देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के हर परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत ढाल प्रदान करने के लिए अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना का विस्तृत संचालन आदेश जारी किया गया था। यह योजना पूर्व की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) और यू-हेल्थ योजना को समाहित करते हुए अब राज्य के समस्त पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का फैमिली फ्लोटर कवरेज देगी। सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों (कार्यरत एवं सेवानिवृत्त) तथा उनके परिवारों को असीमित चिकित्सा सुरक्षा मिलेगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी उत्तराखंडी परिवार चिकित्सा के अभाव में नहीं रहेगा – यह योजना आम नागरिकों से लेकर राजकीय कर्मचारियों तक के लिए वरदान साबित होने की सम्भावना थी।
योजना के मुख्य प्रावधानों में आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन से जुड़े परिवारों को 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की सुरक्षा शामिल थी। पूर्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थियों का कवरेज 1.75 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया। पुराने कार्ड भी मान्य रहेंगे। शेष पात्र परिवारों को भी 5 लाख रुपये का कवर मिलेगा। कोई लाभार्थी दो योजनाओं का दोहरा लाभ नहीं ले सकेगा।
पहचान के लिए 2011 की मतदाता सूची या राशन कार्ड डाटाबेस का उपयोग होगा, लेकिन सरकारी आदेश में साफ है कि राशन कार्ड अनिवार्य नहीं है। फिर भी कुछ जिलों में आपूर्ति अधिकारी राशन कार्ड की मांग कर रहे हैं, जो नियम विरुद्ध है। डाटाबेस पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे, आधार और फोटो पहचान पत्र पर तैयार किया जाएगा ताकि दोहरी लाभ से बचा जा सके।
पात्रता और पहचान की प्रक्रिया आदेश के पैरा 2.2 में स्पष्ट श्रेणियां दी गई हैं। पहचान के लिए 2011 की सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना (एसईसीसी), 2012 की मतदाता सूची या राशन कार्ड डाटाबेस का उपयोग होगा। डाटाबेस पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे, आधार और फोटो आईडी पर तैयार किया जाएगा।
हालांकि, कुछ जिलों में जिला आपूर्ति अधिकारी राशन कार्ड को अनिवार्य बता रहे हैं, जो आदेश के विपरीत है। सरकारी दस्तावेजों में साफ लिखा है कि राशन कार्ड या मतदाता सूची में शामिल लोग पात्र हैं। राज्य सरकार राशन कार्ड न होने पर भी परिवार रजिस्टर या अन्य दस्तावेजों से कार्ड जारी करने की दिशा में प्रयासरत है, ताकि कोई पात्र व्यक्ति वंचित न रहे।
उपचार की सुविधाएं और आपातकालीन प्रावधान
राज्य के अंदर और बाहर के राजकीय एवं निजी चिकित्सालयों को पंजीकृत किया जाएगा। राज्य के बाहर सीजीएचएस दरों पर भुगतान होगा। डायग्नोस्टिक सेंटर और औषधालय भी एनएबीएल या सीजीएचएस मानकों पर शामिल होंगे। सामान्य परिस्थितियों में राजकीय अस्पताल से रेफरल अनिवार्य है, लेकिन आपात स्थिति में सीधा उपचार संभव है। इमरजेंसी में 50 से अधिक बीमारियां शामिल हैं – जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, एपेंडिसाइटिस, गनशॉट वाउंड, जलन, जहर, गर्भावस्था जटिलताएं आदि। जानलेवा स्थिति में रेफरल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी और पहाड़ी क्षेत्रों को विशेष लाभ
आयुष्मान भारत से जुड़े परिवारों और सरकारी कर्मचारियों को देशभर में पोर्टेबिलिटी मिलेगी। योजना में कुल 1360 पैकेज हैं, जिसमें हृदय रोग (120), कैंसर (112), हड्डी (114) आदि शामिल हैं। पहाड़ी जिलों (अल्मोड़ा, चमोली, उत्तरकाशी आदि) में पैकेज दर में 10% अतिरिक्त वृद्धि है। एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पतालों को भी अतिरिक्त भुगतान।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए राशन कार्ड की शर्त में ढील देने पर विचार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 13.99 लाख राशन कार्ड से 60 लाख से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं। बजट में योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह योजना उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करेगी और पहाड़ी क्षेत्रों में निकटवर्ती अस्पतालों से बेहतर सुविधा सुनिश्चित करेगी। अब स्वास्थ्य कोई अमीर-गरीब की दीवार नहीं रहेगा – अटल आयुष्मान योजना से हर उत्तराखंडी को मिलेगी मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा।

