भविष्य में ऐसी चोरी रोकने की योजना है। लेकिन फिलहाल, कर्मचारियों को बकायेदारों की तलाश में भटकना पड़ रहा है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “कई स्वामी दूसरे राज्यों में चले गए हैं। उनके वाहन तो उत्तराखंड में ही हैं, लेकिन पते बदल चुके। वसूली के लिए अंतरराज्यीय समन्वय जरूरी है।”
वाहन स्वामियों के लिए चेतावनी: टैक्स चोरी का अंत, वरना NOC पर ब्रेक
यह अभियान कमर्शियल वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी है। टैक्स बकाया होने पर न केवल जुर्माना लगेगा, बल्कि वाहन जब्ती और लाइसेंस सस्पेंड की कार्रवाई भी हो सकती है। सैनी ने अपील की, “बकायेदार स्वेच्छा से आकर भुगतान करें। पुरानी गाड़ियों के लिए विशेष छूट की योजना पर विचार हो रहा है, लेकिन अकाउंट बंद करना अनिवार्य है।” राज्य सरकार ने विभाग को लक्ष्य दिया है कि वर्षांत तक कम से कम 30% बकाया वसूल हो।
क्या होगा अगला कदम? विभाग की उम्मीदें, लेकिन चुनौतियां बरकरार
उत्तराखंड परिवहन विभाग अब इस अभियान को पूरे राज्य में फैलाने की तैयारी में है। लेकिन सफलता के लिए स्वामियों का सहयोग जरूरी है। अगर बकाया वसूली नहीं हुई, तो सड़क रखरखाव और सुरक्षा पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं: समय पर टैक्स जमा करें, गलत पते से बचें। क्या यह अभियान टैक्स चोरी के इस जाल को तोड़ पाएगा? आने वाले महीनों में नतीजे साफ करेंगे।

